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मोतियाबिंद अॉपरेशन कांड : 30 मरीजों की रोशनी छीनने वाले अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड

घटना के बाद ड्रग विभाग ने 23 ऐसी दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल भेजे हैं, जिसका उपयोग इन मरीजों के लिए किया गया था।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 05:37 AM IST

राजनांदगांव. क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में 30 मरीजों की आंखों की रोशनी जाने के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। यहां ऑपरेशन के पहले और बाद में उपयोग की जाने वाली कई दवाएं ब्रांडेड ही नहीं थी। घटना के बाद ड्रग विभाग ने 23 ऐसी दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल भेजे हैं, जिसका उपयोग इन मरीजों के लिए किया गया था। जबकि कायदे से प्राइवेट नर्सिंग होम में प्रयुक्त की जाने वाली दवाओं का सैंपल विभाग को रूटीन में लेना है। यहां भी एक तरह से लापरवाही बरती गई। समय रहते सैंपल लेते तो यह घटना नहीं होती।


क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में 30 मरीजों की आंखों की रोशनी जाने के मामले में जिला प्रशासन ने छह माह के लिए अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। यहां प्रोटोकॉल का पालन नहीं करना पाया गया। वहीं दूसरी ओर सस्ती दवाओं की सप्लाई भी करवाई गई है। जबकि ऐसे ऑपरेशन में ब्रांडेड दवाओं का ही उपयोग किया जाता है। जबकि इन मरीजों को ऑपरेशन के अगले दिन ही घर रवाना कर दिया गया। जबकि स्मार्ट कार्ड से उपचार के मामले में मरीज को तीन दिन तक अस्पताल में रखना होता है। यहां जिन दवाओं को मरीजों को दिया गया था उनमें तीन को छोड़ दें तो बाकी कंपनियां ब्रांडेड नहीं है।

ड्रग विभाग क्या करता रहा

मामले में ड्रग विभाग की भी भूमिका संदिग्ध है। कायदे से प्राइवेट नर्सिंग होम में दवाओं की सप्लाई के दौरान सैंपल लेने और उनकी जांच का जिम्मा ड्रग विभाग का है। जबकि विभाग की ओर से इन दवाओं का सैंपल लिया ही नहीं गया है। जब घटना का खुलासा हुआ तब जाकर उन्होंने 23 प्रकार के ड्रग का सैंपल लिया और राज्य की प्रयोग शाला रायपुर सहित सेंट्रल लैब कोलकाता में जांच के लिए भेजा। मामले में उपसंचालक ड्रग संजय झाड़ेकर का कहना है कि सभी दवाओं का सैंपल लेकर जांच कराना संभव नहीं है। गलत फीडबैक मिलने और डाउटफुल मामलों के अलावा वे रैंडमली सैंपल लेते हैं।

लैब की रिपोर्ट से होगा खुलासा
अंधतत्व निवारण के स्टेट नोडल अफसर डॉ.सुभाष मिश्रा का कहना है कि यहां तीनों प्रकार की दवाओं का उपयोग किया गया है। एक वे दवाएं जो स्टैंडर्ड बाय यूज, दूसरा बाय टेस्ट और तीसरा स्टैंडर्ड बाय कास्ट। उपयोग के हिसाब से मानक, टेस्ट रिपोर्ट अच्छी आने पर मानक और तीसरे में सस्ती दवाएं शामिल हैं। अब लैब की रिपोर्ट आने के बाद यह तय हो जाएगा कि लापरवाही कहां हुई है। कौन सी दवाओं में फॉल्ट आया है। हालांकि इन दवाओं की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। वहीं फॉलोअप के लिए 10 मरीजों को बुलाया गया था। अन्य को भी आज-कल में बुलाया जाएगा।

दवाओं की सप्लाई पर रोक: इधर विभाग की ओर से इन दवाओं की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। अफसरों की मानें तो इसकी सप्लाई रायपुर से ही हुई है। वहां की कंपनियों को सख्त आदेश दिया गया है कि इनकी सप्लाई फिलहाल न की जाए। लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही सप्लाई को बहाल किया जाएगा। जबकि यह काम विभाग को पहले ही कर लेना था।

इन दवाओं का भेजा सैंपल: ट्रॉपी, प्रेड्स, ट्रॉपी प्लस, सिलोस आईट्रॉप, ओएफएल एमबी, एवी मॉक्स पीडी, एड्रोपिन, फैसटीव जैसे ड्रॉप का सैंपल जांच के लिए भेजा है। जबकि इंजेक्शन में एड्रेलेब, एट्रोबॉक, लाक्स, एमबी जेंटा, एमबी डेक्सा, ब्यूपीवा कैन सहित टैबलेट न्यूलैब एक्टीव, लुसीप्रो व इक्वामाल के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है।

तीन कंपनियां छोड़ दें तो बाकी सस्ती दवाएं: लैबोरेट, मारटीन एंड ब्रोन, केयर विजन, फारमाटैक, अप्पासामी, वॉक आरडीटी, निओन, लूपिन, मेडली, अल्बर्ट डेविड, बायोविजन जैसी कंपनियों की दवाएं और इंजेक्शन की सप्लाई हुई थी। बताया गया कि लूपिन, केयर विजन और वॉक आरडीटी को छोड़ दें तो बाकी कंपनियां नामी नहीं हैं। ये लोकल दवाएं मानी जाती हैं।

रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे

सीएमएचओ डॉक्टर मिथलेश चौधरी ने बताया कि मामले में जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा दवाओं और इंजेक्शन की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।