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लग्जरी कारों के शीशे तोड़ चोरी करता था गेैंग, भागते हुए कपड़े बदल देते थे धोखा

कार का शीशा तोड़कर 13 चोरियाें के बाद 14वीं वारदात कर भागते हुए फंसा तमिलनाडु का गिरोहबाज।

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 08:22 AM IST
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ क पुलिस की जांच में खुलासा हुआ क

रायपुर. शहर में लग्जरी कारों के शीशे तोड़कर एक के बाद एक 13 वारदातें करने वाला तामिलनाडू के गिरोह का पर्दाफाश हो गया। पचपेढ़ीनाका में 14वीं वारदात के बाद भागते समय गिरोह का एक सदस्य पकड़ा गया। क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे पकड़ा। उसके बाकी 3 साथियों की तलाश में एक टीम दिल्ली और एक तामिलनाडू भेजी गई है। गिरोहबाज वारदात के बाद सड़क पर चलते-चलते कपड़े बदल लेते थे। इस वजह से उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी।

तामिलनाडु और दिल्ली में चितरी गैंग के नाम से फेमस
पुलिस की अब तक की पूछताछ में पता चला है कि दिल्ली के मदनगिरी का देव स्वामी(19) और उसके साथी करीब दो साल से कार में रखा सामान चोरी करने की वारदातें कर रहे हैं। तामिलनाडु और दिल्ली में उनका गैंग चितरी गिरोह के नाम से जाना जाता है। पिछले साल पहले दो-तीन वारदातें करने के बाद यह गिरोह दो माह पहले दिसंबर फिर बड़ी प्लानिंग के साथ दुर्ग पहुंचा। वहां से बस में सवार होकर रायपुर पहुंचे। राजधानी में सात दिन के भीतर उठाईगिरी की 7 घटनाओं को अंजाम दी। उसके बाद भाग निकले।

सिपाही से टकरा गया आरोपी

इस महीने फरवरी में फिर गिरोहबाज शहर में घुसे। सोमवार को पचपेड़ी नाका में एक प्राइवेट कंपनी के मैनेजर के कार का शीशा तोड़कर बैग चोरी किया। घटना की सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच और थाने की टीम सिविल ड्रेस में आरोपियों को पकड़ने निकली। भीड़भाड़ वाले जगहों पर नजर रखते हुए वहां छानबीन की गई। इसी दौरान क्राइम ब्रांच के एक सिपाही से टिकरापारा के पास से आरोपी देव स्वामी टकरा गया। वह हड़बड़ाया हुआ था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध थी। उसे हिरासत में ले लेकर सख्ती से पूछताछ की गई। उसने उठाईगिरी की घटना कबूल कर ली।

वारदात में चार रहते थे शामिल

- पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह बेहद चालाकी से वारदात काे अंजाम देता था। गिरोह में सभी के काम बंटे हैं। फील्ड में उतरने पर चारों 100 से 50 मीटर की दूरी रखकर आगे-पीछे चलते थे। अभी पुलिस ने जिसे पकड़ा है, वह सबसे आगे चलते हुए रेकी करता था। किसी कार में बैग नजर आने पर वह पीछे आने वाले दूसरे सदस्य को इशारा करता।

- पीछे अाने वाला पूरी तरह से तैयार रहता था। वह किसी भी बहाने कार के पास ठहरता और बड़ी चालाकी से कार का शीशा तोड़ते हुए आगे बढ़ जाता। उसके पीछे तीसरा साथी रहता, जो खतरा भांपते हुए बैग को गाड़ी से निकालता और तेजी से भीड़ भाड़ वाले इलाके में घुस जाता।

- इसी बीच पीछे चल रहा था उसका साथी तेजी से उसके करीब पहुंचकर बैग अपने हाथ में लेता और रास्ता बदलकर आॅटो से बस में बैठकर अपने रास्ते चला जाता था। सबकुछ इतनी तेजी और चालाकी से किया जाता था कि कार जहां खड़ी है वहां आस-पास मौजूद लोगों को भनक तक नहीं होती थी।


टी-शर्ट के ऊपर शर्ट, इसलिए चलते-चलते हो जाते कपड़े बदली : जालसाज पुलिस और लोगों को झांसा देने के लिए टीशर्ट के ऊपर शर्ट पहनकर चलते थे। वारदात के बाद चलते चलते शर्ट उतार देते थे। इस वजह से घटनास्थल पर उन्हें देखकर उनके कपड़ों का रंग पुलिस को बताने पर कोई फर्क नहीं पड़ता था। घटना के बाद ऑटो में बैठकर भागते थे। किसी भी शहर में दो-तीन वारदातें करने के बाद वे शहर छोड़ देते थे। रायपुर में वारदात करने के लिए वे दुर्ग या बेमेतरा में अपना ठिकाना बनाते थे। वे लगातार अपना ठिकाना बदलते रहते थे।


ऐसा औजार कि कांच टूटने की आवाज नहीं आती
ये गिरोह कांच तोड़ने के लिए औजार का उपयोग करता है। उनके पास ऐसा औजार है कि एक बार में कांच टूट जाता और आवाज भी नहीं आती। वे कांच तोड़ने के लिए किसी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं करते। आरोपी घटना के दौरान मोबाइल का उपयोग नहीं करते है। उठाईगिरी में जो भी सामान मिलता है। उसे दिल्ली में बेच देते हैं।

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