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दूधाधारी मठ

यह मंदिर राजधानी का ऐतिहासिक दूधाधारी मठ में स्थित है। जानकारों के अनुसार यह करीब 1000 वर्ष पुराना मंदिर है, जिसका निर्माण राजा रघुराव भोसले ने करवाया था। इनका नवीनीकरण समय-समय पर करवाया जाता है। इस मठ का महत्व इस कारण भी है कि यहां पर भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान विश्राम किया था। यहां रामसेतु पाषाण भी रखा गया है।दूधाधारी मठ का अपना प्राचीन इतिहास रहा है। इस मठ में कई देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद है। इनमें बालाजी मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर, रामपंचायतन और वीर हनुमान मंदिर प्रमुख हैं। यहां मौजूद हर मंदिर किसी न किसी शानदार इतिहास और रोचक कहानियां कहानियों का हिस्सा है। ऐसी ही छोटी सी रोचक कहानीदूधाधारी मठ के नाम को लेकर है। इस मठ के संस्थापक बालभद्र दास महंतजी हनुमान जी के बड़े भक्त थे। उन्होंने एक पत्थर के टुकड़े को हनुमान जी मानकर श्रृद्धा भाव से पूजा अर्चना करने लगे। वह अपनी गाय सुरही के दूध से उस पत्थर को नहलाते थे और फिर उसी दूध का सेवन करते थे। इस तरह उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया और जीवन पर्यन्त दूध का सेवन किया। इस तरह बालभद्र महंत दूध आहारी हो गए, इसका मतलब दूध का आहार लेने वाला। बाद में यह यहदूधाधारी मठ नाम से जाना गया। इस छोटी सी घटना ने बालभद्र दास को इतिहास में अमर बना दिया और लोगों के लिए पूज्य भी।

Address: मठपारा , रायपुर

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