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लोन के कारण नहीं बेच सका जमीन, कहां से कर्ज चुकाता, दे रहा हूं जान: किसान ने लिखा

मृतक किसान के कमरे से 3 पेज का सुसाइडल नोट बरामद हुआ है, जिसमें उसने मौत का कारण साफ किया है।

Dainik Bhaskar

Dec 10, 2017, 06:06 AM IST
रामाधार साहू की मौत पर बिलखते परिजन। रामाधार साहू की मौत पर बिलखते परिजन।

रायपुर. बेमेतरा के ग्राम कठिया के किसान रामाधार पिता फिरंता साहू (58) ने कर्ज से परेशान होकर शुक्रवार की दरमियानी रात घर में सीलिंग पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उस पर ट्रैक्टर का साढ़े 5 लाख, छग राज्य ग्रामीण बैंक जेवरा का 3 और सेवा सहकारी समिति कठिया का 1.18 लाख रुपए कर्ज था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। मृतक किसान के कमरे से 3 पेज का सुसाइडल नोट बरामद हुआ है, जिसमें उसने मौत का कारण स्पष्ट किया है। भास्कर के हाथ लगे मृतक के सुसाइडल नोट में लिखा है कि कर्ज से छुटकारा पाने के लिए वह अपनी जमीन बेचने की सोच रहा था, लेकिन बैंक लोन के कारण शासन से उसे जमीन बेचने की अनुमति मिली तो कर्ज कहां से चुका पाता। इसलिए उसे प्राण त्यागना पड़ा।

सुसाइडल नोट में किसान ने क्या लिखा

टीआई बेमेतरा, मैं रामाधार साहू पिता फिरंता ग्राम कठिया, तहसील बेरला (बेमेतरा) का रहने वाला हूं। मैं एक साल से कर्ज से बहुत परेशान था। अभी 8 दिसंबर 2017 को जेवरा बैंक का कर्ज पटाना था, लेकिन मैं कर्ज पटाने में असमर्थ हो गया। क्योंकि इस साल अकाल के नाम से कर्ज अदा नहीं कर पाया। बैंक मैनेजर मुझे नोटिस दिया था और 4-5 लोगों का और कर्ज लग रहा हूं। इसलिए बहुत परेशान था और सहन नहीं कर पाया। मैं खुद आत्महत्या कर लिया। मैं सदैव से कृषि का कार्य करता था। जमीन बेचूंगा करके सोचा था। बैंक कर्ज के नाम से मुझे शासन से जमीन बेचने की अनुमति नहीं मिली, तो मैं कहा से कर्ज पटा सकता, इसलिए मुझे प्राण त्यागना पड़ा।

ये है पूरा घटनाक्रम
मृतक किसान रामाधार साहू कठिया गांव का रहने वाला था। उसके दाे बेटे व दो बेटियां हैं, सभी की शादी हो चुकी है। कुछेक साल से कर्ज के कारण किसान परेशान था। शुक्रवार रात 9 बजे रामाधार ने सभी के साथ बैठकर भोजन किया। फिर सोने के लिए अपने-अपने कमरे में चले गए। आमतौर पर रामाधार रोज सुबह 5 बजे उठ जाते, लेकिन शनिवार को उसके कमरे का दरवाजा बंद था। लोकनाथ ने अपने पिता को पुकारा, कोई आवाज नहीं आई। खिड़की से झांककर देखा तो किसान ने खुदकुशी कर ली थी।

5.50 लाख रुपए लिया था कर्ज
मृतक किसान ने 3 साल पहले कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर खरीदने महिंद्रा फाइनेंस से 5.50 लाख रुपए कर्ज लिया था। दो साल पहले छग राज्य ग्रामीण बैंक जेवरा से दोनों बेटे लोकनाथ व लुकेश्वर के नाम से 90-90 हजार और खुद के नाम से 1.20 लाख रुपए लोन लिया था।

ढाई एकड़ भूमि पर कम थी उपज
मृतक रामाधार साहू के पास सिर्फ 2.50 एकड़ कृषि भूमि है। खाद-बीज के लिए उसने समिति से 1 लाख रुपए लोन लिया था। मृतक के पुत्र लोकनाथ का कहना है कि इस साल कम बारिश व सूखे के कारण फसल अच्छी नहीं हुई। ढाई एकड़ भूमि से बमुश्किल 50 कट्टा धान ही मिला। वह भी घर में ही पड़ा है, जिसे अभी तक बेचे नहीं है।

उठे सवाल: ऐसे मामले में हर वक्त प्रशासन बचाव की मुद्रा में

केस 1. नवंबर 2017 में बेमेतरा जिले के ग्राम घोरेघाट में भगवती उर्फ बबला गायकवाड़ ने अपने पिता के 5 एकड़ जमीन के एवज में कृषि लोन लिया था। लोन का पैसा नहीं चुका पाने से उसने फांसी लगा ली थी। प्रशासन ने कर्ज की बात से इंकार कर दिया था। इस पूरे मामले में प्रशासन बचाव करता रहा।

केस 2. दिसंबर 2015 में ग्राम मटका के आदिवासी किसान जगमोहन ध्रुव (40) ने आत्महत्या कर ली थी। उसके नाम सिर्फ एक एकड़ जमीन थी, जिसके भरोसे परिवार का भरण-पोषण करता था। पुलिस ने आर्थिक परेशानी की बात नकार दी थी। मामले की जांच भी पूरी नहीं की गई। परिजन भी निराश हुए।

केस 3. साल 2016 में जिले के ग्राम ताला में भुनेश्वर चेलक (43) ने अपने खेत में पेड़ पर फांसी लगा ली थी। वह भी कर्ज से परेशान था। सूखे के कारण कर्ज नहीं चुका पाने से उसने ऐसा आत्मघाती कदम उठाया था। इससे अलग पुलिस ने आत्महत्या का कारण प्रेम प्रसंग बताया था और केस रफादफा कर दिया गया।

किसान का लिखा सुसाइड नोट। किसान का लिखा सुसाइड नोट।
शुक्रवार रात किसान रामाधार साहू (58) ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। शुक्रवार रात किसान रामाधार साहू (58) ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।
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रामाधार साहू की मौत पर बिलखते परिजन।रामाधार साहू की मौत पर बिलखते परिजन।
किसान का लिखा सुसाइड नोट।किसान का लिखा सुसाइड नोट।
शुक्रवार रात किसान रामाधार साहू (58) ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।शुक्रवार रात किसान रामाधार साहू (58) ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी।
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