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कभी इन नक्सलियों की इलाके में थी दहशत, अब इस टैलेंट से करेंगे पुलिस की मदद

बस्तर के 11 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 12:20 AM IST
पीटीएस में जवानों को कड़ी ट्रनिंग देने के अलावा विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जा रहा है। पीटीएस में जवानों को कड़ी ट्रनिंग देने के अलावा विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जा रहा है।

रायपुर. कभी जिन नक्सलियों की बस्तर में दहशत थी अब वे पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों से लड़ेंगे। राजनांदगांव के पीटीएस ट्रेनिंग कैम्प में इन्हें नक्सलियों से लड़ने को ट्रेनिंग दी जा रही है। ये नक्सली गोरिल्ला वार से लेकर एंबुश लगाए जाने की प्रोसेस को अच्छी तरह जानते हैं। बता दें कि इन नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था।

नक्सली इलाकों में होगी पोस्टिंग

- पीटीएस में तैयार किए जा रहे 11 जवानों की पोस्टिंग मार्च के बाद नक्सली इलाकों में होगी। ये नक्सलियों के साथ रहकर उनकी प्लानिंग को जानते है, इसलिए उम्मीद है कि ये नक्सलियों से लड़ पाएंगे। इस ट्रेनिंग के बाद आने वाले समय में इन्हें दो महीने की जंगल में लड़ने की ट्रेंनिग भी दी जाएंगी।

- पीटीएस में इन्हें नौ महीने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जो मार्च में पूरी हो जाएगी। नक्सल एक्टिवीज को बढ़ता देख अब ट्रेनिंग भी तेज हो गया है। बेसिक कोर्स के साथ ही फिटनेस और जंगल के हिसाब से रस्सा, बीम, ऑप्टिकल, फ्रंट रोल के अलावा हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है।

- इन जवानों को 10 की जगह 20 किमी की रनिंग कराई जा रही है। 50 डिप्स और पुशअप लगवाए जा रहे हैं। पीटीएस में 354 जवानों को तैयार किया जा रहा है, इनमें से 80 प्रतिशत बस्तर के जवान हैं।

नहीं लौटा तो भाई की कर दी हत्या
- यहां ट्रेनिंग ले रहे तूर सिंह ध्रुव कांकेर के रहने वाले हैं। सरेंडर के बाद घर वापसी के लिए बार-बार नक्सलियों ने कई दबाव बनाया गया। बड़ा भाई फूलसिंह भी पुलिस में है। दो दिसंबर को ही नक्सलियों ने उनके छोटे भाई ढेलूराम ध्रुव को मार डाला ।

- पीटीएस के एसपी बीएल मनहर ने बताया कि नक्सल मूवमेंट बढ़ने की वजह से जावानों की ट्रेनिंग हार्ड कर दी गई है। मार्च में पासआउट के बाद इनकी पोस्टिंग बस्तर क्षेत्र में की जाएगी। पहले में जंगल में रहने का अनुभव अब पुलिस के काम आएगा।

- सुकमा के रहने वाले 45 साल के सुभाष कोमरे गोरिल्ला वार के साथ निशानेबाजी में एक्सपर्ट हैं। ये बताते हैं कि 1993 से 2014 तक डीवीसी मेंबर रहे। पांचवीं क्लास में थे, तब नक्सली इन्हें साथ ले गए। उनकी पत्नी समबती भी नक्सली थीं। 2014 में सरेंडर किया।

एंबुश की प्लानिंग से लेकर जानकारी निकालने का हैं नॉलेज
- सुकमा के एतरानपार के रहने वाले 30 साल के लोकेश कर्मा वर्ष 2001 से 2009 तक नक्सलियों के साथ रहे। वे एंबुश की प्लानिंग से लेकर सूचना जोड़ना, रैकी करना,भर्ती कराने का काम करते थे। ट्रेनिंग से ये मजबूत हो रहे हैं।

- कोंडागांव के साल के अजय बघेल 2009 से एक साल तक नक्सलियों के मददगार रहे। नवंबर 2013 को मुठभेड़ में उनके दोनों पांवों में गोली लगी पर हार नहीं मानी। 2015 में उन्होंने मुठभेड़ में एलओएस कमांडर को मार गिराया।

- कमकानार मंगालूर क्षेत्र के 27 वर्षीय गोपाल गुड्‌डू डिवीजन एक्शन कमांडर रहे। 2006 से 2011 तक वे नक्सल धारा में रहे। भाई की हत्या की वजह से वे इस गलत राह पर चले गए थे।

दुश्मन को खत्म करने हर बाधा पार करना सीख रहे। दुश्मन को खत्म करने हर बाधा पार करना सीख रहे।
मंगालूर के 27 साल गोपाल गुड्‌डू डिवीजन एक्शन कमांडर रहे। मंगालूर के 27 साल गोपाल गुड्‌डू डिवीजन एक्शन कमांडर रहे।
सुकमा के एतरानपार के रहने वाले 30 साल के लोकेश कर्मा साल 2001 से 2009 तक नक्सलियों के साथ रहे। सुकमा के एतरानपार के रहने वाले 30 साल के लोकेश कर्मा साल 2001 से 2009 तक नक्सलियों के साथ रहे।
नक्सली रहे सुभाष कोमरे। नक्सली रहे सुभाष कोमरे।
कोंडागांव के अजय बघेल 2009 से एक साल तक नक्सलियों के मददगार रहे। कोंडागांव के अजय बघेल 2009 से एक साल तक नक्सलियों के मददगार रहे।
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पीटीएस में जवानों को कड़ी ट्रनिंग देने के अलावा विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जा रहा है।पीटीएस में जवानों को कड़ी ट्रनिंग देने के अलावा विपरीत परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जा रहा है।
दुश्मन को खत्म करने हर बाधा पार करना सीख रहे।दुश्मन को खत्म करने हर बाधा पार करना सीख रहे।
मंगालूर के 27 साल गोपाल गुड्‌डू डिवीजन एक्शन कमांडर रहे।मंगालूर के 27 साल गोपाल गुड्‌डू डिवीजन एक्शन कमांडर रहे।
सुकमा के एतरानपार के रहने वाले 30 साल के लोकेश कर्मा साल 2001 से 2009 तक नक्सलियों के साथ रहे।सुकमा के एतरानपार के रहने वाले 30 साल के लोकेश कर्मा साल 2001 से 2009 तक नक्सलियों के साथ रहे।
नक्सली रहे सुभाष कोमरे।नक्सली रहे सुभाष कोमरे।
कोंडागांव के अजय बघेल 2009 से एक साल तक नक्सलियों के मददगार रहे।कोंडागांव के अजय बघेल 2009 से एक साल तक नक्सलियों के मददगार रहे।
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