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प्राइमरी स्कूल के टीचर की ख्याति विदेशों तक पहुंची, 20 शिक्षक रोज आते हैं ट्यूशन लेने

स्कूल में छुट्टी होने के बाद रोज संकुल केंद्र में लगती है शिक्षकों की अंग्रेजी क्लास

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 11:09 AM IST
अन्य स्कूलों के शिक्षक शिक्षा अन्य स्कूलों के शिक्षक शिक्षा

- डोंगीपानी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक शशि को लंदन, कनाडा से भी मिला प्रोत्साहन

रायगढ़. यह तस्वीर किसी समीक्षा बैठक की नहीं है। बैठे हुए लोगों में कोई प्राइमरी, तो कोई हायर सेकंडरी स्कूल के टीचर हैं। यह बरमकेला संकुल केंद्र है और बैठे हुए शिक्षक अंग्रेजी सीख रहे हैं। इनके मेंटर बने हैं, शशि कुमार बैरागी। सरकारी स्कूल में छुट्टी होने के बाद रोजाना यहां शाम 5 से 6 बजे तक शशि अपने सहयोगी और सीनियर शिक्षकों की अंग्रेजी की क्लास लेते हैं।

अन्य स्कूलों के शिक्षक भी हुए प्रोत्साहित

शशि डोंगी पानी के प्राइमरी स्कूल के शिक्षक हैं। उन्होंने स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी बोलना, लिखना और पढ़ना सिखाया। भास्कर में समाचार प्रकाशित होने के बाद, जब उनकी ख्याति देश-विदेश तक पहुंची तो ब्लॉक के कई शिक्षकों ने अंग्रेजी सीखकर बच्चों को सिखाने का जज्बा पैदा हुआ। शशि को अंग्रेजी पढ़ाता देख कई शिक्षक स्कूल में ऐसा करने लगे हैं। 20 शिक्षक हर रोज उनसे ट्यूशन ले रहे हैं।


इन स्कूलों के शिक्षक भी पहुंच रहे ट्यूशन के लिए
शशि के पास आने वाले शिक्षकों में बेंगची हाई स्कूल, खिंचरी प्राइमरी स्कूल से 1-1 शिक्षिका, बघनपुर मिडिल स्कूल से एक टीचर, लिंजिर के प्राइमरी, मिडिल व हाई स्कूल से एक-एक टीचर, प्रधानपुर हाई स्कूल से एक, बरमकेला प्राइमरी स्कूल से एक शिक्षिका, रोहिनापाली व चांटीपाली समेत अन्य स्कूलों के शिक्षक अंग्रेजी का ट्यूशन लेने पहुंच रहे हैं। 15 दिन पहले इनकी ट्यूशन शुरू हुआ। इन्हें दो माह के भीतर यानी नवंबर माह तक बच्चों को अंग्रेजी, पढ़ाने, लिखाने लायक दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अंग्रेजी सीखने के लिए क्षेत्र के और भी शिक्षक उत्सुक हैं, मगर जगह की कमी की वजह से ये बैच खत्म होने के बाद दूसरा बैच शुरू किया जाएगा।


इसलिए शुरू किया यह अभियान

शशि कुमार बैरागी ने भास्कर से चर्चा करते हुए बताया कि वे सभी स्कूलों में जाकर बच्चों को अंग्रेजी नहीं सीखा सकते। सरकारी स्कूल में गरीब तबके के बच्चे ही पढ़ते हैं। लोगों को यह एहसास नहीं होना चाहिए कि उनकी आर्थिक तंगी की वजह से बच्चों को अच्छी व महंगी स्कूलों में शिक्षा नहीं दे सकें। इसलिए उन्होंने सरकारी स्कूल के शिक्षकों को ही अंग्रेजी पढ़ाने का सोचा ताकि वे इंग्लिश विषय में परिपक्व होकर अपने अपने स्कूल में जाकर महंगे प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की तरह जानकार बना सकें।


विदेशों से बच्चों के लिए गिफ्ट
भास्कर ने ही सबसे पहले डोंगी पानी प्राइमरी स्कूल के बच्चों की फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने, लिखने व पढ़ने की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद देशभर में मीडिया ने खबर प्रकाशित की और दिखाई। भारत के साथ ही विदेशों में भी इसकी चर्चा हुई। इसके बाद डोंगी पानी स्कूल व यहां पदस्थ टीचर शशि बैरागी के पास विदेशों से गिफ्ट पहुंचने लगा। लंदन के नरेंद्र फांसे नामक व्यक्ति ने 10 हजार रुपए का चेक, कनाडा के गौरव अरोरा ने 15 स्कूल बैग, लंदन से ही एक दूसरे व्यक्ति द्वारा 27 हजार रुपए का चेक, यूपी के एक बिजनेसमैन त्रिलोचन सिंह ने 20 स्कूल बैग भेजे। वहीं स्थानीय स्तर पर रामदास द्रोपदी फाउंडेशन की ओर से स्कूल के बच्चों को दरी, जूता, टाई बेल्ट, पुस्तक कॉपी व सारंगढ़ की मानवता नामक एक संस्था से स्कूल में फैन और उनके सहयोगी टीचर रघुवर पैकरा, मुकेश चौहान, अभिषेक मनहर ने वॉटर प्यूरीफायर भेंट की है।

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