--Advertisement--

राजकुमारी को चरवाहे से हुआ प्यार, नहीं हो सका मिलन लेकिन आज भी मशहूर है ये कहानी

वैलेंटाइन डे पर इतिहासकारों से बातचीत कर हम पेश कर रहे हैं राज्य में मशहूर तीन प्रेम कहानियां।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 07:14 AM IST
कचना-ध्रुवा का मंदिर। कचना-ध्रुवा का मंदिर।

रायपुर. हीर-रांझे और रोमियो-जूलिएट सहित देश और दुनिया के कई लोगों की लव स्टोरी अापने पढ़ी-सुनी होगी। लव स्टोरी के मामले में छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं है। यहां भी राजा-रानी, राजकुमारी और गांव के नायक की प्रेम कहानियां काफी मशहूर हैं। वैलेंटाइन डे पर इतिहासकार डॉ. रमेंद्र नाथ मिश्र और डॉ. रामकृष्ण बेहार से बातचीत कर हम पेश कर रहे हैं राज्य में मशहूर तीन प्रेम कहानियां। इनमें लोरिक-चंदा, झिटकू-मिटकी और कचना-ध्रुवा की लव स्टोरी शामिल है। इनकी प्रेम कहानी कई गांवों में लोक गाथा के तौर पर गाई जाती है। यही नहीं बस्तर की फेमस झिटकू और मिटकी की लव स्टोरी डिफरेंट आर्ट फॉर्म के तौर पर दीवारों और मूर्तियों में गढ़ी भी जाती है।

पाटन की राजकुमारी को चरवाहे से हुआ प्यार, नहीं हो सका मिलन

पाटन गढ़ में लोरिक नाम का चरवाहा रहता था। गढ़ में एक नरभक्षी शेर घुस आता है। राजा सेनापति को शेर को तत्काल मारने का आदेश सुनाता है। सेनापति ये बात अच्छे से जानता है कि उस शेर को सिर्फ लोरिक मार सकता है। सेनापति के कहने पर लोरिक नरभक्षी शेर को मारने में कामयाब भी हो जाता है, लेकिन सारा क्रेडिट सेनापति खुद ले लेता है। लोरिक के कहने पर सेनापति उसे राजमहल ले जाकर राजा से मिलवाता है। राजा लोरिक को बांसुरी सुनाने कहता है। बांसुरी की धुन पर राजा की बेटी चंदा मोहित होकर लोरिक से प्रेम करने लगती है। दोनों जंगलों में मिलने लगते हैं। ये पता चलते ही चंदा की शादी किसी राजकुमार से कर देते हैं। इनकी कहानी का अंत स्पष्ट नहीं हो सका। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि बरसों बाद चंदा और लोरिक तीर्थ स्थल पर एक-दूसरे को देखते हैं और देह त्याग देते हैं। कुछ का कहना है कि मिलने के बाद दोनों साथ रहने लगते हैं। इनकी कहानी लोक गीत के तौर पर गाई जाती है।

कचना-ध्रुवा का मंदिर। कचना-ध्रुवा का मंदिर।

ध्रुवा से प्यार कर अमर हो गया कचना, इनके मंदिर में माथा टेककर ही गुजरते हैं राहगीर

 

ये कहानी है धमतरी के राजा की बेटी ध्रुवा और आदिवासी नायक कचना की। दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं। राजा को जब ये बात पता चलती है तो वे राजकुमारी ध्रुवा की शादी दूसरे राज्य के राजकुमार से कर देते हैं और आदिवासी नायक कचना का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। ये खबर पूरे राज्य में फैल जाती है। कचना की प्रेम कहानी और उसके अंत से दुखी होकर एक बुजुर्ग महिला कचना का सिर लेकर राजिम से लगभग 25 किलोमीटर आगे एक मंदिर के रूप में स्थापित करती है। ये मंदिर आज कचना ध्रुवा के नाम से पहचाना जाता है। इस मंदिर में कचना की पूजा होती है। इस मंदिर में कचना के प्रतीक स्वरूप घोड़े की मूर्ति रखी गई है। इस मंदिर के सामने से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं, जिसमें से ज्यादातर लोग मंदिर में माथा टेकते हुए आगे बढ़ते हैं।

झिटकू मिटकी। झिटकू मिटकी।

बस्तर में फेमस है इनकी प्रेम कहानी, शादी की मन्नत के साथ आदिवासी युवा करते हैं पूजा 

 

बस्तर में झिटकू-मिटकी की लव स्टोरी बेहद फेमस है। आदिवासी इन्हें आदर्श जोड़ा (कपल) मानकर पूजते हैं। बस्तर में रहने वाली मिटकी सात भाइयों की इकलौती बहन थी। सभी भाई उससे बेहद प्यार करते थे। भाइयों को ये चिंता थी कि बहन मिटकी की शादी हो जाएगी तो वो उनसे दूर चली जाएगी। उन्होंने झिटकू के साथ मिटकी की शादी करा दी। गांव के पास से एक नाला बहता था, जिसे बांधने के लिए मिटकी के सातों भाई और झिटकू काफी कोशिश करते हैं। वहां जितनी बार बांध बनाते हैं, वो टूट जाता है। एक रात सातों भाइयों को सपना आता है कि अगर किसी की बलि दी जाए तो बांध बंध जाएगा। भाई झिटकू की बलि दे देते हैं। ये खबर सुनकर मिटकी उसी बांध में कूदकर अपनी जान दे देती है। आज भी बस्तर के आदिवासी इनकी पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अगर प्रेमी-प्रेमिका इनकी पूजा करें तो उनका सपना पूरा हो जाता है।

X
कचना-ध्रुवा का मंदिर।कचना-ध्रुवा का मंदिर।
कचना-ध्रुवा का मंदिर।कचना-ध्रुवा का मंदिर।
झिटकू मिटकी।झिटकू मिटकी।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..