--Advertisement--

कैट में हासिल किए 99.95, IIM में नहीं लेंगे एडमिशन, स्टूडेंट्स को देंगे कोचिंग

सोमवार को जारी हुआ रिजल्ट, शहर से 1200 से ज्यादा स्टूडेंट ने दिया था कैट

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 08:45 AM IST
सूर्यकांत अग्रवाल (99.95) 2015 में आई सूर्यकांत अग्रवाल (99.95) 2015 में आई

रायपुर. नवंबर में हुए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के रिजल्ट सोमवार को जारी किए गए। इसमें शहर के सूर्यकांत अग्रवाल को 99.95 पर्सेंटाइल मिले। वहीं, आयुष्मान दुबे ने 99.85 पर्सेंटाइल हासिल किया। आशीष माहाला ने 99.67 पर्सेंटाइल के साथ मैथ्स में 100 पर्सेंट स्कोर किया है। शहर से 1200 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने ये एग्जाम दिया था, जबकि देशभर से 2 लाख स्टूडेंट्स से ज्यादा स्टूडेंट इसमें अपीयर हुए थे। आईअाईएम-लखनऊ ने ये रिजल्ट जारी किए। एक्सपर्ट श्याम वर्मा और अभिषेक गुप्ता ने बताया कि अब स्टूडेंट्स को देश के टॉप आईआईएम से कॉल आएंगे। जीडी, पर्सनल इंटरव्यू और राइटिंग एबिलिटी टेस्ट के बाद साफ होगा कि किस स्टूडेंट को कहां दाखिला मिलेगा। इस बार रिजल्ट में लगभग 20 स्टूडेंट्स का संयुक्त रूप से 100 पर्सेंटाइल आया है।

IIT मुंबई से कर चुके हैं बीटेक

चौबे कॉलोनी निवाासी सूर्यकांत अग्रवाल (99.95) 2015 में आईआईटी, मुंबई से बीटेक कर चुके हैं। डेढ़ साल तक अमेरिका में जॉब भी की। सूर्यकांत का कहना है कि वे आईआईएम में एडमिशन नहीं लेंगे। बल्कि शहर के होनहार स्टूडेंट्स को आईआईएम और आईआईटी के लिए तैयार करेंगे। सूर्यकांत के पिता बीआर अग्रवाल, मम्मी अंचला अग्रवाल, बहन प्रज्ञा हैं।

6 महीने में दिए 35 मॉक टेस्ट

आयुष्मान दुबे (99.85) ने बताया कि तैयारी को परखने के लिए मैंने पिछले 6 महीनों में 30 से 35 माॅक टेस्ट दिया था। इससे कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ा। शुरू से ही आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ने का सपना था। बेंगलूरू और अहमदाबाद से इंटरव्यू के लिए कॉल भी आ गए हैं। आयुष्मान के पिता का नाम अजय कुमार दुबे है।

टाइम मैनेज के लिए अपनाए मैथड

इंडिया लेवल पर मैथ्स में फर्स्ट रैंक हासिल करने वाले आशीष माहाला (99.67) ने कहा- कॉम्पिटेटिव एग्जाम में टाइम अहम होता है। कई बार क्वेश्चन छूट जाते हैं। मैंने टाइम मैनेज किया और हर बार क्वेश्चन सॉल्व करने के लिए अलग मैथड अपनाया। कई क्वेश्चन को साॅल्व करने के लिए सोशल मीडिया का भी यूज किया है।

जॉब करते हुए की तैयारी

अाकाश अग्रवाल (99.33) ने बताया कि पिछले साल कैट में अच्छी रैंक न आने से हताश था। समझ में नहीं आ रहा था क्या करूं। ऐसे में मेरे पैरेंट्स ने मुझे मोटिवेट किया। खुद को बूस्ट किया और तैयारियों में जुट गया। मैं जॉब करते हुए डेली एक घंटे कैट की तैयारी करने लगा। लखनऊ और दिल्ली में एडमिशन की उम्मीद है।