Hindi News »Chhatisgarh »Raipur »News» 25 Tons Of Drug Expire In Godowns

गोदामों में 25 टन दवा एक्सपायर, इससे पहुंचा सकते थे 5 लाख लोगों को राहत

मरीज जन औषधि सेंटर जाता है तो वहां भी दवा नहीं मिलती। परेशान मरीज बाहर अधिक कीमत पर दवा खरीदने के लिए मजबूर है।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 01, 2018, 07:17 AM IST

  • गोदामों में 25 टन दवा एक्सपायर, इससे पहुंचा सकते थे 5 लाख लोगों को राहत
    +1और स्लाइड देखें

    रायपुर.छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) के रायपुर सहित नौ गोदामों में मरीजों को मुफ्त बांटी जाने वाली 25 टन दवा एक्सपायर हो गई। सीजीएमएससी ने दवाएं खरीदी जरूर लेकिन अफसर अस्पतालों में पहुंचा नहीं सके और गोदामों में पड़े पड़े ही दवाएं एक्सपायर यानी उपयोग के लिए नाकाबिल हो गई। इतनी दवाओं से 5 लाख मरीजों को राहत पहुंचायी जा सकती थी। एक तरफ अंबेडकर अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में कई जरूरी दवाएं नहीं है और दूसरी ओर सीजीएमएससी के गोदामों में दवाएं एक्सपायर हो रही हैं।


    औसतन हर साल पांच टन दवा एक्सपायर हो रही है। अब तक जितनी दवाएं एक्सपायरी हुई है, उसकी कीमत लगभग 4 करोड़ बतायी जा रही है। अब इन बेकार हो चुकी दवाओं को डिस्पोज यानी नष्ट करने की तैयारी है। इसके लिए शासन से अनुमति भी मांग ली गई है। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि सीजीएमएससी समय पर दवा खरीदने में नाकाम तो है ही, गोदाम में रखी दवाइयों को सप्लाई करने में भी फेल साबित हो रहा है। है। 2013 में सीजीएमएससी का गठन किया गया था। तब से दवा, मशीन व उपकरण की खरीदी समय पर नहीं हो रही है। इसके बावजूद पांच साल में 25 टन दवा एक्सपायर हो गईं। गौरतलब है कि सीजीएमएससी के माध्यम से खरीदी जाने वाली दवाओं के लिए 27 जिलों के मेडिकल कॉलेजों, कुछ जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नौ बड़े गोदाम बनाए गए हैं। अस्पतालों में इन्हीं गोदामों से दवा की सप्लाई की जाती है। कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का दावा है कि अस्पतालों की मांग पर ही दवा खरीदी जाती है। ऐसे में एक्सपायर होने के लिए काफी हद तक अस्पताल प्रबंधन भी जिम्मेदार हैं, जो दवा मंगाने के बावजूद मरीजों के लिए नहीं लिखते। दवा का उपयोग नहीं होेने के कारण ये गोदाम में पड़े-पड़े एक्सपायर हो जाती है।

    संविदा अफसर और कर्मचारी चला रहे दवा खरीदी का विभाग

    सीजीएमएससी संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। एमडी बी. रामाराव आईएफएस अधिकारी है। वे प्रतिनियुक्ति पर आए हैं। जीएम टेक्नीकल रहे वीरेंद्र जैन हाल ही में रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े गए। उन्हें एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा। इसके पहले प्रतिनियुक्ति पर जीएम रहे राजकुमार अग्रवाल व संविदा में रहे स्वागत साहू की कार्यप्रणाली पर भी हमेशा सवाल उठते रहे हैं। दोनों को शिकायतों के आधार पर हटाया गया था। कॉर्पोरेशन के बाकी सभी अधिकारी व कर्मचारी संविदा पर कार्यरत हैं। यही नहीं यहां चेक से विड्राल संविदा अधिकारी ही कर रहे हैं। ये शासकीय नियमों के नियम विरुद्ध है। कॉर्पोरेशन के पहले एमडी प्रताप सिंह आईएफएस रहे हैं। उनके बाद कुछ दिनों के लिए आईएएस अविनाश चंपावत को एमडी बनाया गया था। इसके बाद फिर वन सेवा के अफसर को पदस्थ किया गया है।

    सरकारी अस्पतालों में ये जरूरी दवाएं नहीं
    - मेटफार्मिन डायबिटीज
    - रेनीटिडीन गैस से राहत
    - डायक्लोफिन दर्द निवारक
    -मल्टी विटामिन जरूरी खनिज
    आई ड्राप नहीं
    - मॉक्सीफ्लोक्सिन
    - ट्राप्केमाइड
    - कार्बोमेक्सिल
    सीजीएमएससी के एमडी बी रामाराव ने बताया कि 25 टन एक्सपायर दवाइयों को नष्ट करने के लिए बोर्ड की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। कई बार अस्पताल वाले मांग के बावजूद दवा नहीं ले जाते, इसलिए दवा एक्सपायर हो जाती है। हमारा प्रयास है कि कम से कम दवा एक्सपायर हो। समय-समय पर पत्र लिखकर दवा ले जाने के लिए कहते हैं।
    दुर्ग के सीएमओ डॉक्टर सुभाष पांडेय ने बताया कि जो दवा सीजीएमएससी से सप्लाई नहीं हो पा रही है, उसे लोकल पर्चेस कर रहे हैं। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए ऐसा कर रहे हैं।
    बोर्ड से अनुमति मिलने पर करेंगे नष्ट
    एक्सपायर दवाओं को नष्ट करने के लिए शासन स्तर पर एक बोर्ड बना हुआ है। बोर्ड की बैठक हो चुकी है। इसमें इन दवाओं को नष्ट करने के लिए अभी अनुमति नहीं मिली है। अनुमति मिलते ही दवाओं काे नष्ट कर दिया जाएगा। जो दवा एक्सपायर हो गए हैं, उसे पैक कर गोदामों में अलग रखा गया है।
    यहां दवाएं नहीं, इलाज हो रहा प्रभावित
    राजनांदगांव के सोमनी, देवरी बंगला के अलावा डौंडीलोहारा, बालोद, गुंडरदेही, सुपेला भिलाई के अस्पतालाें सर्दी, खांसी व बुखार जैसी सामान्य बीमारियों की दवा भी मुश्किल से मरीजों को मिल रही है। मरीज जन औषधि सेंटर जाता है तो वहां भी दवा नहीं मिलती। परेशान मरीज बाहर अधिक कीमत पर दवा खरीदने के लिए मजबूर है। सोमनी में एंटी एलर्जिक टेबलेट सिट्रीजन, पैरासिटामॉल नहीं है। यहां जन औषधि सेंटर भी नहीं है।
    देवरी बंगाल के प्रभारी सीएचसी डॉक्टर सतीश मेश्राम ने बताया कि सीजीएमएससी से समय पर दवा नहीं मिलती। ऐसे में हम डौंडीलोहारा स्थित जन औषधि स्टोर से दवा खरीद लेते हैं। कई बार वहां भी दवा नहीं मिलती।
  • गोदामों में 25 टन दवा एक्सपायर, इससे पहुंचा सकते थे 5 लाख लोगों को राहत
    +1और स्लाइड देखें
Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
Get the latest IPL 2018 News, check IPL 2018 Schedule, IPL Live Score & IPL Points Table. Like us on Facebook or follow us on Twitter for more IPL updates.
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Raipur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: 25 Tons Of Drug Expire In Godowns
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0
    ×