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सी लेवल से 3500 फीट की ऊंचाई पर है ये मूर्ति, जहां लग रही सेल्फी लेने ऐसी भीड़

इस जगह पर लोगों की सेल्फी खिंचवाने की होड़ खतरनाक होती जा रही है।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 03:23 AM IST
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, यह वही जगह है जहां गणेश और परशुराम के बीच युद्ध हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, यह वही जगह है जहां गणेश और परशुराम के बीच युद्ध हुआ था।

दंतेवाड़ा(छत्तीसगढ़). जिले की सीमा पर समुद्र तल से करीब 3500 फीट की ऊंचाई पर स्थित ढोलकल शिखर पर प्राचीन गणेश प्रतिमा के साथ सेल्फी खिंचवाने की होड़ खतरनाक होती जा रही है। इससे चट्‌टान और ऐतिहासिक प्रतिमा को खतरा बना हुआ है। पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इस पर नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

सेल्फी खिंचवाने वालों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही
- पर्यटन और ट्रैकिंग से जुड़े कुछ युवाओं के समूह ने इस जगह तक पहुंचने से रोकने के लिए कोशिश की, इसके लिए यहां तक लगे पत्थरों को हटाया भी गया था, लेकिन इसके बावजूद लोगों ने फिर से यहां चढ़ना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, पूजा के लिए यहीं पर पत्थर पटककर नारियल भी फोड़ा जा रहा है।

- साल भर पहले 27 जनवरी को ढोलकल की इस प्रतिमा को अज्ञात लोगों ने नीचे गिराकर खंडित कर दिया था। इसी वक्त पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने चट्‌टान में आई हल्की दरार के बारे में आगाह किया था। मूर्ति को फिर से जोड़ने वाले पुरातत्व विशेषज्ञ व सहायक संचालक प्रभात सिंह ने भी इस बाबत चिंता जताई थी लेकिन सेल्फी खिंचवाने वालों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।

जानिए क्या है यहां से जुड़ी कहानी....
- दक्षिण बस्तर के भोगामी आदिवासी परिवार अपनी उत्पत्ति ढोलकट्टा (ढोलकल) की महिला पुजारी से मानते हैं।
- क्षेत्र में यह कथा प्रचलित है कि भगवान गणेश और परशुराम का युद्ध इसी शिखर पर हुआ था।
- युद्ध के दौरान भगवान गणेश का एक दांत यहां टूट गया। इस घटना को चिरस्थाई बनाने के लिए छिंदक नागवंशी राजाओं ने शिखर पर गणेश की प्रतिमा स्थापति की।
- चूंकि परशुराम के फरसे से गणेश का दांत टूटा था, इसलिए पहाड़ी की शिखर के नीचे के गांव का नाम फरसपाल रखा गया।

कैसी है प्रतिमा...
- 6 फीट ऊंची 2.5 फीट चौड़ी ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा वास्तुकला की दृष्टि से अत्यन्त कलात्मक है।
- गणपति की इस प्रतिमा में ऊपरी दांये हाथ में फरसा, ऊपरी बांये हाथ में टूटा हुआ एक दंत, नीचे दांये हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला धारण किए हुए तथा नीचे बांये हाथ में मोदक धारण किए हुए आयुध के रूप में विराजित है। पुरात्वविदों के मुताबिक इस प्रकार की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में कहीं नहीं मिलती है।


चोरी हो चुकी है सूर्यदेव और पार्वती की प्रतिमा
ढोलकल शिखर पर ही एक हिस्से में विराजमान भगवान सूर्यदेव और माता पार्वती की प्रतिमा करीब दो दशक पहले ही चोरी हो चुकी है, जिसके बारे में पुरातत्व विभाग को भी ठीक-ठीक जानकारी नहीं हैं। दोनों ही जगह पर स्थापित मूर्ति की जगह पत्थर के पैडेस्टल सूने पड़े हुए हैं।

फोटो : शैलेंद्र ठाकुर

दंतेवाड़ा में बैलाडीला की पहाड़ी पर 3000 फीट की ऊंचाई पर रखी ढोलकल गणेश की प्रतिमा। दंतेवाड़ा में बैलाडीला की पहाड़ी पर 3000 फीट की ऊंचाई पर रखी ढोलकल गणेश की प्रतिमा।
6 फीट ऊंची 2.5 फीट चौड़ी ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा वास्तुकला की दृष्टि से अत्यन्त कलात्मक है। 6 फीट ऊंची 2.5 फीट चौड़ी ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा वास्तुकला की दृष्टि से अत्यन्त कलात्मक है।
रात्वविदों के मुताबिक इस प्रकार की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में कहीं नहीं मिलती है। रात्वविदों के मुताबिक इस प्रकार की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में कहीं नहीं मिलती है।
10 वीं सदी की इस मूर्ति को लेकर कई तरह के रहस्य आज भी कायम है। 10 वीं सदी की इस मूर्ति को लेकर कई तरह के रहस्य आज भी कायम है।
पुरात्वविदों के मुताबिक, कला की दृष्टि से 10-11 शताब्दी की (नागवंशी) प्रतिमा कही जा सकती है। पुरात्वविदों के मुताबिक, कला की दृष्टि से 10-11 शताब्दी की (नागवंशी) प्रतिमा कही जा सकती है।