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बंधुआ मजदूरी करने वालों ने शुरु किया ये कारोबार, आज सालाना टर्नओवर 2 करोड़

चंद किसानों से शुरू हुए बदलाव का असर अब करीब 3000 किसानों तक पहुंचा।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 10:07 AM IST
युवाओं के समूह की एक छोटी सी पह युवाओं के समूह की एक छोटी सी पह

जशपुरनगर(छत्तीसगढ़). जशपुर जिले का सन्ना क्षेत्र। यह इलाका कभी अपने पिछड़ेपन के लिए चर्चित था। वजह भी थी। यहां रहने वाले पहाड़ी कोरवा सेठ-साहूकारों से दो-तीन हजार रुपए उधार लेकर उनके बंधुआ मजदूर बन जाते थे। युवाओं के समूह की एक छोटी सी पहल ने कोरवा ही नहीं, पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी। यहां की मुरुमी मिट्टी से कोई खेती नहीं कर पाता था। कोरवाओं ने दिन-रात एक कर बंजर जमीन को उपजाऊ बना डाला।

टर्नओवर दो करोड़ रुपए तक जा पहुंचा

- यही नहीं, इनसे ली जाने वाली फसलों से यहां के 750 किसानों का सालाना टर्नओवर दो करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है। सिर्फ काजू की प्रोसेसिंग से अब तक आठ करोड़ रुपए की आय का अनुमान है। चंद किसानों से शुरू हुए बदलाव की बयार अब करीब तीन हजार किसानों तक पहुंच चुकी है। कभी बंजर रहने वाला सन्ना क्षेत्र राज्य के बाकी किसानों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बन गया है।

- दरअसल, यहां की मिट्टी ज्यादातर मुरुमी थी। इसके चलते काफी जमीन बंजर छोड़ जाती थी। कुछ उपजाऊ जमीन थी, लेकिन कोरवाओं के पास खेती करने लायक पैसे न थे। वे सेठ- साहूकारों से कुछ हजार रुपए उधार लेकर उनके बंधुआ बन जाते थे।

40 रुपए का काजू प्रोसेसिंग के बाद अब 250 रुपए में, पहली फसल से मिलेंगे 8 करोड़

किसान पहले काजू 40 रुपए किलो में बेचते थे। डीएमएफ मद से 9.50 लाख रुपए की प्रोसेसिंग यूनिट लगवाई गई। इसे किसान खुद चलाते है। अब वही काजू प्रोसेंसिंग के बाद 250 रुपए किलो बिकता है। दो साल में ही इनका सालाना टर्नओवर करीब दो करोड़ रुपए हो गया है। काजू की पहला फसल की प्रोसेसिंग चल रही है। इससे 8 करोड़ रुपए की आय का अनुमान है। किसानों का यह संगठन वर 2016-17 में 1.04 ्ष करोड़ और 2017-18 में अब तक 82 लाख के उत्पाद बेच चुके है।

140 युवाओं की टीम ने क्षेत्र में ऐसे लाया बदलाव

नाबार्ड ने जिले के पांच ब्लॉक बगीचा, दुलदुला, मनोरा, कुनकुरी, फरसाबहार का चयन किया। रीड्स संस्था के युवाओं ने फलों की खेती सिखाई। सन्ना-मनोरा क्षेत्र में 2700 किसानों ने नाशपाती, आम, मिर्च, काजू के पौधे लगाए। दुलदुला, फरसाबहार, कुनकुरी में काजू की खेती हो रही है। अंतरवर्षीय फसल आलू, मिर्च, टमाटर, धनिया, गोभी की फसलें भी ली जा रही हैं। हरेक किसान 50 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक कमा रहा है। प्रकाश, गुड्डू, लालसाय, सुंदर समेत किसानों के के बच्चे मॉडल स्कूलों में पढ़ते हैं।

दलाल-बिचौलिये अब पास नहीं आते किसानों के

किसानों की मजबूरी का फायदा दलाल और बिचौलिए उठाते थे। जमीन बंधक बनाने में भी इन्हीं का हाथ होता था। रीड्स समूह ने किसानों की जमीन मुक्त करवाई और प्रशासन की मदद से उनका कर्ज भी चुकता किया। कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कौशल विकास योजना से किसानों को विशेषज्ञों से ट्रेनिंग दिलवाई, बीज-पंप तक दिलवाए।

प्लानिंग के साथ दूर की गईं दिक्कतें, ट्रेनिंग तक दी

किसानों की समस्या को प्लानिंग के साथ दूर किया गया। जहां पानी कम था, वहां सौर-सुजला के जरिए पंप दिए गए। डबरी, कच्चा डैम बनाने के साथ-साथ किसानों को लगातार ट्रेनिंग दी गई। अब तक यहां 40 अभियान चलाए जा चुके हैं। कम समय में ही किसानों ने अपनी आय बढ़ा ली है। -डॉ प्रियंका शुक्ला, कलेक्टर

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