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नीट का कटऑफ गिरा, 131 अंक पर भी मिलेगी एमबीबीएस सीट

सीबीएसई 6 मई को नीट कंडक्ट करवाने जा रही है। वहीं, एमसीआई ने पांच नए मेडिकल कॉलेजों को भी नीट में शामिल होने की...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:00 AM IST
सीबीएसई 6 मई को नीट कंडक्ट करवाने जा रही है। वहीं, एमसीआई ने पांच नए मेडिकल कॉलेजों को भी नीट में शामिल होने की अनुमति दे दी है। ऐसे में इस बार स्टूडेंट्स को 500 अधिक सीटों पर एडमिशन मिल सकेगा।

नीट के माध्यम से पीजी की सीट्स भरने के सरकार ने भी हाल ही परसेंटाइल को पिछली बार की तुलना में 15 कम कर दिया है। यानी, अब 50 की बजाय जनरल कैटेगरी में 35 परसेंटाइल और रिजर्व कैटेगरी में 25 परसेंटाइल पर भी स्टूडेंट्स को पीजी कोर्स में आसानी से एडमिशन मिल जाएगा। गवर्नमेंट ने यह डिसीजन पीजी की नॉन क्लीनिकल सीट्स को भरने के लिए लिया है। नीट यूजी की बात करें, तो पिछले साल 2017 में 18 परसेंट तक के स्टूडेंट्स को काउंसलिंग में शामिल किया गया था। अब इस बार भी कम परसेंटेज वाले स्टूडेंट्स नीट क्वालिफाई कर पाएंगे। सीबीएसई परसेंटाइल के अनुसार इंडिविजुअल सब्जेक्ट में पासिंग मार्क्स क्राइटेरिया से कम होने पर भी यदि टोटल परसेंटाइल 18 प्रतिशत के भीतर है, तो स्टूडेंट नीट काउंसलिंग का हिस्सा बन सकते हैं।2016-17 में हुई काउंसलिंग में 20 या 18 प्रतिशत तक लाने वाले स्टूडेंट्स भी नीट काउंसलिंग का हिस्सा बने, ऐसे में यदि स्टूडेंट को बायोलॉजी में 20 प्रतिशत मार्क्स मिले हैं और फिजिकल में सिर्फ 5 प्रतिशत, तो भी स्टूडेंट आराम से काउंसलिंग में अपीयर हो सकता है। जबकि, 2015 में नीट में जनरल कैटेगरी में 50 मार्क्स और रिजर्व में 40 प्रतिशत कटऑफ रखा गया था। ऐसे में 720 में 360 मार्क्स लाना जरूरी था। 2016 में परसेंटाइल मेथड लागू होने के कारण 50वीं व 40वीं परसेंटाइल वाले को एडमिशन दिया गया। इससे 18 से 20 % स्कोर करने वाले छात्र जिनके मार्क्स 131 से 145 थे, उन्हें भी एमबीबीएस में एडमिशन के लिए एलिजिबल माना गया।

इसीलिए पड़ रही एक्जिट टेस्ट की जरूरत

एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसे में अगर स्टूडेंट्स को मेडिकल में एडमिशन मिल रहा है, डॉक्टर्स की क्वालिटी में गिरावट जल्द ही समाज पर प्रभाव डालेगी। यही वजह है कि एमबीबीएस के बाद भी डॉक्टर टाइटल के लिए एक्जिट टेस्ट प्लान किया जा रहा है। इसमें रिजर्व और जनरल कैटेगरी के पासिंग मार्क्स तय किए जाएंगे, ताकि सोसायटी को बेहतर डॉक्टर्स मिल सकें।

सीबीएसई ने बदला क्वालिफाई क्राइटेरिया

पिछले कुछ सालों से रिजर्व सीट्स खाली जा रही थीं, इन्हें भरने जनरल में कन्वर्ट कर दिया जाता था। अब सरकार चाहती है कि मेडिकल रिजर्व सीट्स केवल रिजर्वेशन वाले स्टूडेंट्स को फायदा दें। सीबीएसई ने नीट में परसेंटाइल लागू कर क्वालिफाई क्राइटेरिया बदला। रिजर्व कैटेगरी में 40% लाना मुश्किल हो रहा है, यही वजह है कि पासिंग परसेंटेज कम कर दिए गए हैं।

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