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10 साल पहले यहां होती थी सिर्फ खेती, अब कई स्टेट्स में जाती है यहां की फिश

बांग्लादेश से विस्थापित 52 घरों वाले परलकोट के गांव पीवी 122 में हैं 250 तालाब, मछली उत्पादन का टर्न ओवर 250 करोड़ रुपए।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 09:04 AM IST
पहली बार एक फ्रेम में देखिए यहां के 60 से ज्यादा तालाबों की तस्वीर पहली बार एक फ्रेम में देखिए यहां के 60 से ज्यादा तालाबों की तस्वीर

कांकेर(छत्तीसगढ़). ये तस्वीर है परलकोट के छोटे से गांव पीवी 122 की, इसमें एकसाथ दिख रही है तालाबों की शृंखला। गांव में बांग्लादेश से विस्थापितों के कुल 52 घर हैं, लेकिन तालाब 250 से अधिक हैं। यहां मछली उत्पादन का टर्न ओवर करीब 250 करोड़ रुपए है। 10 साल पहले यहां पारंपरिक रूप से धान की ही खेती होती थी। लेकिन बंगाल के छोटे से गांव बागदा से यहां मजदूरी करने आए विद्युत मंडल ने क्षेत्र की कायापलट कर दी। विद्युत ने यहां सबसे पहले तालाब किराए पर लेकर मछली उत्पादन शुरू किया, ग्रामीणों को भी सिखाया। आज परलकोट के 133 गांवों में 5000 से अधिक तालाब हैं, 15 हजार लोग इससे जुड़े हैं। आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र से मछली आयात करने वाला पखांजूर आज छत्तीसगढ़ ही नहीं महाराष्ट्र-ओडिशा तक मछली सप्लाई कर रहा है।

मछली उत्पादन से आई आर्थिक क्रांति ऐसे समझें

विशेषज्ञों के अनुसार अंचल में धान उत्पादन करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपए तक फायदा होता है, मक्का फसल पर प्रति एकड़ फायदा 30 हजार। वहीं मछली उत्पादन करने पर प्रति एकड़ 3 लाख रुपए तक का लाभ होता है।

कक्षा तीन तक पढ़े विद्युत लाए क्षेत्र में आर्थिक क्रांति

मैं कक्षा 3 तक पढ़ा हूं। पैतृक गांव बागदा डूबान क्षेत्र में आता है। मजदूरी करने रिश्तेदार के कहने पर यहां आया। कुछ समय बाद लौट गया, लेकिन फिर वापस आया। यहां परवल-खेक्सी की पैदावार नहीं होती थी। मैं दोनों की जड़ लाया था, किराए पर खेत लेकर इनकी फसल लगाई। पैसे आए तो तालाब किराए पर लिया। 18 वर्ष पूर्व किसी ने तालाब में एंडोसील नामक कीटनाशक डाल दिया, सारी मछलियां मर गईं। मैं बर्बाद हो गया। दिल्ली तक सैंपल जांच के लिए गए। इसके बाद देश में एंडोसील प्रतिबंधित हो गया। मैं फिर जुट गया, आज मेरे पास 40 तालाब हैं। मैंने विशेषज्ञ से 5 लाख रुपए (फ्लाइट और ठहरने का खर्च अलग) में अनुबंध किया है। डॉक्टर साल में तीन माह के सीजन के दौरान यहां आता है और मछली बीज तैयार करता है।''-विद्युत मंडल, मछली उत्पादक

फोटो-विकास गुप्ता।

कक्षा तीन तक पढ़े विद्युत लाए क्षेत्र में आर्थिक क्रांति। कक्षा तीन तक पढ़े विद्युत लाए क्षेत्र में आर्थिक क्रांति।