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दो दिन पड़े ओला-बारिश से 8 जिलों में धान, चना, आम, इमली की फसल बर्बाद

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 08:54 AM IST

कवर्धा, राजनांदगांव, बेमेतरा, बलौदाबाजार, बिलासपुर, जशपुर, बस्तर व रायपुर में तबाही।

- फाइल - फाइल

रायपुर. पिछले दो दिन चली बेमौसम आंधी-बारिश और ओलावृष्टि ने 8 जिलों में धान, चना, आम, इमली की फसल को बर्बाद कर दिया है। इसके अलावा संग्रहण केंद्रों में पड़ा धान भी भीग गया है। वहीं, आम के मौर और इमली के फूल पर भी मौसम की मार पड़ी है। साग-सब्जियां भी चौपट हो गई हैं। मौसम की मार का ज्यादा नुकसान कवर्धा के पंडरिया व बोड़ला और मुंगेली के लोरमी के साथ बिलासपुर, रायपुर जिले में हुआ है। ग्रीष्मकालीन धान के लिए पानी नहीं दिए जाने के कारण कवर्धा, बलौदाबाजार, बिलासपुर और रायपुर के किसानों ने गेहूं की फसल ली थी। इस बारिश ने गेहूं के फूल को बर्बाद कर दिया है। किसानों के मुताबिक अब गेहूं के दाने कम वजनी निकलेंगे। इसी तरह से ओलावृष्टि के कारण चना काला पड़कर सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा तिवरा, अलसी, सरसों, मूंग, मसूर लेने वाले किसानों को भी बड़ा झटका लगा है। इनके पौधे गिरकर खेतों को घास के मैदान का रुप दे चुके हैं।

11 हजार हेक्टेयर में चने को नुकसान

किसानों ने 3 लाख हेक्टेयर में चना और 1.80 लाख हेक्टेयर में गेंहूं बोया था। इनमें से ओला वृष्टि वाले जिलों कवर्धा, राजनांदगांव और बेमेतरा में इन फसलों को नुकसान हुआ है। इनमें अकेले कवर्धा के 130 गावों में 6686 हेक्टेयर, बेमेतरा में 2596 हेक्टेयर और छुईखदान में 599 हेक्टेयर शामिल है। बलौदाबाजार में गेंहूं की फसल को नुकसान की खबरें हैं।

ज्यादा नुकसान राजधानी समेत इन इलाकों में

- बस्तर की पहचान माने जाने वाले चूसनी आम को बड़ा नुकसान हुआ है। सालाना 600 करोड़ रुपए के इमली के कारोबार को भी बड़ा झटका लगने के संकेत हैं।
- कवर्धा, बलौदाबाजार जिले में किसानों ने बड़े इलाके में गेहूं और चना बोया था। लेकिन ओलावृष्टि ने खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया।

- बारिश ने गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया। किसानों के मुताबिक अब गेहूं के दाने अब कम वजनी निकलेंगे। चना भी ओलावृष्टि के कारण काला पड़कर सड़ने की कगार पर पहुंच गया है।
- भाकिसं के प्रवक्ता नवीन शेष के अनुसार किसानों को प्रति एकड़ 25 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा।

विशेषज्ञों की 2 सलाह

1. 4 दिन मौसम ऐसा ही रहेगा

अगले तीन-चार दिन मौसम ऐसा ही रहने ही संभावना है। जिन्होंने देर से गेहूं की बोआई की उन्हें इस बारिश का फायदा मिलेगा। लेकिन चना, सरसों, अरहर समेत अन्य फसल लगाने वालों को नुकसान हो सकता है। बारिश से कीट लगने की आशंका बढ़ गई है, फसल का बचना मुश्किल है। जिन्होंने फसल बीमा कराया है वे मुआवजे के लिए प्रयास करें।’’
-डॉ. जीके दास, मौसम वैज्ञानिक, इग्नू

2. भभूतिया रोग की आशंका बढ़ी
अभी आम के फूल आने का मुख्य समय है, फूल काफी आ भी गए थे। लेकिन दो दिन की बारिश से काफी नुकसान हुआ है। आगे भी ऐसा मौसम रहा तो आम की फसल को 40 फीसदी तक नुकसान होगा। आम पर भभूतिया रोग और कीट प्रकोप की आंशका है। किसान फसल के बचाव के लिए मौसम खुलने के साथ दवाओं का इस्तेमाल करें।’’
-डॉ. जीएल शर्मा, उद्यानिकी एक्सपर्ट, कृषि विवि

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