--Advertisement--

कहीं पानी नहीं मिला तो बाइसन ने कीचड़ में ही आधा मुंह घुसा दिया, अचानकमार सेंचुरी का हाल

वन विभाग का सोलर पंप से जंगल के तालाबों को भरने का फार्मूला फेल होने से बूंद-बूंद पानी के लिए तड़पने लगे बेजुबान।

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 07:42 AM IST
बाइसन की यह तस्वीर दैनिक भास्क बाइसन की यह तस्वीर दैनिक भास्क

रायपुर(छत्तीसगढ़). ये तस्वीर है अचानकमार टाइगर रिजर्व (बिलासपुर) से विस्थापित हुए वन्यग्राम जल्दा की। जल्दा को विस्थापित इसलिए किया गया कि वन्यप्राणियों को इंसानों से तकलीफ न हो। लेकिन जानवर किन हालात में हैं, ये बताने के लिए यह तस्वीर ही काफी है। यह मादा बाइसन (गौर) मिट्टी में मुंह घुसाकर पानी ढूंढ रही है। दरअसल, पास ही एक कुआं है जिसमें वन विभाग के मैदानी कर्मचारी बर्तन या हाथ-मुंह धोने आते हैं। यही पानी रिसकर पास की जमीन पर बहता है। कीचड़ में तब्दील हो चुके इसी पानी से अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर रही बाइसन की यह तस्वीर दैनिक भास्कर को उपलब्ध करवाई है वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर शिरीष डामरे ने।

फॉर्मूला फेल
वन विभाग का सोलर पंप से जंगल के तालाबों और डबरियों में पानी भरने का फार्मूला फेल हो चुका है। कहीं सोलर पंप ही काम नहीं कर रहे हैं तो कहीं पानी ही नहीं आ रहा है। इस वजह से जाे तालाब सूख रहे हैं, उन्हें दोबारा भरने का कोई विकल्प नहीं है।

राज्य में 11 अभयारण्य, नेशनल पार्क व 3 टाइगर रिजर्व क्षेत्र
राज्य में गुरुघासी दास, कांगेर घाटी और इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान हैं। अचानकमार, उदंती-सीतानदी और इंद्रावती टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट है। 11 अभ्यारण हैं। इनमें अचानकमार बार नवापारा, तैमोर पिंगला और भोरमदेव ज्यादा चर्चित हैं। इन सभी में पानी का संकट अभी से गहराता जा रहा है।

सीमेंट की तश्तरियां बनाकर भरा जाएगा पानी
^जंगलों में सूखा पड़ने की आशंका पहले ही जाहिर कर दी गई थी। जंगल के भीतर सीमेंट की छोटी-छोटी तश्तरियां बनाकर उसमें पानी भरा जाएगा। पानी की सप्लाई ट्रैक्टर टैंकर से की जाएगी। इसके लिए हर स्तर पर निर्देश दे दिए गए हैं। अप्रैल से अमल शुरू हो जाएगा।''-एसके सिंह, एपीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ

X
बाइसन की यह तस्वीर दैनिक भास्कबाइसन की यह तस्वीर दैनिक भास्क
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..