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मरते दम तक गार्ड बोलता रहा-पहले 4 को मारूंगा, ताबड़ताेड़ गोलियां बरसा मचाया आतंक

गाड़ी रुकवाकर ड्राइवर के साथ गाली-गलौज की फिर बरसाईं गोलियां, पुलिस को माैके पर आने में लगे 3 घंटे।

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 07:15 AM IST
guards continued to die till death

बालोद (रायपुर). 14 वीं बटालियन में पोस्टेड पीएसओ पोखराम लाल चंद्रवंशी स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से कनेरी गुरुर बैगा के पास तांत्रिक से झाड़फूंक करवाने निकला था। जिले से 23 किलोमीटर दूर संबलपुर में अपने होश गवां बैठा और गाड़ी रुकवाकर नीचे उतरा। इस दौरान उसे जो भी मिला उन पर गोलियां बरसा दी। खुद के सिर में गोली मारकर सुसाइड कर लिया। वह जान निकलने तक यही बोलता रहा कि आज चार लोगों को मारूंगा। क्या है पूरा मामला...

- दरअसल, यह पूरा मामला रात एक बजे शुरू हुआ जो सुबह 3.20 तक चलता रहा। गोलियों की आवाज के बाद गांव वाले पुलिस को फोन लगाते रहे। गांव से थाना कुल चार किलोमीटर दूर होने के बावजूद तीन घंटे के बाद पुलिस पहुंची।

- जानकारी के अनुसार पीएसओ जवान पोखराम लाल चंद्रवंशी डोंगरगांव में रात नौ बजे दोस्त शशि सोनी के घर पहुंचा। उसने कहा-मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है-- इलाज के लिए तुरंत ले चलो। शशि सोनी ने इसके बाद लाला महोबिया की बोलेरो बुक की। 9.20 बजे पोषण सोनी, खुशाल सोनी, प्रकाश सोनी, विक्रम सोनी के साथ गुरूर में झाड़-फूंक को रवाना हो गए। रिकॉर्ड खंगालने पर पोखराम के साइको होने की जानकारी मिली।

गाड़ी रुकवा, लोगों के घरों में घुसा और चलाई गोली

- चश्मदीद के मुताबिक, ड्राइवर को गाली दी, कहा रोक गाड़ी और बेकाबू हो गया: डोंगरगांव से 40किमी दूर रात एक बजे जब संबलपुर लोहारा पहुंचे, तो सबसे पीछे सीट पर बैठे जवान पोखराम ने ड्राइवर दीपक रामटेके को गाली दी और कहा- गाड़ी रोको-- और रास्ते में उतरकर पैदल चलने लगा। जब शशि सोनी और पोषण सोनी उसे समझाने लगे और कहा कि गाड़ी में बैठो तो उसने गन लोड कर लिया और फायर कर दिया। हिम्मत करके दोनों उन्हें रोकते हुए आगे बढ़े।

बाथरूम के लिए रात में निकले एक व्यक्ति को गोली मारी, निशाना चूका तो दरवाजा तोड़ घुसा

- रात एक बजे की बात है, मेरे घर मेहमान आए हुए थे, इसलिए देर रात तक घर के सामने बैठे हुए थे। अचानक उस जवान ने हमारी तरफ गन दिखाकर कहा–पहले चार लोगों को मारकर आता हूं फिर तुम तीन को मारूंगा। हम छत पर चढ़ गए।

- पीछे उनके दो साथी ने उसे कहा गांव के लोग देखेंगे, तमाशा मत करो। फिर वह रुक गया और कौन बोलेगा मेरे को--ऐसा कह एक घर में खटखटाने लगा। दूर खड़े हलेश कौशिक को गोली चलाई। हमने भागकर दरवाजा बंद किया।

- उसने दरवाजा तोड़ डाला, इसके बाद दोबारा और गोलियां चलाई। थाना और 108 को फोन लगा रहा था, लेकिन समय पर नहीं पहुंचा। इसके बाद सरपंच पति को फोन किया। तब तक वह दूसरी गली में जा घुसा था।

- दूसरे घर में तीन लोगों को गोलीमार,खुद पर चला ली गोली: मैंने जैसे ही दरवाजा खोला सामने एक व्यक्ति को देखा, जिसने गन मेरे सिर पर टिका दी और बोला चार लोगों को मारना है। जल्दी उठाओ। मैंने घर के सभी लोगों को उठा दिया। सभी लोगों के उठते ही मैं बाहर निकल रहा था। इसी दौरान पहली गोली मुझ पर चलाई। मेरे हाथ व पेट को छूकर गोली निकली।

- इसके बाद मेरी पत्नी के ऊपर गोली चलाई लेकिन मां दशोदा ने उन्हें धक्का दिया, इसलिए गोली मां के हाथ में लग गई। इसके बाद कमर में एक और गोली मार दी। ससुर मोहन हल्बा के पैर में गोली मारी। हम सभी एक कमरे में घुस गए और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया ।

- इसके बाद उसने आंगन में साइकल पटकी और एक कुर्सी लेकर अपने कागजात को छाती के ऊपर रखा और खुद के ऊपर गोली मार ली। मैंने दरवाजा बंद किया और लोगों को बुलाया।

सालभर पहले मलेरिया से ब्रेन इफेक्ट हुआ

- पोखराम के परिजन ने बताया कि वह पहले अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करता था। इसी दौरान उसे मलेरिया और टाइफाइड एक साथ हो गया। जैसे तैसे पोखराम की जान बची थी। तब बीमारी ने उसके दिमाग पर असर डाल दिया था। तभी से उसे खुद के साथ कुछ अनहोनी हो जाने का वहम रहता था। समय बीतने के साथ पोखराम का यह वहम बढ़ता गया और इलाज के लिए वह झाडफूंक का सहारा लेने लगा था।

गांधी बोले- कभी महसूस नहीं हुआ बीमार है

- इधर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दिनेश गांधी ने बताया कि उसे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि पोखराम की दिमागी संतुलन ठीक नहीं है। वह हमेशा सामान्य ढंग से ही डयूटी पर रहता था। घटना वाली रात 9 बजे तक उनके साथ ही मौजूद था। भोजन लेने और डयूटी खत्म करने के बाद वह अपने घर जाने की बात कहकर निकला था। तब उसने चौक पर मौजूद अपने दोस्त पप्पू सोनी को झाड़फूंक के लिए जाने की बात कही।

- पहले न कभी कार्रवाई हुई, न मानसिक बीमारी ली लेता था दवा : बीते 8 साल से दिनेश गांधी का पीएसओ था, वह मूल रूप से छुरिया ब्लाॅक के बछेराभाठा का रहने वाला है। इसके पूर्व वह शहर के बटालियन मुख्यालय में पदस्थ था। लेकिन तब से अब तक पोखराम पर किसी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई थी। पुलिस के रिकाॅर्ड में पोखराम की छवि साफ-सुथरी और सुलझे हुए जवान की है। उसने मानसिक तनाव को खत्म करने या ऐसी बीमारी को लेकर किसी तरह की दवा भी कभी नहीं ली थी।

गोली लगने के बाद तड़पता रहा लेकिन कुछ नहीं बता पाया

- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब 18 मिनट में पोखराम ने गांव में पूरी वारदात को अंजाम दे दिया था। मौत से पहले तड़पते पोखराम से ग्रामीण घटना की वजह पूछने का भी प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ बोलने से पहले ही पोखराम ने दम तोड़ दिया।

लग रहा मानसिक रूप से बीमार था

- पुलिस के मुताबिक, उनके पिता लखनलाल ने अपने बयान में कहा है कि वह बीमार था। उसे एक बार बीमार पड़ने पर एडमिट कराया गया था।

- पिता के बयान के बाद लग रहा है कि वह मानसिक बीमार था। डौंडीलोहारा थाने का लैंडलाइन खराब है। इसलिए नहीं उठाए होंगे। सुबह 3 बजे हमें इस घटना की सूचना मिल गई।

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