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गंगा नर्सिंग होम में खून रखने वाले 8 पाउच मिले, बगैर जांच के चढ़ाते हैं मरीजों को खून

खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग ने सोमवार की दोपहर शहर के ढिमरापुर रोड पर स्थित गंगा नर्सिंग होम से रक्त पैक करने वाली 8...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 03:10 AM IST

गंगा नर्सिंग होम में खून रखने वाले 8 पाउच मिले, बगैर जांच के चढ़ाते हैं मरीजों को खून
खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग ने सोमवार की दोपहर शहर के ढिमरापुर रोड पर स्थित गंगा नर्सिंग होम से रक्त पैक करने वाली 8 थैलियां जब्त कीं। सभी ब्लड बैग खाली थे, बैग की सप्लाई मित्रा नामक फार्मा कंपनी द्वारा की गई है। नर्सिंग होम संचालक लंबे समय से बिना लाइसेंस व जरूरी उपकरणों से जांच किए बिना खून मरीजों को चढ़ा रहे हैं। खाली बैग मिलने के बाद संचालक द्वारा बगैर लाइसेंस खून लेने और सप्लाई किए जाने की आशंका भी है।

ब्लड बैग मिलने के बाद अफसरों द्वारा नर्सिंग होम के संचालक डा. वीपी पटेल से पूछताछ करने पर आपातकालीन स्थिति में खून चढ़ाने की बात स्वीकार की है। वे बैग के बिल भी नहीं दिखा सके और न ही खून लेने वाले मरीजों की कोई जानकारी दी गई। शेष | पेज 14





नर्सिंग होम में मिले सभी ब्लड बैग सीलकर नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ अवैध तरीके से खून निकालने और चढ़ाने का मामला बना रही है। साथ ही बैग सप्लाई करने व इससे जुड़े लोगों की जानकारी भी जुटा रही है। लंबे समय से शहर के अलग-अलग निजी संस्थानों में खून खरीदी-ब्रिक्री का खेल चल रहा है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने उपचार के दौरान अवैध ब्लड अस्पताल में पकड़े हैं। इसकी शिकायत रायपुर फूड एंड ड्रग कंट्रोलर से भी की गई थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने कार्रवाई शुरू कराई है।



ब्लड बैग में मिले थे नकली स्टीकर

मेडिकल कॉलेज के डॉ. मनोज मिंज बताते हैं कि कुछ महीने पहले खून चढ़ाने से पहले डॉक्टरों ने आंशका पर मरीज द्वारा लाए गए ब्लड, बैंक में जांच के लिए भेजा था। जांच में मिला की बैग के ऊपर लगे स्टीकर मेडिकल कॉलेज की पर्ची से कॉपी की गई है। इसी तरह निजी ब्लड बैंक की सूचना पर दूसरा मामला पकड़ा गया था। इसकी एफआईआर भी कोतवाली में की गई है।

गाइड लाइन में 22 बिंदुओं की जांच जरूरी

डॉक्टर बताते हैं कि मरीज को चढ़ाने के लिए खून देने से पहले गाइड लाइन के मुताबिक 22 बिंदुओं की जांच जरूरी है। सभी जांच के बाद बाकायदा रजिस्‍टर मेंटेन किया जाता है। इसके बाद ही खून मरीजों को जारी किया जाता है। इसकी कोडिंग भी गोपनीय तरीके से की जाती है, ताकि जांच में फर्जीवाड़े को पकड़ा जा सके।

नर्सिंग होम में रक्त की जांच करने वाले उपकरण ही नहीं हैं

कोई दस्तावेज नहीं मिला

जांच में नर्सिंग होम से 8 ब्लड बैग मिले हैं, इस तरह के बैग सिर्फ ब्लड बैंक में रखे जाते हैं। इससे संबंधित दस्तावेज व मरीजों की कोई जानकारी हमें नहीं मिली है। संचालक इमरजेंसी में खून चढ़ाने की बात कह रहा है, बिना लाइसेंस खून निकालने व चढ़ाने अपराध है। अमित राठौर, ड्रग इंस्पेक्टर रायगढ़

गंभीर मामला:रायपुर में शिकायत

इस तरह के कुछ प्रकरण मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पकड़े थे। 15 दिन पहले एक और इसी तरह मामला सामने आया था। पूर्व में भी बिना जांच खून चढ़ाने से एचआईवी संक्रमित हो चुके हैं। यह गंभीर मामला है इसलिए मैने रायपुर में शिकायत की थी। डॉ. एसएल आदिले, डीन मेडिकल कॉलेज रायगढ़

मेकाहारा के आसपास दलाल सक्रिय

मेकाहारा के आसपास इस काम से जुड़े दलाल सक्रिय हैं। रोजाना ये ओवरब्रिज, ब्लड बैंक, मेन गेट, और रेड क्रास के आसपास खड़े होते हैं। अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों में तीन से चार दलालों को पुलिस को सौंप चुके हैं, लेकिन इन को पकड़ने की बजाए सामान्य कार्रवाई कर छाेड़ दिया।

दो से तीन हजार में बेचते हैं खून

दलाल दो से तीन हजार रुपए में जरूरतमंद मरीजों को खून उपलब्ध कराते हैं। ऐसे दलाल पूरे दिन खून की तलाश में भटक रहे लोगों को ढूंढते हैं, और फिर उन्हें डोनर के बिना ब्लड देने की बात कहकर अमानक खून बेचते हैं।

चल रहा खरीदी-ब्रिक्री का खेल

इसके अलावा और भी कई संस्थान बिना लाइसेंस व जांच के खून निकाल कर शहर के अस्पतालों में सप्लाई कर रहे हैं। यह पूरा काम दलालों के माध्यम से कराया जा रहा है। ताकि पकड़े जाने पर इस काम से जुड़े लोगों तक कोई आंच न आए।

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