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झाड़फूंक के चक्कर में चली गई एक और जान

एक 28 वर्षीय महिला की सांप काटने से मौत हो गई। महिला बालाझार ग्राम की थी। गुरूवार की देर रात उसके पति चेतन कोरवा ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 03:05 AM IST

झाड़फूंक के चक्कर में चली गई एक और जान
एक 28 वर्षीय महिला की सांप काटने से मौत हो गई। महिला बालाझार ग्राम की थी। गुरूवार की देर रात उसके पति चेतन कोरवा ने गंभीर अवस्था में महिला को लाकर सिविल हास्पिटल में भर्ती कराया था। पर सांप के काटने के कई घंटे बीत जाने के कारण महिला के पूरे शरीर मे सांप का पूरा जहर फैल चुका था। प्राथमिक इलाज के दौरान महिला की कुछ देर बाद मौत हो गई।

गुरूवार की देर रात लगभग 11 बजे बालाझार निवासी चेतन कोरवा की प|ी राजकुमारी कोरवा को जमीन में सोने के दौरान एक जहरीले सांप ने काट लिया। सांप के काटने के बाद जब महिला ने शोर मचाया तो घर के अन्य परिजन उस स्थान में इकट्ठा हो गए। इनके द्वारा तत्काल गांव के बैगा-गुनियों को बुलाकर सर्पदंश की पीड़ित महिला का झाडफ़ूंक शुरू कर दिया। यह विधि लगभग तीन बजे तक चलती रही। पर महिला को किसी प्रकार की राहत ना मिलने से अंततः पीड़ित महिला के पति ने 108 संजीवनी को फोनकर अपने यहां बुलाया। इस दौरान एक घंटा और बीत गया संजीवनी 108 के पहुंचते तक भोर के 4 बज चुके थे। सुबह 5 बजे के लगभग पीड़ित महिला को उसके पति द्वारा यहां के सिविल हास्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां देरी ना करते हुए यहां के डाक्टरों ने तत्काल महिला का उपचार करना शुरू कर दिया। पर सांप के काटने का जहर महिला के शरीर में अधिक फैल जाने के कारण उसे लगाया गया एंटी स्नैक वेलम भी अपना असर नहीं दिखा सका। जिसके कारण सुबह होते तक महिला ने अपना दम तोड़ दिया। इस बात की सूचना यहां के थाने में दिये जाने के बाद मर्ग कायम कर लिया गया है।

कहां गई सरकारी मच्छरदानी व खाट - ग्राम बालाझार की सर्पदंश से पीड़ित महिला राजकुमारी कोरवा एक बिरहोर जाति की महिला थी। इसे जमीन में सोने के दौरान सांप ने डंस लिया। जबकि कोरवा जनजाति के लोग राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रो की गिनती में आते हैं।

इन तक आज भी सरकारी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई है। जबकि शासन की ओर से सर्पदंश की घटना को बचाने के लिए प्रत्येक वर्ष मच्छरदानी व खटिया का वितरण किया जाता है।

मृत महिला का पंचनामा तैयार करती पुलिस

कब आएगी जागरूकता

शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष बारिश आने से पूर्व ग्रामीण क्षेत्र के लोगो को जमीन में ना सोने की हिदायत दी जाती है। इन्हे खटिया में सोकर सरकार द्वारा प्रदत मच्छरदानी का उपयोग करने की भी बातें समझाई जाती है। पर ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता का अभाव रहने के कारण वहां के लोग आज भी सोने के लिए जमीन का ही इस्तेमाल करते है। जिसके कारण बारिश के दिनो जहरीले जीव जंतुओं के काटने के बाद ग्रामीणों को असमय ही मौत के मुंह मे समा जाते हैं।

इधर..सर्पदंश की शिकार महिला अस्पताल में बची

सर्पदंश के बाद समय गंवाए बिना पति बाइक पर प|ी को ले आया अस्पताल।

भास्कर न्यूज | कुनकुरी

पति की जागरूकता एवं तत्परता से सर्पदंश की शिकार हुई महिला का समय रहते अस्पताल में इलाज प्रारंभ होने से उसकी जान बच गई। मामला कुनकुरी विकासखंड के दाराखरिका ग्राम का है। महिला को इलाज के लिए कुनकुरी के अस्पताल में लाया गया था। अचानक सर्प दंश की शिकार महिला ने झटककर सांप को दूर भगा दिया था इस कारण सांप की प्रजाति की पहचान नहीं हो पाई।

सर्पदंश के शिकार मरीजों के अस्पताल पहुंचने की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोगो में आई जागरूकता के कारण लोग अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता का लाभ उठाकर अपनी जान बचा पा रहे है। मामले में भी सर्पदंश की शिकार महिला दाराखरिका गांव में सड़क के किनारे मैदान में बैल चरा रही थी। इस 35 वर्षीय महिला बिरसमुनी को अचानक सांप ने काट लिया। सांप डसने की खबर पास के ही स्कूल में खाना बना रहे महिला के पति दलभंजन रौतिया को मिली उसने तत्काल अपनी प|ी को बाइक पर बैठाया और सीधे 20 किलोमीटर दूर कुनकुरी के अस्पताल में ले आया। यहां डॉक्टरों ने तत्काल महिला को आईसीयू मे भर्ती कर उपचार प्रारंभ कर दिया। महिला के पति दिलधरन ने बताया कि संजीवनी 108 के आने में देर होती तथा झाड़फूंक कराने से भी मरीज की जान को खतरा रहता इसलिए बाइक में बैठाकर प|ी को सीधे अस्पताल ले आया।

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