न्यूज़

--Advertisement--

क्लास 1 और 2 के बच्चों को ‘योग शिक्षा’ देने बांटी जा रहीं कठिन संस्कृत में लिखी किताबें

जिन्हें ठीक से पढ़ना-बोलना भी नहीं आता उन बच्चों को भी मिलती है ‘योग शिक्षा’ किताब।

Danik Bhaskar

Jan 09, 2018, 08:50 AM IST

रायपुर. ‘योग शिक्षा’- ये नाम है उस किताब का जिसे पहली से दूसरी कक्षा के बच्चों को बांटा जा रहा है। किताब कठिन संस्कृत में लिखी है। राज्य में कक्षा 1 से 10 तक के 55 लाख बच्चों को हर साल यह किताब मुफ्त बांटी जा रही है। यूं तो किताब में श्लोक का हिंदी अनुवाद भी है, लेकिन उसे पहली-दूसरी कक्षा के बच्चे जो ठीक से बोलना-पढ़ना भी नहीं जानते कितना समझ पाएंगे इसे लेकर सवाल है। इस साल भी योग शिक्षा की यह किताबें छपवाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से फिर पाठ्य पुस्तक निगम को प्रस्ताव भेजा गया है। दैनिक भास्कर ने किताब को लेकर राजधानी समेत राज्य के कई स्कूलों से जानकारी ली, तो सामने आया यह सच-

ये लिखा है किताब में

- संस्कृत-हिंदी के ऐसे कठिन शब्द हैं जिन्हें प्राइमरी के बच्चों के लिए पढ़ना मुश्किल है।
- सरस्वती वंदना, गुरुवंदना, प्रार्थना, शांतिपाठ के अलावा योग की जानकारी।
- इस किताब में मानवीय मूल्यों के घटक की जानकारी भी दी गई है।

शिक्षकों ने बताया- योग का पीरियड नहीं है, इसलिए पढ़ाने में रुचि नहीं

दैनिक भास्कर ने योग शिक्षा की किताबों को लेकर कई स्कूलों से जानकारी ली। प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों ने बताया कि योग शिक्षा को लेकर प्राइमरी स्कूलों में कोई पीरियड नहीं है। मिडिल व हाई स्कूलों में भी ऐसी ही स्थिति है। स्कूलों का टाइम-टेबल ऐसा है कि योग पढ़ाने में किसी की दिलचस्पी नहीं रहती। किताबें मिलने के बाद बच्चे भी इसे लेकर स्कूल नहीं आते।

- एक ही तरह की योग शिक्षा की किताब बच्चों को हर साल 7 करोड़ रुपए खर्च कर बांटी जा रही हैं। पहली से 5वीं तक एक बच्चे को हर साल भाग-1 किताब दी जा रही है। कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को भाग-2 और कक्षा 9 व 10 के बच्चों को भाग-3 किताब हर साल दी जा रही है।

प्राइमरी की किताब में कठिन संस्कृत और हिंदी का पाठ रखना ठीक नहीं। पहली-दूसरी कक्षाओं में पढ़ाए जाने वाले विषय की भाषा सरल होनी चाहिए। बच्चों का आकर्षण बढ़ाने के लिए चित्र आधारित पाठ होने चाहिए।’’
-बीकेएस रे, पूर्व अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षा मंडल

एससीईआरटी से प्राप्त पाठ्यक्रमों के आधार पर अन्य विषयों के साथ ‘योग शिक्षा’ किताब भी प्रकाशित होगी। पिछले साल की तरह इस बार भी करीब 55 लाख किताबें योग की प्रकाशित की जाएंगी।’’
अशोक चतुर्वेदी, महाप्रबंधक, पाठ्य पुस्तक निगम

Click to listen..