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20 फीट ऊंचे रथ पर सवार हाेकर दर्शन देने के लिए बहन सुभद्रा आैर भाई बलभद्र के साथ निकलेंगे जगन्नाथ प्रभु

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 28 जून को भगवान जगन्नाथ स्वामी महास्नान करने के बाद बीमार हो गए थे। लगातार 15 दिनों तक भगवान को...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 03:25 AM IST
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 28 जून को भगवान जगन्नाथ स्वामी महास्नान करने के बाद बीमार हो गए थे। लगातार 15 दिनों तक भगवान को जड़ी-बूटी व औषधियुक्त काढ़ा पिलाया गया जिससे भगवान अब स्वस्थ हो चुके हैं। शनिवार को उल्लास के साथ रथयात्रा का पर्व मनाया जाएगा।

रथयात्रा की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। रथ का आकर्षक रंग-रोगन किया गया है। त्यागी जी महाराज ने बताया कि भगवान जगन्नाथ स्वामी को 15 दिनों तक लगातार सुबह और शाम दोनों समय काढ़े का भोग लगाकर भक्तों में काढ़े का प्रसाद बांटा गय। शुक्रवार की शाम तक भगवान को काढ़ा पिलाया गया, जिसके बाद वो स्वस्थ हो गए। सुबह नेत्र उत्सव मनाया जाएगाा। भगवान को महास्नान कराया जाएग। भगवान के आंखों में विशेष प्रकार का व्यंजन लगाया जाएगा। मान्यता है इससे उनकी आंखों की ज्योति निखरेगी। भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। बीस फीट के लोहे से बनी रथ में शाम को 4 बजे भगवान जगन्नाथ स्वामी बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र के साथ सुसज्जित रथ में सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हुए अपने मौसी के घर जाएंगे। भगवान के नवजोवन रूप के दर्शन श्रद्धालुओं को मिलेंगे। जगन्नाथ पूरी के तर्ज पर ही भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर में हर साल रथयात्रा का पर्व मनाया जाता है।

भगवान जगन्नाथ के रथ को सजाते कारीगर।

भास्कर न्यूज | शिवरीनारायण

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 28 जून को भगवान जगन्नाथ स्वामी महास्नान करने के बाद बीमार हो गए थे। लगातार 15 दिनों तक भगवान को जड़ी-बूटी व औषधियुक्त काढ़ा पिलाया गया जिससे भगवान अब स्वस्थ हो चुके हैं। शनिवार को उल्लास के साथ रथयात्रा का पर्व मनाया जाएगा।

रथयात्रा की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। रथ का आकर्षक रंग-रोगन किया गया है। त्यागी जी महाराज ने बताया कि भगवान जगन्नाथ स्वामी को 15 दिनों तक लगातार सुबह और शाम दोनों समय काढ़े का भोग लगाकर भक्तों में काढ़े का प्रसाद बांटा गय। शुक्रवार की शाम तक भगवान को काढ़ा पिलाया गया, जिसके बाद वो स्वस्थ हो गए। सुबह नेत्र उत्सव मनाया जाएगाा। भगवान को महास्नान कराया जाएग। भगवान के आंखों में विशेष प्रकार का व्यंजन लगाया जाएगा। मान्यता है इससे उनकी आंखों की ज्योति निखरेगी। भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। बीस फीट के लोहे से बनी रथ में शाम को 4 बजे भगवान जगन्नाथ स्वामी बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र के साथ सुसज्जित रथ में सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हुए अपने मौसी के घर जाएंगे। भगवान के नवजोवन रूप के दर्शन श्रद्धालुओं को मिलेंगे। जगन्नाथ पूरी के तर्ज पर ही भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर में हर साल रथयात्रा का पर्व मनाया जाता है।

मठ मंदिर में भंडारा-प्रसाद आज

रथयात्रा शिवरीनारायण मंदिर परिसर से निकलकर मध्यनगरी चौक मेला ग्राउंड रोड होते हुए मेला ग्राउंड के पीछे स्थित जनकपुर मंदिर स्थित उनके मौसी के घर जाएगी। रथयात्रा पर्व काे लेकर मठ मंदिर में विशेष भोग प्रसाद भंडारे की व्यवस्था की गई है। विजय दशमी को भगवान अपने मौसी के घर से पुनः अपने मूल स्थान को वापस आएंगे।

चांपा नगर में दो स्थानों से निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आज

भास्कर न्यूज | चांपा

शनिवार 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलेगी। रथयात्रा की सारी तैयारी शुक्रवार को पूरी कर ली गई। रथ यात्रा नगर के दो प्रमुख स्थानों से निकलेगी। पूरे नगर घूमने के बाद रथयात्रा प्रभु के मौसी के घर पहुंचेगी जहां भगवान जगन्नाथ 9 दिन रूकने के बाद विजयादशमी के साथ वापस मंदिर लौटेंगे।

रथयात्रा का पर्व नगर में हर साल उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल भी भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा शहर में धूमधाम से निकलेगी। नगर के बड़े मठ मंदिर से निकाली जाने वाली रथयात्रा का इतिहास काफी पुराना है। यहां से लगभग 200 सालों से रथ यात्रा निकाली जा रही है। जगन्नाथ प्रभु का दर्शन पाने के लिए लोगांे को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। सबके द्वार जाकर भगवान दर्शन देते है। रथयात्रा को लेकर छोटे बच्चों में भी काफी उत्साह रहता है। छोटे बच्चे टोली बनाकर साइकिल पर रथ बनाकर भगवान की तस्वीर लगाकर घंटी बजाते घूमते हैं। रथ यात्रा बड़े मठ से निकलकर राजापारा राजमहल बाबा घाट देवांगन मोहल्ला होते हुए जगदीश देवांगन के घर जाएगी, जहां 9 दिन तक आराम करेंगे।

भगवान के लिए पालकी बनात मिस्त्री

होगी मालपुवा की बिक्री

रथ यात्रा का लोगों को इंतजार रहता है इस दिन भगवान के दर्शन तो होते ही है पर सबसे खास प्रसाद मालपुआ का प्रसाद मिलता है। पूरे नगर में जगह जगह मालपुवा की दुकान लगी रहती है। लगभग 4 से 5 सौ किलो मालपुवा की बिक्री हो जाती है।