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ये 18 KM की रोड नहीं बल्कि एक साहसिक मिशन है, यूं बंदूकों के साए में हुई तैयार

14 किमी में जवानों की जान लेने बिछाई गई 110 बारूदी सुरंगों से 8 धमाकों में 10 शहीद।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 01, 2018, 06:16 AM IST

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    रायपुर. बस्तर यानी छत्तीसगढ़ को दंतेवाड़ा के रास्ते तेलंगाना से जोड़ने वाला स्टेट हाईवे एक जनवरी से शुरू किया जा रहा है। यह सिर्फ 18 किमी की सड़क नहीं बल्कि एक साहसिक मिशन है, जिसके लिए 10 जवानों की शहादत हुई है। अरनपुर-जगरगुंडा की यह सड़क 15 साल पहले यानी 2002 में नक्सलियों ने बंद की थी और कई जगह धमाकों से उड़ा दिया था। आठ साल पहले सरकारी एजेंसियों ने इसे बनाने का फैसला किया और रुक-रुककर काम शुरू किया। पिछले दो साल में इसमें तेजी आई और ढाई हजार जवानों की दिन-रात की पहरेदारी में सड़क बननी शुरू हुई। बारूदी सुरंगें सबसे बड़ी चुनौती थी और यकीन करेंगे कि 110 बारूदी सुरंगें निकाली गईं, तब यह बनी। इतनी सावधानी के बाद भी आठ छोटे-बड़े धमाके हो ही गए, जिनमें जवानों की शहादत हुई।

    कदम-कदम पर नक्सलियों ने बिछाया था बारूद

    -सड़क का काम शुरू हुआ, तभी एहसास था कि कदम-कदम पर नक्सलियों ने बारूद बिछा दिया होगा। सड़क के रास्ते पर सबसे पहले सुरंगों की खोज शुरू की गई। 110 सुरंगों में तीन फॉक्स होल सुरंगें निकलीं। इसका इस्तेमाल इंटरनेशनल टेरेरिस्ट बड़े धमाकों के लिए करते हैं। नक्सलियों ने ये सुरंगे इसीलिए बिछाई थीं कि जैसे ही सड़क शुरू होगी, धमाके भी शुरू हो जाएंगे।

    -​सड़क का काम शुरू हुआ, तभी एहसास था कि कदम-कदम पर नक्सलियों ने बारूद बिछा दिया होगा। सड़क के रास्ते पर सबसे पहले बारूदी सुरंगों की खोज शुरू की गई। 110 सुरंगों में तीन फॉक्स होल सुरंगें निकलीं। इसका इस्तेमाल इंटरनेशनल टेरेरिस्ट बड़े धमाकों के लिए करते हैं। नक्सलियों ने ये सुरंगे इसीलिए बिछाई थीं कि जैसे ही सड़क शुरू होगी, धमाके भी शुरू हो जाएंगे।

    कंस्ट्रक्शन मटेरियल लाने-ले जाने वाले 50 से ज्यादा व्हीकल नक्सलियों ने जला दिए

    - अरनपुर से जगरगुंडा का इलाजा नक्सलियों का गढ़ है। यही वजह थी कि जैसे ही सड़क का काम शुरू हुआ, कड़े पहरे के बावजूद नक्सली हमले शुरू हो गए। कंस्ट्रक्शन मटेरियल लाने ले जाने वाले 50 से ज्यादा व्हीकल को नक्सलियों ने जला दिया। फिर भी फोर्स डटी रही। इस तरह आठ साल में सड़क बन पाई।

    - यह स्टेट हाईवे बस्तर और तेलंगाना की लाइफलाइन साबित होगी। दंतेवाड़ा और सुकमा के लिए जगरगुंडा सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र था। सड़क बंद होने से पूरा कारोबार ठप हो गया था, जिसके फिर शुरू होने के आसार हैं।

    अब बारूद नहीं बिछा पाएंगे नक्सली
    नक्सली नई सड़क के नीचे बारूद न बिछा पाएं, इसके लिए रोड बनाने का काम दो लेयर में हुआ है। यह मोटी परत वाली है, इसे फूलप्रूफ बनाने के लिए हैदराबाद से कई इंजीनियरों ने महीनों काम किया। उनके मार्गदर्शन में ही सड़क की लेयर बनायी गई।


    सड़क से तीन गुना खर्च सुरक्षा पर
    यह सड़क 100 करोड़ रुपए में बनी, लेकिन जानकारों के मुताबिक निर्माण के दौरान सुरक्षा पर इसका तीन गुना खर्च हो गया। इसके बावजूद 10 जवानों की शहादत हो गई। 5 जवान या तो पूरी तरह अपाहिज हो गए या आंखों की रोशनी चली गई।

    रिपोर्ट - अरनपुर से लौटकर आकाश मिश्रा और शैलेंद्र ठाकुर।

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Web Title: Aranpur To Jagargunda Road Completed After Martyr Of Soldiers
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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