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पीएचडी घोटाला : गवर्नर ने तय किए 11 प्वाइंट्स, 10 सदस्यीय जांच कमेटी बनी

देश में यह अपने तरह का पहला मामला है इतनी बड़ी संख्या में पीएचडी की डिग्रियों को जांच के दायरे में हैं।

Danik Bhaskar

Dec 16, 2017, 08:45 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रायपुर. पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी, बिलासपुर की 226 पीएचडी पर राजभवन से रोक लगाने के खुलासे के अगले ही दिन उच्च शिक्षा विभाग के एसीएस सुनील कुजूर ने 10 सदस्यों की जांच कमेटी बना दी है। देश में यह अपने तरह का पहला मामला है जब किसी एक यूनिवर्सिटी में इतनी बड़ी संख्या में पीएचडी की डिग्रियों को जांच के दायरे में लिया गया है। कमेटी जिन 11 बिंदुओं पर पीएचडी की जांच करेगी, वे सभी कुलाधिपति (राज्यपाल) कार्यालय ने तय किए हैं। कमेटी से जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए भी कहा गया है।


- गौरतलब है कि पं. शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी में छह साल (वर्ष 2009-14 तक) की अवधि में हुई पीएचडी के रजिस्ट्रेशन से लेकर रिसर्च तक में बड़ी खामियां पाई गई हैं, इसलिए राज्यपाल बलरामदासजी टंडन ने सभी पीएचडी के अवार्ड पर रोक लगा दी है। राज्यपाल के निर्देश पर ही एसीएस सुनील कुजूर ने 10 आला शिक्षाविदों की जांच कमेटी बनाई है।

- मामले की गंभीरता और जांच की गोपनीयता की वजह से कमेटी के सदस्यों के नाम नहीं छापे जा रहे हैं। एसीएस ने कमेटी से जल्द से जल्द रिपोर्ट मांगी है। कमेटी एक-एक पीएचडी की थीसिस की गहनता से जांच करेगी। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक प्रकरण की अलग-अलग जांच कर कमेटी और विभाग स्वयं निर्णय ले सकते हैं।

जांच के ये बिंदु तय किए गए

- किन शोधार्थियों ने यूजीसी के नियम-2016 और ओपन विवि के अध्यादेश के अनुसार पीएचडी की?
- 11 जुलाई से पहले रजिस्टर्ड रिसर्च स्कॉलर्स में से कितनों का पंजीयन निरस्त किया गया?
- कितने शोधार्थियों को 6 माह के अंतराल में तीन सेमीनार दिए गए और कितनों को नहीं दिए गए?

- जिन्हें सेमीनार नहीं दिए गए, उन रिसर्चर्स का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया अथवा नहीं?

- जिन 15 रिसर्चर्स को पीएचडी के लिए शैक्षणिक योग्यता में छूट दी गई, क्या नियमानुसार थी?
- कितने रिसर्चर्स के रिसर्च पेपर स्टैंडर्ड रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुए? शेष|पेज 11
- क्या फूल टाइम के रिसर्चर्स का अध्यादेश के नियम 2.3 और पार्ट टाइम के नियम 2.4 के अनुसार पंजीयन कर पीएचडी कराई गई?
- कितने रिसर्चर्स ने अपनी थीसिस के प्रकाशन का प्रयास किया और कितनों ने नहीं?
- क्या अध्यादेश का पालन किए बगैर पीएचडी की डिग्री दी जा सकती है?
- किन-किन रिसर्चर्स ने यूजीसी रेग्यूलेशन -16 के संशोधन की शर्तों और विवि के तत्कालीन अध्यादेश का पालन किया?
- स्टूडेंट्स ने स्वयं के शोध से थीसिस लिखी या कापी पेस्ट (प्लेजरिजम) किया गया ?
- किन-किन रिसर्चर्स ने फुल टाइम और पार्ट टाइम के रुप में पंजीयन कराया था?

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