Hindi News »Chhatisgarh »Raigarh» नौ ब्लॉक से 50 का समूह बनाकर मितानिनें डटीं आंदोलन में, गांवों में स्वास्थ्य सेवा प्रभावित

नौ ब्लॉक से 50 का समूह बनाकर मितानिनें डटीं आंदोलन में, गांवों में स्वास्थ्य सेवा प्रभावित

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा मितानिनों के अनिश्चितकालीन हड़ताल का गुरुवार को तीसरा दिन रहा। कचहरी चौक जांजगीर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:25 AM IST

नौ ब्लॉक से 50 का समूह बनाकर मितानिनें डटीं आंदोलन में, गांवों में स्वास्थ्य सेवा प्रभावित
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

मितानिनों के अनिश्चितकालीन हड़ताल का गुरुवार को तीसरा दिन रहा। कचहरी चौक जांजगीर में मितानिनें तीन सूत्रीय मांगों को लेकर डटी रही। आंदोलन में जिले के नौ ब्लॉक से 50-50 की समूह बनाकर मितानिनें शामिल हो रही है जिससे ग्रामीण इलाकों में संस्थागत प्रसव, टीकाकरण समेत दवा वितरण कार्यक्रम में असर दिखने लगा है। स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित हो रही है।

संघ के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार लहरे ने बताया कि मितानिन पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काम कर रही है। जिसके कारण शिशु मातृ मृत्युदर में कमी, संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हुई है। पोषण के क्षेत्र में भी सुधार आया है। लेकिन मितानिनों को नाम मात्र ही प्राेत्साहन राशि दी जा रही है। हड़ताल के दौरान मितानिन कोई काम नहीं करेंगे। ब्लाक समन्वयक व पंचायत समन्वयक को 30 हजार मानदेय, मितानिन प्रशिक्षक को 20 हजार, हेल्प डेस्क व मितानिन को 15 हजार रुपए दिया जाए।

जिले के सभी ब्लाॅक मुख्यालय से मितानिन हड़ताल पर शामिल हुई। जिले में 3880 मितानिन कार्यरत हैं। प्रशिक्षक 180, 18 ब्लॉक कोआर्डिनेडर, 9 स्वस्थ पंचायत समन्वयक और सभी सीएचसी में 30 हेल्प डेक्स है। प्रोत्साहन राशि के स्थान पर 15 हजार रुपए मानदेय प्रतिमाह दिया जाए। मितानिनों व मितानिन कार्यकर्ताओं का स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान को देखते हुए राज्यांश राशि 100% किया जाए।

महंगाई को ध्यान में रखकर मानदेय, क्षतिपूर्ति राशि में 15% वार्षिक वृद्धि के साथ नियमित भुगतान किया जाए।

हड़ताल के तीसरे दिन भी कचहरी चौक में आंदोलन में बैठीं मितानींन।

स्वास्थ्य कार्यक्रम गांवों में हो रहे प्रभावित

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों में मितानिनों की मुख्य भूमिका होती है। भले ही स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता पदस्थ रहते हैं। पल्स पोलियो, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, गर्भवती की चार जांच, परिवार नियोजन, गांव में बीमारी होने पर दवाई बांटना, नवजात की सुरक्षा, पोषण व कुपोषण समेत अन्य कार्यक्रमों में सहयोग करती है। मितानिनों ने बताया कि शासन मितानिन कार्यक्रम को काफी हल्के में ले रही है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Raigarh

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×