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लकड़ी ट्रांसपोर्ट के फर्जी बिल से 30 लाख का फ्रॉड, DFO समेत 5 अफसरों पर केस

अफसरों ने फर्जी बिल के जरिए 30 लाख रुपए से ज्यादा का गबन कर शासन को नुकसान पहुंचाया।

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 05:32 AM IST

पलारी(छत्तीसगढ़). जिला अदालत के आदेश पर वन विभाग के डीएफओ समेत पांच अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। इनमें बलौदाबाजार के पूर्व डीएफओ शिव शंकर बड़गैया, एसडीओ एसबी द्विवेदी, रेंजर कोमल दास घृतेश, डिप्टी रेंजर रतन सिंह डडसेना और फॉरेस्ट गार्ड सतीश सोनकेवरे शामिल हैं। इन आरोपियों पर लकड़ी परिवहन का फर्जी बिल बनाकर करीब 30 लाख रुपए गबन करने का आरोप है।

- जानकारी के मुताबिक रोहांसी वन परिक्षेत्र में खरतोरा मोड़ से सकरी आईटीआई के बीच रायपुर-बालौदा बाजार मुख्य मार्ग चौड़ीकरण के लिए पेड़ काटे गए थे। मई 2015 में लकड़ी परिवहन के नाम पर आरोपी अफसरों ने फर्जी बिल के जरिए 30 लाख रुपए से ज्यादा का गबन कर शासन को नुकसान पहुंचाया।

- बलौदा बाजार मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आदित्य जोशी ने पुलिस को आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का आदेश दिया। गौरतलब है कि बोरतरा गांव के नारायण सिंह चौहान ने सूचना के अधिकार के तहत लकड़ी परिवहन संबंधी जानकारी मांगी थी, जिसमें गबन का खुलासा हुआ है।

- थाना प्रभारी रामगोपाल सोनी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पांचों अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों की तलाश जारी है। जांच में और भी लोगों के नाम आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


रिटार्यड डीएफओ के घर पर पड़ा था ईओडब्ल्यू का छापा
बलौदा बाजार डीएफओ रहते हुए शिव शंकर बड़गैया के घर पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) का छापा पड़ा था। एसडीओ एसबी द्विवेदी रिटायर्ड हो चुके हैं। रेंजर कोमल दास घृतेश का अन्यत्र तबादला हो चुका है। वर्तमान में डिप्टी रेंजर रतन डड़सेना और फॉरेस्ट गार्ड सतीश सोनकेवरे पलारी में पदस्थ हैं।

दोनों मालवाहक गाड़ियां फर्जी निकलीं
थाना प्रभारी ने बताया कि दो साल पहले मई में ट्रैक्टर (सीजी 04 बी 9929) से 32 हजार घन मीटर लकड़ी का परिवहन कर 36 लाख 90 हजार रुपए भुगतान बताया गया था। ट्रैक्टर का छत्तीसगढ़ में पंजीयन ही नहीं है। इसी तरह माजदा (सीजी 04 ई 0434) से भी लकड़ी ढुलाई की गई थी, जबकि यह नंबर मिनी बस का है, जो हरजीत सिंह आहूजा रायपुर के नाम पर दर्ज है। इसी तरह बाउचर नंबर 408, 411, 413 में करीब 1.54 लाख रुपए फर्जी गाड़ी क्रमांक दिखाकर निकाले गए थे। माजदा गाड़ी को करीब 3.13लाख रुपए का भुगतान यशवर्धन वर्मा कैंप संडी के नाम से दिखाया गया है, जबकि यशवर्धन नाम का कोई व्यक्ति संडी कैंप में नहीं है।