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132 ग्रापं के 10 हजार हेक्टेयर रकबे का दोहरा बीमा, क्लेम देने से कंपनी ने किया इनकार

जिले में खरीफ में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे का फसल बीमा दो बार हो गया है। जमीन एवं खरीफ की बोनी से अधिक रकबे के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:15 AM IST

जिले में खरीफ में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे का फसल बीमा दो बार हो गया है। जमीन एवं खरीफ की बोनी से अधिक रकबे के लिए किसानों से बीमा का प्रीमियम ले लेने के बाद अब क्लेम देने में कंपनी ने आपत्ति जता दी है और किसानों को फसल बीमा का क्लेम देने से पहले प्रशासन से इसकी रिपोर्ट मांगी है।

जिले के 132 ग्राम पंचायतों में ऐसी शिकायत मिल रही है। किसानों को दोहरा क्लेम ना मिल जाए इसके लिए बीमा कंपनी इफको टोकियो ने अपनी ओर से आपत्ति लगाई है। कंपनी ने शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया है। खरीफ 2017 में फसल बीमा का टार्गेट पूरा करने के लिए जिले में धान के रकबे एवं बोनी से अधिक का बीमा कर दिया गया है। रायगढ़ में कृषि विभाग के रिकार्ड के अनुसार खरीफ में करीब 1 लाख 11 हजार हेक्टेयर रकबे का फसल बीमा किया गया था लेकिन धान के इस रकबे में करीब 10 हजार हेक्टेयर रकबे का दोहरा फसल बीमा हो गया था।

जुलाई महीने में इसके लिए किसानों के बैंक खातों से बाकायदा प्रीमियम की राशि भी काट ली गई और जब क्लेम देने के लिए पंचायत वार किसानों की गणना की गई तो पता चला कि कई गांवों में एक किसान का एक से अधिक बार नाम आ रहा है। इसके बाद कंपनी के अधिकारी भी अलर्ट हो गए और इस दोहराव का कारण पता कर रहे हैं।

सिंचित व असिंचित दोनों में चूक

फसल बीमा कंपनी के अनुसार रायगढ़ जिले में धान के लिए जो बीमा किया गया। उसमें सिंचिंत धान के लिए करीब 6 हजार 190 हेक्टेयर रकबे का दोहरा बीमा हो गया है। इसी तरह असिंचित रकबे के लिए भी 3 हजार 873 हेक्टेयर रकबे का दो बार बीमा हो गया है। अब 10 हजार हेक्टेयर रकबे के लिए दो बार क्लेम की राशि देना ना पड़े। इसके लिए फिर से रिपोर्ट मांगी जा रही है।

फसल बीमा के लिए क्लेम देने से पहले बीमा कंपनी ने अपनी ओर से कुछ आपत्ति दर्ज की है। रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं लेकिन इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता। '' एमआर भगत, उपसंचालक कृषि

आखिर कैसे हुआ दोहरा बीमा

खरीफ में रकबे से अधिक का बीमा हो जाने एवं दोहराव के पीछे मुख्य वजह केसीसी लोन को भी माना जा रहा है। हालांकि अधिकारी अभी इसके लिए अधिकृत रूप से दावा नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा फसल बीमा के लिए जिले को मिले टार्गेट को पूरा करने के चक्कर में भी विभाग एवं बैंकों से ऐसी गलती होने की आशंका जताई जा रही है।

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