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नक्सली गढ़ में 24 घंटे चला ऑपरेशन, टोंडामरका, कोर एरिया में घुसकर दी चुनौती

24 घंटे पहले नक्सलियों के कोर एरिया में शुरू किया गया ऑपरेशन गुरुवार को खत्म कर दिया गया।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 08, 2017, 08:53 AM IST

नक्सली गढ़ में 24 घंटे चला ऑपरेशन, टोंडामरका, कोर एरिया में घुसकर दी चुनौती

जगदलपुर.24 घंटे पहले नक्सलियों के कोर एरिया में शुरू किया गया ऑपरेशन गुरुवार को खत्म कर दिया गया। इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों के जवानों ने ढुलेर इलाके में हुई एक मुठभेड़ में एक बंदूकधारी नक्सली को मार गिराया है। इसके बाद इसके शव के साथ कंट्रीमेड बंदूक भी बरामद कर ली गई है। नक्सली के शव को सुकमा जिला मुख्यालय पहुंचाया जा रहा है।

- इसके अलावा इस पूरे इलाके से बड़ी संख्या में नक्सली साहित्य व अन्य सामान भी बरामद किया गया है। इस ऑपरेशन की सबसे खास बात यह है कि पहली बार पुलिस पीएलजीए सप्ताह के दौरान नक्‍सलियों की बटालियन नंबर एक को घेरने के लिए नक्सलियों के कोर एरिया में घुसी थी।

- जवान सबसे खतरनाक और संवेदनशील माने जाने वाले ढुलेर, टोंडामरका, सालेतुम जैसे इलाकों में गए। यह पूरा इलाका नक्सली लीडर और हाल ही में सीसी मेंबर बनाए गए बुर्कापाल के मास्टर माइंड हिड़मा की पनाहगाह भी माना जाता है। नक्सलियों के कोर एरिया में जवानों ने 24 घंटे से ज्यादा समय तक ऑपरेशन चलाया।

- इस इलाके में फोर्स के लिए सामान्य दिनों में भी ऑपरेशन चलाना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में पीएलजीए सप्ताह के दौरान इस इलाके में जवानों का जाना एक महत्वपूर्ण कदम था और मुठभेड़ में एक नक्सली को ढेर करने की घटना को भी पुलिस महत्वपूर्ण मान रही है।

- बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि इस इलाके में चलाया गया ऑपरेशन अब खत्म हो गया है। जवान जंगलों के अलावा कई गांवों तक पहुंचे। इस दौरान हुई एक मुठभेड़ में नक्सली भी मारा गया है। उसकी शिनाख्त करवाई जा रही है। वहीं आईईडी बनाने का सामान भी बड़ी संख्या में बरामद किया गया है।

जवानों पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा

सुकमा जिले के कसालपाड़, टोंडामरका, सालेतुम, ढुलेर जैसे इलाके नक्सलियों के गढ़ माने जाते हैं। इन इलाकों में नक्सली कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। इस पूरे इलाके में अभी तक दो दर्जन से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं। ऐसे में पीएलजीए सप्ताह के दौरान जवान इस इलाके में गए और यहां से बिना नुकसान के वापस आ गए। अिधकारियों का मानना है कि इसे जवानों के नजरिए से साइकोलॉजिकल एडवांटेज माना जा रहा है।

पहली बार गांव वाले भागे नहीं जवानों से मिले
इस ऑपरेशन की खास बात यह रही कि यह पहला मौका था जब नक्सल प्रभावित इलाकों में जवानों को देखने के बाद गांव वाले भागे नहीं। डीआईजी सुंदरराज पी ने बताया कि जब जवान ऑपरेशन के दौरान गांवों तक पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनसे मुलाकात की और इलाके के हालात पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने बताया कि अभी इलाके में नक्सलियों की हलचल कम हुई है।

एक नजर में पूरा ऑपरेशन
24 घंटे तक जवान रहे नक्सलियों के कोर एरिया में
1 हजार से ज्यादा जवानों को उतारा गया था ऑपरेशन में।
4 अलग-अलग बल, जिनमें कोबरा कमांडो, डीआरजी, एसटीएफ और जिला बल के जवान शामिल थे।
1 नक्सली के शव सहित कंट्री मेड बंदूक और बम बनाने का सामान बरामद।

झीरमघाटी, ताड़मेटला, बुर्कापाल के बड़े नक्सली हमलों में शामिल रहा है हिड़मा

45 वर्षीय हिड़मा सुकमा जिले के जगरगुंडा थाना क्षेत्र के पूवर्ति गांव का रहने वाला है। उसके माता पिता अभी भी इसी गांव में ही रहते हैं। उसका असली नाम माड़वी देवा है। उसे गुरिल्ला वार में महारत हासिल है। 1997-98 से वह नक्सल दल का हिस्सा बना। तब से उसने लगातार नक्सलियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई आैर अपनी काबिलियत के दम पर वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का बटालियन कमांडर बना। हिड़मा नक्सलियों की दंडकारण्य जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का भी सदस्य है। कुछ समय पहले उसे नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर बनाने की खबरें भी जोरों पर रहीं। हिड़मा झीरमघाटी, ताड़मेटला, बुर्कापाल आैर भेज्जी में हुए सबसे बड़े नक्सली हमलों में शामिल रहा है।

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