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अब नगर निगम की सामान्य सभा भी दे सकेंगी जाति और निवास प्रमाण-पत्र

नगरीय क्षेत्रों में निवास कर रहे आवेदकों के पास अगर जाति और मूलनिवास के संबंध में दस्तावेज या सबूत उपलब्ध नहीं है,...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:15 AM IST
अब नगर निगम की सामान्य सभा भी दे सकेंगी जाति और निवास प्रमाण-पत्र
नगरीय क्षेत्रों में निवास कर रहे आवेदकों के पास अगर जाति और मूलनिवास के संबंध में दस्तावेज या सबूत उपलब्ध नहीं है, तो नगर निगम की सामान्य सभा उस व्यक्ति अथवा परिवार की पहचान कर प्रमाणित कर सकेगी।

निर्धारित प्रारूप में मिले आवेदनों के सभी तथ्यों विचार करने के बाद सामान्य सभा एक अन्य प्रारूप में उसकी जाति और मूल निवास तय करेगी। गलत जानकारी देकर सामान्य सभा आवेदक के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाएगा और दांडिक कार्रवाई की जाएगी। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों और निगम आयुक्तों को एक परिपत्र जारी किया है। परिपत्र के साथ आवेदकों और सामान्य सभा के लिए निर्धारित किए गए दो अलग अलग प्रारूप भी संलग्न किए गए हैं। यह कार्य एक वर्ष तक आयोजित होने वाली सामान्य सभा की बैठकों में पूरा किया जाएगा। और यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि इस आशय से ऐसा कोई व्यक्ति अथवा परिवार शेष नहीं रह गया है।

इन पर नहीं होगा विचार

राज्य शासन द्वारा ऐसे व्यक्तियों जिनकी जाति तथा जाति प्रमाण पत्र के संबंध में विनिर्दिष्ट तारीखों के पूर्व मूल निवास स्थान के संबंध में कोई लोक अथवा निजी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, उनकी पहचान नगर निगमों की सामान्य सभा की बैठकों के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। विनिर्दिष्ट तारीख अर्थात् कट ऑफ डेट से अभिप्राय अनुसूचित जाति के संबंध में 10 अगस्त 1950, अनुसूचित जनजाति के संबंध में 6 सितंबर 1950 और अन्य पिछड़ा वर्ग के संबंध में 26 दिसंबर 1984 है। जिनके पास विनिर्दिष्ट तारीखों के पहले के दस्तावेज हैं, उन पर सामान्य सभा विचार नहीं करेगा।

फर्जी पाए जाने पर होगी सजा

सामान्य सभा में आवेदक के समाज और परिवार के जन्म- मृत्यु संबंधी संस्कारों सहित उसकी जाति की बोली, देवी-देवता, परंपरागत व्यवसाय, गांव या आस-पास में रहने वाले किसी समुदाय के लोगों से रोटी-बेटी के संबंध को ध्यान में रखकर उद्घोषणा की जाएगी। आवेदक अथवा अन्य व्यक्तियों के द्वारा जानबूझकर दस्तावेजी साक्ष्यों को छुपाकर सामान्य सभा के माध्यम से गलत उद्घोषणा करवाई गई है ऐसे प्रकरण जिला सत्यापन समिति को तथा उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति को भेजा जाएगा। छानबीन समिति के निर्णय के अनुसार अपराध पंजीबद्ध कर ऐसे लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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