--Advertisement--

ये गर्ल्स गांव में घर जाकर पूछती हैं बुजुर्गों की प्रॉब्लम, उन्हें अस्पताल भी ले जाती हैं

गांव के 50 से ज्यादा बुजुर्गों का हेल्थ प्रोफाइल बच्चियों के पास तैयार है।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 06:55 AM IST
गांव के व्यक्ति से बात कर हेल् गांव के व्यक्ति से बात कर हेल्

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 150 किमी दूर गुदुम गांव में चार स्कूली बच्चियों ने गांव के बुजुर्गों की सेहत का ख्याल रखने के लिए अनोखी पहल की है। ये बच्चियां स्कूल की छुट्‌टी होने के बाद गांव में घर-घर जाती हैं। बुजुर्गों से मिलकर उनका हाल-चाल जानती हैं। उनकी सेहत से जुड़ी समस्याएं, दवा, जांच वगैरह की जानकारी लेती हैं। इन सबका डेटा तैयार करती हैं और फिर समय-समय पर इन बुजुर्गों को इलाज के लिए अस्पताल भी ले जाती हैं।

अब इनके साथ स्कूल के 26 और बच्चे जुड़ गए

- गुदुम में नौवीं और दसवीं क्लास में पढ़ने वाली बच्चियों मधु कोठारी, पद्मनी रावटे, यामिनी कुमारे और पद्मनी मारगेंद्र ने दिसंबर में ये काम शुरू किया था। अब इनके साथ स्कूल के 26 और बच्चे जुड़ गए हैं।

- बच्चियों के स्कूल की प्रिंसिपल हेमिन कौशिक बताती हैं कि- ‘बच्चियों ने जब कहा कि वो इस तरह की पहल करना चाहती हैं, तो हैरानी हुई। बच्चों का कहना था कि अपने घरों में भी वो बुजुर्गों का ख्याल रखती हैं। लेकिन कई घर ऐसे हैं, जहां लोग कम पढ़े-लिखे हैं। बुजुर्गों की सेहत के बारे में उन्हें जानकारी नहीं रहती। बच्चियां ऐसे घरों में जाकर मदद करना चाहती थीं।’

गांव के 50 से ज्यादा बुजुर्गों का हेल्थ प्रोफाइल बच्चियों के पास तैयार
स्कूल से भी बच्चियों को पूरी मदद मिलती है। शुरुआत में बच्चियों के साथ स्कूल के टीचर भी घर-घर जाते थे। बच्चियां पता करती हैं कि किसे क्या तकलीफ है, कौन सी दवा चल रही है, कब जांच कराना है और कब दवा खत्म हो रही है। इसका पूरा डेटा तैयार करने में स्कूल के टीचर ही बच्चियों की मदद करते हैं। गांव के 50 से ज्यादा बुजुर्गों का हेल्थ प्रोफाइल बच्चियों के पास तैयार है। यह डेटा बच्चियां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की नर्स मेनका रानी से भी शेयर करने लगी हैं।

शुरू में तो बुजुर्ग भगा देते थे, कहते थे- कुछ नहीं बताना है

पहल से जुड़ी मधु और पद्मनी बताती हैं कि- ‘शुरू में जिसके भी घर जाओ, वहां बुजुर्ग कहते थे- कुछ नहीं बताना। फिर धीरे-धीरे वो समस्याएं साझा करने लगे।’ गांव में ऐसे कई बुजुर्ग हैं, जिनके घर में कोई नहीं है या बच्चे बाहर नौकरी करते हैं, वे कहते हैं कि बच्चियों की वजह से उनको काफी फायदा हुआ है। बच्चों से बात करने में भी कई बुजुर्गों का दिल खुश रहता है।