Hindi News »Chhatisgarh »Raigarh» ऑफिस में लगी आग तो पीछे का दरवाजा तोड़कर माह भर के मासूमों को लेकर भागे बड़े बच्चे

ऑफिस में लगी आग तो पीछे का दरवाजा तोड़कर माह भर के मासूमों को लेकर भागे बड़े बच्चे

रविवार की देर रात बारिश के बीच 0 से 6 साल के अनाथ बच्चों के रहने की जगह मातृनिलियम में शाट सर्किट से अचानक आग लग गई। आग...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:20 AM IST

ऑफिस में लगी आग तो पीछे का दरवाजा तोड़कर माह भर के मासूमों को लेकर भागे बड़े बच्चे
रविवार की देर रात बारिश के बीच 0 से 6 साल के अनाथ बच्चों के रहने की जगह मातृनिलियम में शाट सर्किट से अचानक आग लग गई। आग संस्था के ऑफिस से शुरू होकर बढ़नी शुरू हुई थी। इससे पहले कि वह बढ़कर चारों तरफ फैलती बच्चों को रेस्क्यू कर वहां से निकाल लिया गया। किसी भी बच्चें को कोई चोंट नहीं आई। पूरे घटना में खास बात यह रही कि छोटे बच्चों को उसी बिल्डिंग में रहने वाले आशियाना के बड़े बच्चों ने उठाकर बाहर निकाला।

मातृनिलियम में 0 से 6 साल तक के बच्चे है। अभी फिलहाल 17 बच्चे संस्था में है। 17 बच्चों में 10 दिन, एक माह, 3 माह और 1-2 साल के बच्चे ज्यादा है। इनकी देखभाल के लिए रात में तीन महिलाएं रुकती है। रविवार की रात लगभग 10 बजे हल्की बारिश के बीच लाइट गुल हुई। लाइट गुल होने के दौरान ही मातृ निलियम के ऑफिस के बाहर लगे एसी में शॉट सर्किट हुआ और ऑफिस में रखे कंप्यूटर और दस्तावेज धू-धू कर जलने लगे। आफिस के बाजू में ही बच्चों का कमरा सटा हुआ है, जहां केयर टेकर ने छोटे बच्चों को सुलाया था। अचानक ऑफिस से धुंआ निकलते देख केयर टेकर सरस्वती, सुनीता और अनीता जागी। केयर टेकर ने जागकर बच्चों को उठाया और सीधे आग लगे कार्यालय के दरवाजे को बंदकर बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। महिलाओं ने आशियाना के केयर टेकर जागेश्वर को बुलाया और पीछे के दरवाजों को तोड़कर बाहर निकले। आशियाना के घुमंतू बच्चे भी नीचे आ गए और सभी पालने में पड़े छोटे बच्चों को पकड़कर बाहर भागने लगे। रात में ही संस्था के सभी बच्चों को 100 मीटर दूर स्थित नीलांचल अनाथ भवन में पहुंचाया। घटना की सूचना के बाद मौके पर संस्था के सभी सदस्य पहुंच गए। रेती और अग्निशामक यंत्र से देर रात आग को बुझा गया। आगजनी में लगभग 2 लाख के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

मातृनिलियम के तीन दरवाजे तोड़े तब जाकर बची 17 मासूमों की जिंदगी

डर से बच्चे ने खुद को किया बाथरूम में बंद

रात में आफिस में फैली आग और मची भगदड़ की डर से एक दो साल के बच्चे ने अपने आप को डर से बाथरूम में बंद कर लिया था। बच्चा आवाज देने पर भी दरवाजा नहीं खोल रहा था। बड़ी मुश्किल से केयर टेकर ने दरवाजे को तोड़कर उसे बाहर निकाला। खुद को बाथरूम में बंद कर लेने पर केयर टेकर्स की हालत खराब हो गई थी।

सप्ताह भर से भाग रहे थे बच्चे

पहाड़ मंदिर के आसपास ही सिद्धार्थ मोहंती अनाथ बच्चों के लिए आठ संस्था चलाते है। इनमें मातृ निलियम भी शामिल है। लगभग सप्ताह भर में दो बार घुमंतू बच्चों के भागने की खबर आ रही थी, लेकिन घटना के दौरान घुमंतू बच्चों ने जिस प्रकार साहस दिखाकर छोटे बच्चों को निकाला। संस्था के सभी लोग घुमंतू बच्चों की तारीफ कर रहे है। ऐसी स्थिति में बच्चे चाहते तो दरवाजा टूटने के बाद भाग सकते थे, लेकिन उन्होंने छोटे बच्चों को बचाया।

भास्कर न्यूज | रायगढ़

रविवार की देर रात बारिश के बीच 0 से 6 साल के अनाथ बच्चों के रहने की जगह मातृनिलियम में शाट सर्किट से अचानक आग लग गई। आग संस्था के ऑफिस से शुरू होकर बढ़नी शुरू हुई थी। इससे पहले कि वह बढ़कर चारों तरफ फैलती बच्चों को रेस्क्यू कर वहां से निकाल लिया गया। किसी भी बच्चें को कोई चोंट नहीं आई। पूरे घटना में खास बात यह रही कि छोटे बच्चों को उसी बिल्डिंग में रहने वाले आशियाना के बड़े बच्चों ने उठाकर बाहर निकाला।

मातृनिलियम में 0 से 6 साल तक के बच्चे है। अभी फिलहाल 17 बच्चे संस्था में है। 17 बच्चों में 10 दिन, एक माह, 3 माह और 1-2 साल के बच्चे ज्यादा है। इनकी देखभाल के लिए रात में तीन महिलाएं रुकती है। रविवार की रात लगभग 10 बजे हल्की बारिश के बीच लाइट गुल हुई। लाइट गुल होने के दौरान ही मातृ निलियम के ऑफिस के बाहर लगे एसी में शॉट सर्किट हुआ और ऑफिस में रखे कंप्यूटर और दस्तावेज धू-धू कर जलने लगे। आफिस के बाजू में ही बच्चों का कमरा सटा हुआ है, जहां केयर टेकर ने छोटे बच्चों को सुलाया था। अचानक ऑफिस से धुंआ निकलते देख केयर टेकर सरस्वती, सुनीता और अनीता जागी। केयर टेकर ने जागकर बच्चों को उठाया और सीधे आग लगे कार्यालय के दरवाजे को बंदकर बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। महिलाओं ने आशियाना के केयर टेकर जागेश्वर को बुलाया और पीछे के दरवाजों को तोड़कर बाहर निकले। आशियाना के घुमंतू बच्चे भी नीचे आ गए और सभी पालने में पड़े छोटे बच्चों को पकड़कर बाहर भागने लगे। रात में ही संस्था के सभी बच्चों को 100 मीटर दूर स्थित नीलांचल अनाथ भवन में पहुंचाया। घटना की सूचना के बाद मौके पर संस्था के सभी सदस्य पहुंच गए। रेती और अग्निशामक यंत्र से देर रात आग को बुझा गया। आगजनी में लगभग 2 लाख के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

मातृनिलियम के आफिस में आग लगने के बाद दृश्य।

होमगार्ड के फायर ब्रिगेड ने कहा एमएसपी से ले आओ पास है

घटना के बाद केयर टेकर ने होमगार्ड के फायर ब्रिगेड को आग पर नियंत्रण के लिए बुलाया था, लेकिन उनके द्वारा एमएसपी से फायर ब्रिगेड बुला लेने की बात कही गई। इसके बाद जब स्थानीय पार्षद ने फोन किया तो होमगार्ड का फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचा। इस संवेदनशील घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन फायर ब्रिगेड अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा था।

अकाउंट के सारे दस्तावेज जलकर राख

आगजनी की घटना में अकाउंट से संबंधित सारे दस्तावेज जलकर राख हो गए है। हालांकि संस्था के पास अपने सारे दस्तावेज ऑनलाइन मेंटेन है। इसलिए उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

शॉट सर्किट के मामले लगातार

साल भर से शहर में दर्जनभर मामले शार्ट सर्किट के ऐसे हो चुके है, जिसमें किसी व्यापारी में लाखों का सामान जला तो कभी किसी का घर और कभी पुलिस का कार्यालय। इन सभी मामलों में घर के अंदर की वायरिंग के खराब होने के कारण शॉट सर्किट की बात सामने आई थी। अब शॉट सर्किट छोटे बच्चों के संस्था में भी आग लग गई। इस मसले पर भास्कर ने बिजली विभाग के अधिकारी गुंजन शर्मा से बात की और इन सब समस्याओं से बचने का उपाय पूछा।

बताए गए उपाय

पुरानी वायरिंग को समय-समय पर किसी इलेक्ट्रिशियन से दिखवाएं

घर की विद्युत कैपेसिटी के अनुसार ही बिजली उपकरण लगाएं

वायरिंग के दौरान अच्छी क्वालिटी के वायर लगवाएं

अच्छी क्वालिटी का एमसीबी भी काफी हद तक शॉट सर्किट को रोकता है

आकाशीय बिजली से बचने तड़ित चालक भी बिल्डिंग में जरुरी

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Raigarh

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×