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ये युवा घर-घर घूमकर इकट्ठे करते हैं पुराने कपड़े, फिर गांवों में जाकर देते हैं बांट

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 08:47 AM IST

कपड़ों की छटनी कर गांव-गांव जाकर गरीबों से मिलकर उन्हें कपड़े बांट रहे युवा।

बारसूर के युवा घूमकर पुराने कप बारसूर के युवा घूमकर पुराने कप

दंतेवाड़ा. गरीबों को तन ढंकने कपड़े देने बारसूर के युवाओं ने एक नई शुरुआत की है। यहां के दस युवाओं ने मिलकर अपना एक फाउंडेशन तैयार किया है। इन युवाओं ने पहले घर-घर घूमकर पुराने कपड़े इकट्ठे किए, इसके बाद अब गांव-गांव घूम गरीबों को कपड़े बांट रहे हैं। इन युवाओं ने बारसूर के अंदरूनी गांव कोरकोटी, रेका के अलावा इंद्रावती नदी पार के गांव तुमरीगुंडा, चेरपाल, हांदावाड़ा में भी पहुंच गरीबों तक कपड़े पहुंचाए हैं।

कपड़े लेने की होड़ लगा रहे हैं बच्चे व बुजुर्ग

- जैसे ही युवाओं का दल गांव में कपड़े लेकर पहुंच रहा है, बच्चे व बुजुर्ग इन कपड़ों की छंटनी कर सर्वश्रेष्ठ कपड़े लेने की होड़ लगा रहे हैं। फाउंडेशन की सदस्य माधुरी उइके ने बताया कि ज्यादातर लोग अपने अनुपयोगी कपड़ों को फेंक देते हैं या घर पर ही व्यर्थ पड़े रहते हैं।

- ये अनुपयोगी कपड़े गरीबों के तन ढंकने के काम आएं, इसलिए हमने पहले वस्त्र एकत्र करने के लिए अभियान चलाया। इसके लिए गीदम, बारसूर में वृहद स्तर पर काम किया। इसके बाद कपड़ों की छटनी की और अब गांव-गांव जाकर गरीबों से मिलकर उन्हें कपड़े बांट रहे हैं। युवाओं के इस दल में आकांक्षा, अमित, ललित, नितेश, निधि व कल्पना भी शामिल हैं।


लगातार चलता रहेगा काम
युवाओं ने बताया कि यह काम अब आगे भी चलता रहेगा। पुराने कपड़े एकत्रित किए हैं, फिलहाल इसे बांटने का काम चल रहा है। यह काम अब लगातार चलता रहेगा।

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बारसूर के युवा घूमकर पुराने कपबारसूर के युवा घूमकर पुराने कप
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