Hindi News »Chhatisgarh »Raigarh» मेकाहारा में रोजाना आ रहे 8-10 केस मरीजों में छोटे बच्चों की संख्या ज्यादा

मेकाहारा में रोजाना आ रहे 8-10 केस मरीजों में छोटे बच्चों की संख्या ज्यादा

मेकाहारा में टीबी से पीड़ित मरीज लगातार आ रहे हैं। रोज 8-10 केस पहुंच रहे हैं जिनमें 4-5 छोटे बच्चे होते हैं। पिछले...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:40 AM IST

मेकाहारा में रोजाना आ रहे 8-10 केस मरीजों में छोटे बच्चों की संख्या ज्यादा
मेकाहारा में टीबी से पीड़ित मरीज लगातार आ रहे हैं। रोज 8-10 केस पहुंच रहे हैं जिनमें 4-5 छोटे बच्चे होते हैं। पिछले अप्रैल और मई के 15 दिन में ही 18 बच्चों में बीमारी की पुष्टि हुई है। कुछ बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं तो कुछ को घर में दवा दी जा रही है।

डॉक्टरों के अनुसार जिले में हर साल 2200 से अधिक मरीज टीबी के नए रजिस्टर्ड होते हैं। वहीं पांच महीनों में अब तक 1500 नए मरीज आए हैं। डॉक्टरों ने टीबी के 20 ऐसे मरीज भी चिन्हित कर रहे हैं जिन पर डॉट्स थेरेपी का भी असर नहीं हो रहा है। इन मरीजों को मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी बताई जा रही है।

शहरी क्षेत्र से ज्यादा बच्चे

मेकाहारा में सबसे ज्यादा शहर के छोटे बच्चे पहुंच रहे हैं। अप्रैल में कयाघाट, धांगरडीपा, रामभांठा, प्रेमनगर, कबीर चौक, सोनूमुड़ा, नवापारा, रियांपारा इत्यादि क्षेत्र के बच्चे पहुंचे। मई में कोतरारोड, मिट्‌ठुमुड़ा, जेलपारा, रामगुड़ीपारा क्षेत्र से आए। इसका मतलब आधे से ज्यादा बच्चे केवल शहरी क्षेत्र में रहने वाले हैं।

मेकाहारा में इलाज के लिए वार्ड ेमें भर्ती बच्चे।

बच्चों में टीबी के तीन लक्षण

खांसी आना: बच्चे में दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से लगातार खांसी आना, खांसी का निरंतर बने रहना। शुरुआत में सूखी खांसी आना बाद में खांसी के साथ कफ में खून भी निकलने लगता है, जो कि बच्चे में तपेदिक का प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा इस रोग में खांसी के दौरान सांस लेते वक्त बच्चे की सांस फूलने लगती है और ऑक्सीजन की कमी से बच्चा बेहोश भी हो सकता है।

बुखार आना: ट्यूबरकुलोसिस के कीटाणु बच्चे के फेफड़े से शरीर के अन्य अंगों में बहुत जल्दी पहुंच जाते हैं। प्रोग्रेसिव प्रायमरी टीबी में बच्चा ज्यादा बीमार रहता है। इसके कारण बच्चे में लो-ग्रेड बुखार निरंतर बना रहता है। रात को सोते वक्त बच्चे को पसीना होने लगता है।

वजन कम होना: बच्चे में टीबी होने पर वजन घटने लगता है। क्षय रोग होने से बच्चे को भूख नहीं लगती है और वह खाने से मना करता है जिसकी वजह से उसका वजन निरंतर कम होने लगता है।

मेकाहारा में टीवी के मरीज रोजाना आ रहे हैं। यहां प्रति दिन 8 से 10 तक आंकड़ा पहुंच रहा है। हम उन्हें अपने टीवी वार्ड में भर्ती कर उपचार करते हैं। कुछ दिनों से छोटे बच्चों की संख्या बढ़ गई है। '' डॉ गणेश पटेल, क्षय रोग विशेषज्ञ

इसलिए बेकाबू हुई बीमारी

जिले में टीबी बेकाबू हो चली है। इसके बढ़ने के पीछे जानकार जो वजह से बता रहे हैं वो ये है कि गरीब आदिवासी और मजदूर वर्ग के लोग खांसी, और कफ जैसी बीमारी को साधारण समझ कर झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार लेने लगते हैं, और वे तब तक उपचार लेते हैं जब तक कि बीमारी बढ़ नहीं जाती। इसके बाद वो टीवी अस्पताल में आते हैं लेकिन तब तक वो बीमारी इतनी बढ़ चुकी होती है कि अब उसे कंट्रोल करना भी मुश्किल हो रहा है।

बच्चों को क्यों होती है बीमारी

टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस, इसे तपेदिक या क्षय रोग भी कहते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह एक संक्रामक बीमारी है। जो बच्‍चों पर सीधे प्रहार करती है। बच्चे हमेशा बड़ों के साथ रहते हैं और टीबी के मरीज के संपर्क में आने से उनमें तपेदिक का संक्रमण फैलता है। यह फेफडे़ से संबंधित बीमारी है। इस बीमारी में बच्चे को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। बच्चों के अंग बहुत ही नाजुक होते हैं इसलिए टीबी का असर उन पर अधिक होता है।

ऐसे कर सकते हैं टीबी से बचाव

जिस घर में छोटा बच्चा हो वहां पर और तंबाकू और धूम्रपान नहीं करना चाहिए। क्योंकि अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान बच्चों में टीबी संभावना 2-3 गुना बढ़ा देती है। घर में या पडो़स में अगर कोई टीबी का मरीज है तो बच्चे को उसके संपर्क में बिलकुल न आने दें। टीबी से ग्रस्त बच्चे में प्राय: कुपोषण और एनीमिया पाया जाता है। बच्चे को पौष्टिक और संतुलित आहार देने से टीबी का इलाज आसान हो जाता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Raigarh

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×