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कांग्रेस नेता के घर दिनदहाड़े 4 नक्सलियों का हमला, गार्ड से एके-47 छीन ले गए

नकुलनार में आठ साल में चौथी बार एक ही व्यक्ति को बनाया दिनदहाड़े निशाना

Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 09:00 AM IST
हमले की जानकारी देते कांग्रेस हमले की जानकारी देते कांग्रेस

नकुलनार(छत्तीसगढ़). नक्सलियों ने शनिवार को पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पीपीसी मेंबर अवधेश गौतम को निशाना बनाया। 8 साल में ये उनपर चौथा हमला है। हमले में अवधेश गौतम तो बच गए लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात aजवान विद्याराम मरकाम घायल हो गए। जेड सुरक्षा का घेरा तोड़कर घुसे नक्सली एक जवान से एके-47 छीन ले गए। हमले के वक्त सुरक्षा में लगे 18 जवानों में से कुछ बाजार घूमने गए थे, तो कुछ छत पर खाना बना रहे थे। नकुलनार के साप्ताहिक बाजार और उसमें आने वाली भीड़ का फायदा उठाते हुए नक्सलियों की स्मॉल एक्शन टीम के 4 सदस्याें ने दोपहर करीब 12.30 बजे अवधेश के घर पर धावा बोला।

कुत्ते के हमला करने से भागे नक्सली

अवधेश उस समय परिवार के साथ घर पर ही थे। वारदात को अंजाम देने के लिए नक्सलियों ने मेनगेट पर मौजूद सुरक्षा गार्ड पर धारदार हथियार से हमला कर उसे घायल कर दिया। इसके बाद वे अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। लेकिन तभी गौतम के पालतू जर्मन शेफर्ड कुत्ते ने नक्सलियों पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से नक्सली घबरा गए और भागने लगे। जाते-जाते वे सुरक्षा गार्ड से एके-47 छीनकर ले गए। एसपी कमलोचन कश्यप ने बताया कि नक्सली जिस रास्ते से हथियार लेकर भागे हैं, उस पर जवानों को भेजा गया है।


बेटी को मिला था वीरता पुरस्कार
दंतेवाड़ा के पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पीपीसी मेंबर अवधेश सिंह गौतम के ऊपर नक्सलियों ने पहली बार हमला नहीं किया है। 7 वर्ष पूर्व भी उन पर हमला हुआ था। नक्सली उनके घर में घुस गए थे और मारपीट की थी। तब नक्सलियों ने उनके घर में हैंड ग्रेनेड फेंके थे, इससे मकान में आग लग गई थी। धमाके की आवाज सुन उनका 12 साल का बेटा अभिजीत पलंग के नीचे छिप गया था। नक्सलियों ने खींचकर बाहर निकाला और पैर में गोली मार दी। इसके बाद अवधेश की बेटी अंजली ने घायल भाई को कंधे पर रखकर दौड़ते हुए 500 मीटर दूर अपने मामा के घर ले गई, फिर पुलिस को सूचना दी। तब जाकर उसकी जान बच पाई। इस साहसी काम के लिए अंजली को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार, राज्य वीरता पुरस्कार और जीवन रक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अभी अंजली फर्स्ट ईयर में है, भाई 12वीं में है।

नक्सलियों ने हमले के लिए चुना ड्यूटी शिफ्टिंग का समय

अवधेश गौतम की जेड सुरक्षा में करीब 18 जवान तैनात हैं। 6 पीएसओ सीफ से, 12 जिला बल के जवान हैं। ज्यादातर के पास एक-47 और इंसास है। घटना जब हुई वह ड्यूटी शिफ्टिंग का समय था। घटना के दौरान ड्यूटी शिफ्टिंग के लिए तीन जवान छत पर जाने के लिए निकले, दो आगे बढ़े जबकि तीसरा नीचे था। आगे के दोनों जवान जैसे ही छत पर चढ़े, नक्सलियों ने नीचे वाले जवान को पकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले के लिए जवान तैयार नहीं थे। नतीजतन नक्सली हथियार लूट ले गए।

इस बार हमला करने आई स्मॉल एक्शन टीम
2008 : नक्सलियों ने एके-47 से अवधेश पर हमला किया। वे बाल-बाल बचे।
2010 : घर पर धावा बोला, उनके साले और नौकर की जान चली गई।
2013 : परिवर्तन यात्रा में उनकी गाड़ी पर गोलीबारी की, लेकिन वे बच निकले।
2018 : 4 सदस्यीय स्मॉल एक्शन टीम ने घर पर हमला किया, लेकिन डॉग के कारण अंदर नहीं घुस पाए।

सवाल जिनकी जांच जरूरी है:

- नक्सलियों को पता था अवधेश को जेड सुरक्षा मिली है, फिर भी वे यहां क्यों आए?

- जवान बाजार घूमने किसके आदेश पर गए?

- नक्सलियों ने घर के कुछ गेट भी बंद किए। वो घर के अंदर कैसे पहुंचे ?

- स्माल एक्शन टीम ने जवान को पकड़ा, हथियार लूटा लेकिन बड़ा नुकसान क्यों नहीं पहुंचाया?

- हथियार लूटने के बाद नक्सलियों के पास जवान को गोली मारने और घर पर फायरिंग करने का पर्याप्त समय था पर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया?