--Advertisement--

राजनांदगांव मोतियाबिंद कांड में खुलासा- मरीजों को जो इंजेक्शन लगाया उसी में मिला घातक बैक्टीरिया

आंख फोड़वा कांड के भंडाफोड़ के साथ राज्य में नकली और घटिया दवा की सप्लाई का खुलासा हुआ है।

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 05:14 AM IST
प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आ प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आ

रायपुर. राजनांदगांव के मिशनरी अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद मरीजों की आंखें नकली और गुणवत्ताहीन डेक्सामेथासोन इंजेक्शन के कारण फूटी। ये इंजेक्शन मरीजों को सर्जरी के बाद आंखों की सूजन कम करने लगाया गया था। इंजेक्शन में खतरनाक बैक्टीरिया सूडोमोनास था। यही सूडोमोनास बैक्टीरिया मरीजों की आंखों से निकाले गए मवाद और पानी के सैंपल में भी निकला। प्रयोगशाला रिपोर्ट से खुलासा हो गया है कि घटिया इंजेक्शन के जरिये सूडोमोनास इंजेक्शन मरीजों की आंखों पहुंचा और उनकी आंखों की रोशनी चली गई। आंख फोड़वा कांड के भंडाफोड़ के साथ राज्य में नकली और घटिया दवा की सप्लाई का खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट ने नकली और घटिया दवा की सप्लाई की हकीकत उजागर कर दी

इंजेक्शन में बैक्टीरिया होने की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को भेज दी गई है। रिपोर्ट के खुलासे से स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर सकते में हैं। रिपोर्ट ने नकली और घटिया दवा की सप्लाई की हकीकत उजागर कर दी है। इसी वजह से पूरा अमला रिपोर्ट के नतीजे उजागर नहीं कर रहा है। कोलकाता से बाकी रिपोर्ट आने का हवाला देकर रिपोर्ट दबाने की कोशिश की जा रही है। राजनांदगांव के क्रिश्चयन अस्पताल में ऑपरेशन के बाद जब मरीजों की आंखों में इंफेक्शन फैला तब उन्हें रायपुर के प्राइवेट अस्पताल रिफर किया गया।

जानिए पूरा मामला...

- राजनांदगांव के क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल से 23 मार्च को शिविर में मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ। सर्जरी के अगले ही दिन से मरीजों की आंखों में इंफेक्शन फैलना शुरू हो गया था।

- 28 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जिनमें सेआधे से ज्यादा यानी 15 लोगों की एक आंख को निकालने के हालात बने थे। प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया था कि जिन मरीजों का केवल एक हजार के पैकेज में ऑपरेशन किया गया, उन्हीं की आंखों में इंफेक्शन फैला है। यह पैकेज राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत दिया जाता है।

जांच में डेक्सामेथासोन इंजेक्शन में बैक्टीरिया होने की पुष्टि
रायपुर में इलाज के दौरान मरीजों की आंखों में हो चुके मवाद और पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। मरीजों का मोतियोबिंद ऑपरेशन करने के पहले और बाद में जो दवाएं और इंजेक्शन दिए गए, उन सभी का सैंपल भी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। उसी जांच में डेक्सामेथासोन इंजेक्शन में बैक्टीरिया होने की पुष्टि हो गई। चूंकि मरीजों की आंखों से निकाले गए पानी और इंजेक्शन के सैंपल में एक ही बैक्टीरिया है, इसी खुलासा हो गया कि मरीजों की आंखों में इंजेक्शन से ही इंफेक्शन हुआ और उनकी आंखों की रोशनी चली गई।

कितना खतरनाक है बैक्टीरिया:
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार सूडोमोनास बैक्टीरिया बेहद खतरनाक होता है। ये तेजी से फैलता है। इसका असर तेजी से होने के कारण इससे होने वाले इंफेक्शन को रोकना मुश्किल होता है। इनका फैलाव इतनी तेजी से होता है एंटी बायोटिक की हाईडोज का भी असर तेजी से नहीं हो पाता।

बैक्टीरिया मिला है : डा. सुभाष मिश्रा
राज्य अंधत्व निवारण समिति के अघ्यक्ष और राज्य कार्यक्रम प्रभारी डा. सुभाष मिश्रा का कहना है इंजेक्शन में बैक्टीरिया मिला है। यही बैक्टीरिया मरीजों की आंखों के पानी और मवाद में है। इसी वजह से पुष्टि हो रही है कि मरीजों को घटिया और निम्न दर्जे का इंजेक्शन लगाया गया था।

X
प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आप्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आ
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..