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दो वक्त पेट भरने की मजबूरी, रोज 200 फीट गहराई में उतर पत्थर तोड़ते हैं 400 लोग

परिवार चलाने के लिए रोजाना इस तरह ही खतरा मोल लेते हुए खदानों में पत्थर तोड़ते हैं।

भूपेश केशरवानी | Last Modified - Jan 24, 2018, 09:20 AM IST

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    रायपुर.दो वक्त की रोटी के लिए एक-दो नहीं बल्कि पूरे 400 मजदूर जान जोखिम में डालकर गिट्टी खदान में काम करते हैं। ये तस्वीर है रायपुर से 42 किलोमीटर दूर धरसींवा के बंगोली, मुरा और रायखेरा की खदानों की। ये अपना परिवार चलाने के लिए रोजाना इस तरह ही खतरा मोल लेते हुए खदानों में पत्थर तोड़ते हैं। खदान में उतरने के लिए रास्ता नहीं है, ऐसे में ये पहाड़ को ही कुछ इस तरह तोड़ते हैं कि आने-जाने का रास्ता बन जाए। इस इलाके में ऐसी 40 खदानें हैं, जहां रोजाना जीवन का ऐसा संघर्ष देखा जा सकता है। खदानों में सुरक्षा के नाम पर संसाधन की कमी है, जान जोखिम में डालकर मजदूर लगे रहते हैं।

    ऊपर से चींटियों की तरह दिखाई देते हैं मजदूर

    गिट्टी खदानों में काम करने वाले मजदूर इसी खतरनाक रास्ते से आना-जाना करते हैं। रास्ता ऐसा कि आम आदमी चढ़ने-उतरने से कतराए या हादसे का शिकार हो जाए। इन खदानों की गहराई 150 से 200 फीट है।

    इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नीचे काम करने वाले मजदूर ऊपर से चींटियों की तरह दिखाई देते हैं। खदान में काम रहे रमेश ने बताया कि यहां कुछ फीट खुदाई कर बारूद भरकर ब्लास्ट किया जाता है। ब्लास्ट से निकले बड़े पत्थरों को हथौड़े और घन से तोड़ते हैं। दिनभर काम करने के एवज में उन्हें मजदूरी 200 से 250 रुपए मिलते हैं। यहां सात गांव के लोग काम करने आते हैं।

    मजदूरों को हादसे के साथ बीमारी का जोखिम

    पत्थर -गिट्‌टी खदान में काम करने वाले अधिकतर मजदूरों को सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित होने की आशंका रहती है। राजधानी के कुछ डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण टीबी की तरह दिखाई देते हैं। इसके अलावा मजदूरों काे सांस की बीमारी लंबे समय तक रहती है।

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Web Title: Labouring After Taking Life Risk
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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