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PHD घोटाला: रजिस्ट्रेशन से लेकर हर मौके पर UGC के नियमों की खुलकर अनदेखी

शुरुआती जांच में 68 रजिस्ट्रेशन रद्द न होते, तो दागी पीएचडी 294 हो जातीं

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 09:07 AM IST
inside stroy of phd scam

रायपुर. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के 226 पीएचडी अवार्ड में लगी रोक के बाद अब यह खुलासा हुआ है कि इस विवि ने पीएचडी के लिए 226 से कहीं ज्यादा संख्या में रिसर्चर्स का पंजीयन कर लिया था। दो साल पहले यहां की पीएचडी में पहली दफा कुलाधिपति को गड़बड़ी का शक हुअा था। ठीक उसी समय गुपचुप तरीके से 68 का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया था। अगर इनका रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं होता तो दागी पीएचडी की संख्या 294 हो सकती थी।

इस पूरे मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ओपन यूनिवर्सिटी ने यूजीसी के अधिनियम में संशोधन के बाद भी पुराने अधिनियम के तहत पीएचडी के लिए रिसर्चर्स का रजिस्ट्रेशन किया था। यह सिलसिला लगातार चला और पीएचडी के लिए करीब 294 लोगों ने पंजीयन करवा लिए।

यह संशोधन देशभर के सभी विश्वविद्यालयों को रेगुलेट करनी वाली संस्था यूजीसी द्वारा किया गया था। पर विवि ने हायर बॉडी के नियमों को भी दरकिनार किया गया। तब विवि के लोग ही इससे असहमत थे। उन्होंने गड़बड़ी रोकने के लिए कुलाधिपति कार्यालय में शिकायत की थी। इस आधार पर जब कुलाधिपति ने प्रारंभिक जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इनसे गड़बड़ियों की पुष्टि हो रही थी।

भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जिन नियमों का पालन विवि प्रशासन को करना था, उसने नहीं किया था। इस वजह से कुलाधिपति कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा है। नतीजतन विवि ने बड़े पैमाने पर मामला फूटने से पहले 294 में से 68 लोगों के पंजीयन रद्द किए और 2 से 3 के रिसर्च को रिजेक्ट भी किया गया। इसके अलावा 2-3 रिसर्च के रिवीजन के आदेश ही जारी कर दिए गए।

इसी विवि में इतनी पीएचडी क्यों?

मामले के खुलासे के बाद अब यह सवाल यह उठ रहा है कि एक ही विवि में पीएचडी के लिए इतने अधिक पंजीयन क्यों करवाए गए? उल्लेखनीय है कि प्रदेश में ट्रेडिशनल कोर्सेस के कुल छह सरकारी विश्वविद्यालय हैं। इनमें रविशंकर विवि रायपुर, पत्रकारिता विवि रायपुर, बस्तर विवि, दुर्ग विवि, बिलासपुर विवि ,सरगुजा विवि के साथ ओपन विवि भी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश 2009 के पहले से ही यहां हैं।

पं. शर्मा ओपन विवि यहां 2005 में शुरू हुआ था। इसके बावजूद, पीएचडी के लिए रिसर्चर्स की पहली पसंद यह विश्वविद्यालय ही रहा। इस विवि के जरिए पीएचडी को लेकर पंजीयन की होड़ के पीछे भी कई तरह की बातें चल रही हैं। कुछ मुद्दों पर पहले भी कुलाधिपति कार्यालय उंगली उठा चुका है।

विवि प्रशासन का मानना है कि ओपन विवि, पीएचडी के पर्याप्त गाइड उपलब्ध करता है, जबकि अन्य विवि में रिसर्चर्स के लिए गाइड सबसे बड़ी समस्या है। इसीलिए इस विवि में पंजीयन अधिक हुए हैं।

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