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वनमंत्री से 26 करोड़ का काम दिलाने का झांसा, नोएडा के कारोबारी को ठगा

कारोबारियों ने दो दिनों तक आरोपी राजेंद्र को फोन किया। उसने फोन नहीं रिसीव किया।

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 07:24 AM IST
fraud with noida businessman on the name of project by forest minister

रायपुर. वन मंत्री से 26 करोड़ का पौधा सप्लाई का ठेका दिलाने का झांसा देकर नोएडा के कारोबारी से जालसाजों ने 14 लाख की ठगी कर ली। कारोबारी को ठगने क लिए जालसाजों ने गिरोह ने तगड़ी प्लानिंग की। पहले गिरोह के एक सदस्य ने कारोबारी से मेलजोल बढ़ाया। उसके बाद उन्हें रायपुर के बड़े होटल में बुलवाया। वहां एक ठग सीसीएफ अरुण पांडे बनकर उनसे मिला। उनके साथ एक और ठगा था, उसने अपने आप को मंत्री का पीए बताया। वे फारेस्ट के एक-एक अफसर का नाम गिना रहे थे। उनकी बात करने का सलीका भी ऐसा था कि दिल्ली के कारोबारी शक नहीं कर सके और 14 लाख दे दिए। सच सामने आने के बाद पुलिस ने तीन ठगों के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।


ठेका नहीं मिला तो कारोबारी ने असली सीसीएफ से किया संपर्क

जालसाजों ने सीधे रिश्वत की रकम नहीं मांगी। उन्होंने पंजीयन और फाइल को आगे बढ़ाने का झांसा देकर उनसे पैसे ले लिए। कई दिनों तक ठेका नहीं मिला तब कारोबारी ने असली सीसीएफ से संपर्क किया। उसके बाद फर्जीवाड़ा सामने आ गया। तेलीबांधा पुलिस के मुताबिक नोएडा के कारोबारी राजीव शर्मा की दो साल पहले भोपाल में रायपुर के राजेंद्र सेन से मुलाकात हुई। उसके बाद से दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रही। वे मोबाइल से एक-दूसरे के संपर्क में रहे। दो महीना पहले राजेंद्र नोएडा गया और उनसे मुलाकात की। वहां राजेंद्र ने कारोबारी को बताया कि छत्तीसगढ़ के वन मंत्री से अच्छी बनती है। वन विभाग में 26 करोड़ के पौधा सप्लाई का टेंडर जारी होने वाला है। मंत्री ने उन्हें इस काम के लिए ऑफर किया है।

राजेंद्र ने कहा कि उनके कहने पर मंत्री किसी को भी ठेका दे सके हैं। राजीव उसके झांसे में आ गए। उन्होंने अपने दोस्त सुमित्रा इंटरनेशनल के अभिनव कृष्ण अग्रवाल से चर्चा की। उन्हें ठेका लेने के लिए राजी कर लिया। फोन से उनकी बात राजेंद्र से कराई। 16 मार्च को राजेंद्र ने सुरक्षा निधि के तौर पर 5 लाख और पंजीयन कराने के लिए 32 हजार खाते में जमा करने के लिए कहा। अग्रवाल ने उसके खाते में पैसे जमा कर दिए। पैसे जमा करने के बाद राजेंद्र ने फोन करके रायपुर आने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि मंत्री मिलना चाहते हैं। 22 मार्च को ट्रेन बैठकर राजीव शर्मा और अभिनव अग्रवाल रायपुर पहुंच गए।


वन अफसर से बात करने पर सामने आया फर्जीवाड़ा

कारोबारियों ने दो दिनों तक आरोपी राजेंद्र को फोन किया। उसने फोन नहीं रिसीव किया। वाट्स एप पर मैसेज कर दिया कि उसकी सास का देहांत हो गया है। वह बात नहीं कर पाएगा। उसी समय कारोबारी को शंका हुई। उन्होंने दिल्ली में रहते हुए किसी तरह कारोबारी ने पीसीसीएफ पांडे का नंबर पता किया। उनसे सीधे बात की और पौधे सप्लाई के टेंडर की जानकारी दी। पीसीसीएफ पांडे ने किसी तरह के पौधे सप्लाई का टेंडर जारी करने से इनकार कर दिया। यहां तक उन्हें पहचानने से भी इंकार कर दिया। उसके बाद कारोबारी रायपुर आए और पुलिस में शिकायत की।

पहले कहा मंत्री मिलेंगे फिर बदला शेड्यूल
22 मार्च की दोपहर राजेंद्र उनसे मिलने होटल गया। उसने पहले कहा था कि मंत्री उनसे मिलेंगे, मंत्री बंगले जाने के कुछ देर पहले उसने कहा कि मंत्री से मिलने के लिए नहीं जाएंगे, क्योंकि वहां दलाल सक्रिय है। उन्हें भनक लग गई तो ठेका नहीं मिलेगा। होटल में ही मीटिंग की जाएगी। उनसे मिलने के सीसीएफ अरुण पांडे आएंगे, जो मंत्री की ओर से डील करेंगे। रात में उनसे मिलने दो लोग आए। एक ने अपना परिचय सीसीएफ पांडे और दूसरे ने खुद को मंत्री का स्टेनो बताया। ठेके को लेकर उनके बीच बातचीत हुई। जहां एग्रीमेंट साइन कराया गया। आरोपियों ने 3 लाख 60 हजार का चेक मांगा। आरोपियों ने कंपनी के पांच लेटर पेड में साइन और सील लगाकर ले लिया। जाते समय स्टेनो ने भी एक लाख ले लिए। दूसरे दिन कारोबारी दिल्ली चले गए। आरोपियों ने फिर तीन लाख मंगवाए। उसके बाद फाेन उठाना बंद कर दिया।

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