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पीलिया का ऐसा कहर...5 हजार परिवारों की यही दास्तान, हर घर में एक न एक बीमार

भास्कर टीम ने इन बस्तियों का जायजा लिया और पाया कि ऐसे दर्जनों परिवार हैं जहां पूरा का पूरा घर पीलिया से पीड़ित हो गया

Bhaskar News | Last Modified - May 02, 2018, 07:40 PM IST

  • पीलिया का ऐसा कहर...5 हजार परिवारों की यही दास्तान, हर घर में एक न एक बीमार
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    एक माह में इसी इलाके के 6 लोगों की मृत्यु, कई अब तक गंभीर बीमार

    रायपुर.राजधानी का मोवा-कांपा और उससे लगे हुए नहरपारा, पंचशील नगर इलाके को पीलिया ने बुरी तरह घेर लिया है। तीन बस्तियों में 5 हजार से ज्यादा परिवार और करीब 35 हजार लोग हैं। हर परिवार में एक से ज्यादा लोग पीलिया से पीड़ित हैं। भास्कर टीम ने इन बस्तियों का जायजा लिया और पाया कि ऐसे दर्जनों परिवार हैं, जहां पूरा का पूरा घर पीलिया से पीड़ित हो गया है। अब तक 6 लोगों की यहां मौत हो चुकी है, कई गंभीर रूप से बीमार हैं।


    भास्कर टीम नहरपारा (रायपुर का एक इलाका) में राजेंद्र कुमार से मिली तो उन्होंने बताया- पीलिया की वजह से बेटी बीएससी का एग्जाम नहीं दे पाई। बेटा ग्लूकोज की बोतल लगी हालत में बीसीए की परीक्षा देने गया। नहरपारा में ऐसा हर परिवार पीलिया की वजह से शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी त्रस्त है। प्रेमलाल यादव (42) की पीलिया से मौत हो गई। यहां की ही रेखा (24) की भी जान पीलिया की वजह से गई है। 8 अप्रैल को उन्हें इलाज के लिए आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 9 अप्रैल को ऑपरेशन हुआ था। 23 अप्रैल को आंबेडकर अस्पताल में मौत हो गई। इसी तरह, मोवा, कांपा, नहरपारा, पंचशील नगर में अब तक पीलिया से छह मौतें हो चुकी हैं। इन मौतों और 200 से ज्यादा लोगों में पीलिया के पॉजीटिव मिलने के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा और अजीब सा डर छा गया है।

    इसलिए खराब हुई स्थिति
    राजधानी का मोवा इलाका डेढ़ दशक पहले ग्राम पंचायत मोवा था। वर्तमान में यह निगम के डॉ. भीमराव आंबेडकर वार्ड के अंतर्गत आता है। ग्राम पंचायत के समय ही यहां पानी के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। यहां रहने वाले श्यामदास ने बताया कि तब इलाके में ज्यादा आबादी नहीं थी। सड़कें व नालियां नहीं थीं। 14 साल पहले यहां सड़कें बनाई गई। उसके साथ नालियां भी बनी। तब, सड़क व नाली बनाने वाले अफसर, इंजीनियरों ने यहां बड़ी खामियां कीं। कच्ची सड़क के जिस साइड में पाइपलाइनें थी, नालियां भी उसी साइड में बना दी गईं। नाली और पाइपलाइन में दूरी भी नहीं रखी गई। कई-कई जगह नाली पाइपलाइन के ऊपर ही बना दी गईं। वर्षों बाद यही पाइपलाइनें लीकेज हुई और नालियों का पानी पाइपलाइन से घरों में पहुंचने लगा। इसकी वजह से पीलिया फैली है।

    लाखों के मकान, पानी शुद्ध नहीं
    मोवा, नहरपारा और आसपास का इलाका विधानसभा रोड से लगा हुआ होने का कारण प्राइम लोकेशन में है। नहरपारा के ज्यादातर मकान पक्के हैं। यहां करीब साढ़े चार हजार मतदाता है। इस लिहाज से अकेले यहां की आबादी करीब 8 हजार बताई जा रही है। यहां जितने भी मकान हैं वह दो मंजिला, तीन मंजिला है। यहां रहने वाले लोगों जीवनभर की कमाई से या फिर लोन लेकर घर बनाया है। लेकिन शुद्ध पानी नहीं होने के कारण स्थिति नारकीय हो गई है। लोगों का कहना है कि पीलिया फैलने के बाद से वे पानी ऊबालकर पी रहे हैं। निगम व स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई क्लोरीन की गोलियां भी पानी में डालकर पी रहे हैं।

    निगम तो व्यवस्थापन की स्थिति में ही नहीं लगता
    हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि तीन बस्तियों के 34 हजार लोगों को 48 घंटे यानी गुरुवार को शाम 5 बजे से पहले बस्तियों से हटाकर दूसरी जगह ले जाया जाए। लेकिन मंगलवार को आधी रात तक कोई हलचल नजर नहीं आई। भास्कर ने निगम कमिश्नर रजत बंसल से बात की तो उन्होंने कहा- हाईकोर्ट में पर्यावरण संरक्षण मंडल की उस रिपोर्ट को रखा जाएगा, जिसमें पाइपलाइन बदलने के बाद पानी की जांच में ईकोलाई बैक्टीरिया नहीं मिला। कोर्ट से निवेदन किया जाएगा कि वे यहां पानी को सप्लाई को लेकर कोर्ट कमिश्नरी संतुष्ट हो। तब तक पीने का पानी टैंकरों से सप्लाई करेंगे।

    पार्षद के खिलाफ नाराजगी
    पीलिया फैलने के बाद लोगों में मोवा के पार्षद अनवर हुसैन के खिलाफ भी गुस्सा दिखा। पीलिया से प्रभावित परिवारों ने कहा कि चार साल पहले जब चुनाव था तब पार्षद इन गलियों में नजर आए थे। उसके बाद से अब तक कोई नहीं आया। इस बारे में भास्कर ने अनवर हुसैन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए।

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    यहां हर घर में एक से ज्यादा पीलिया के मरीज
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Web Title: 5 Thousand Families Suffering From Jaundice
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