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40 KG एक्सप्लोसिव झेल सकता है एंटी लैंडमाइन व्हीकल, नक्सलियों ने 4 गुना ज्यादा किया इस्तेमाल

कोर एरिया पलौदी में कैंप खुलने से बेचैन नक्सली 3 महीने से ताक में थे, फोर्स को डिगाने के लिए किया यह हमला।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 06:00 AM IST
विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि एं विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि एं

जगदलपुर(छत्तीसगढ़). सरकार ने फोर्स के जवानों को 2005-06 में माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल दिए थे, लेकिन ये व्हीकल भी जवानों को नहीं बचा पा रहे हैं। जवानों को सरकार ने जो माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल मुहैया कराया है, वह 40 से 60 किलो तक के आईईडी झेल सकता है, लेकिन नक्सलियों ने इसस से चार गुना एक्सप्लाेसिव का इस्तेमाल कर उड़ा दिया था। जिसका नतीजा है कि आज सुकमा के पलौदी गांव के करीब मंगलवार दोपहर नक्सलियों ने बारूदी विस्फोट कर नौ जवानों को शहीद कर दिया। विस्फोट इतना जबर्जस्त था कि विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि एंटी लैंडमाइन व्हीकल सड़क से दूर जा गिरा। जवानों के शव भी 50 मीटर दूर तक गिरे।

एक क्विंटल 40 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने का अनुमान

- सीआरपीएफ 212वीं बटालियन के 200 से ज्यादा जवान पांच टीमों में बंटकर किस्टाराम से पलौदी के लिए निकले। चार टीमों ने जंगल का रास्ता अपनाया तो एक टीम बाइक से सड़क पर चलने लगी।
- जवान सुबह 7.35 बजे जब किस्टाराम कैंप से 3 किमी दूर नदी किनारे पहुंचे तो नक्सलियों ने जवानों को घेर लिया। इसके बाद नक्सलियों ने फायरिंग की, लेकिन जवानों ने नक्सलियों के एंबुश तोड़ दिया।
- यह टीम वापस किस्टाराम कैंप लौट आई। मौके से एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद जवान दोबारा कैंप से पलौदी के लिए निकले। इस बार जवान एमपीवी भी साथ ले गए। कैंप से कुछ दूर 12.15 बजे नक्सलियों ने टनों वजनी माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल को बलास्ट कर उड़ा दिया। वाहन को उड़ाने के लिए लगभग एक क्विंटल 40 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है। जबकि, वाहन 60 किलो विस्फोटक ही सह सकता है।

यूबीजीएल के तीनों गोले फूटे नहीं, वरना मारे जाते नक्सली
जवानों ने किस्टाराम में सुबह-सुबह ही नदी के किनारे नक्सलियों को देख लिया था। जवानों ने तुरंत ही एक के बाद एक तीन यूबीजीएल के गोले नक्सलियों पर दागे लेकिन एक भी नहीं फूटा। यदि इनमें से एक भी गोला फूट गया होता तो आधे नक्सली मौके पर ही मारे जाते। अगर तीनों गोले फूट गए होते तो सौ की संख्या में आए सभी नक्सली मारे जाते।

क्या होता है यूबीजीएल?

यूबीजीएल 25 सेमी लंबा लांचर है, जो एके 47 और इंसास राइफल से दागा जाता है। इससे एक मिनट में 5 से 7 गोले 400 मीटर की दूरी तक निशाना साधकर दागे जा सकते हैं। करीब डेढ़ किलो वजनी इस गोले से जंगलों में छिपे या पहाड़ियों पर मौजूद दुश्मनों को निशाना बनाया जा सकता है। यह जहां गिरता है, वहां 8 मीटर तक के दायरे को तहस-नहस कर देता है।

नक्सलियों ने 10 साल पहले बस्तर में निकाल लिया था तोड़

- नक्सलियों ने इसका तोड़ दस साल पहले बस्तर में एमपीव्ही को तैनात किए जाने के सातवें दिन ही निकाल लिया था और इसे विस्फोट कर उड़ा दिया था। इससे पहले नक्सलियों ने बीजापुर में माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल पर निशाना साधा था, जिसमें सात जवानों की मौत हुई थी।

- 2013 में बचेली के पास नक्सलियों ने निशाना बनाया था। उस समय गाड़ी में 14 जवान सवार थे। बताया जा रहा है कि उस समय 25 किलो के विस्फोटक के इस्तेमाल होने के कारण गाड़ी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।

- इससे पहले 2011 में दंतेवाड़ा के गाटम में एमपीव्ही पर नक्सली हमले में दस जवान शहीद हो गए थे, जिसमें 8 एसपीओ शामिल थे।

- एमपीव्ही को उड़ाने का तोड़ नक्सलियों ने बस्तर से ही ढूंढा था और फिर इसका प्रयोग करते हुए 2012 में झारखंड के गढ़वा एमपीव्ही को उड़ाकर 13 जवानों को शहीद कर दिया था।

जवान मजबूरी में इसमें सवार हो रहे है
छत्तीसगढ़ में नक्सल आपरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो नक्सल प्रभावित जिलों में अभी 20 से ज्यादा माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह गाड़ी पिछले 10 साल से नक्सल मोर्चे पर तैनात है। इनका उपयोग जवान नक्सलियों की गोली से बचने के रूप में कर रहे हैं। जवानों को भी पता है कि ज्यादा मात्रा में बारूद का उपयोग कर नक्सली इसे उड़ा सकते हैं लेकिन जवान मजबूरी में इसमें सवार हो रहे है।

क्षमता से ज्यादा विस्फोटक से नुकसान हो जाता है

सीआरपीएफ आईजी संजय कुमार अरोरा के मुताबिक, एमपीव्ही जवानों के लिए कापी मददगार साबित होता है लेकिन कई बार इसकी क्षमता से ज्यादा विस्फोटक का इस्तेमाल होने से इससे नुकसान भी हो जाता है। इसे ऐसे समझें कि एक जवान ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी है और 200 मीटर दूर से गोली चलेगी तो जवान घायल भी नहीं होगा लेकिन 5 मीटर की दूरी से चलने पर बड़ा बुलेट प्रूफ जैकेट में भी जवान को बड़ा नुकसान होगा।