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अपने खास जोन को छोड़कर दूसरे इलाकों में छोटे हमले कर ध्यान भटका रहे नक्सली

छोटी-छोटी कई वारदातों को अंजाम देकर दहशत का माहौल बनाया, लिबरेटेड जोन में दूसरे चरण में कर सकते हैं बड़े हमले।

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 08:42 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

जगदलपुर. पिछले तीन दिनों से ऐसा लग रहा है कि पूरे बस्तर में नक्सली तांडव चल रहा है। दंडकारण्य बंद से पहले और इस दौरान अलग-अलग हुई घटनाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि नक्सली बेलगाम हो गए हैं लेकिन इन दिनों हुई हिंसक घटनाओं को देखने से नक्सलियों की एक नई रणनीति सामने आ रही है। पिछले तीन दिनों में नक्सलियों ने किसी भी इलाके में कोई बड़ी वारदात को अंजाम ही नहीं दिया है। नक्सलियों ने साफ्ट टारगेट सिविलियन (आम नागरिक) को निशाने पर रखा।

जवानों की मुहिम को बड़ा झटका देने की तैयारी में

अलग-अलग राज्य और केंद्रीय स्तर पर काम करने वाली खुफिया एंजेसियों की रिपोर्ट को मानें तो नक्सली इस साल टीसीओसी (टैक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन) दो भागों में मना रहे हैं। पहले भाग की शुरुआत जनवरी में हुई है। इस दौरान इनके कम प्रभाव वाले क्षेत्रों में वारदातों को अंजाम देकर माहौल तैयार किया जा रहा है।

इसके बाद टीसीओसी के दूसरे भाग में सुकमा और नारायणपुर के अबूझमाड़ में लिबरेटेड जोन माने जाने वाले इलाकों में बड़ी वारदात को अंजाम देकर सुरक्षा बलों के जवानों की मुहिम को बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं। इसके अलावा खबर यह भी है कि भूमकाल दिवस के ठीक पहले या बाद में भी नक्सली अपनी ताकत का अहसास करवा सकते हैं।

ऐसे समझें बदली हुई नीति को
नक्सली पहले टीसीओसी महिला दिवस के बाद मनाते थे लेकिन इस बार यह जनवरी से शुरू हो गया। दंडकारण्य बंद के दौरान नारायणपुर, कांकेर, सुकमा, कोंडागांव, बस्तर जैसे जिलों में उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे दबाव जैसी स्थिति बने। बंद के दौरान सिर्फ दंतेवाड़ा और बीजापुर में ही वारदातों को अंजाम दिया गया जबकि नक्सलियों ने दंडकारण्य बंद की घोषणा की थी।

बड़े हमले की तैयारी, यही कारण-टीसीओसी समय से पहले शुरू किया

नक्सलियों ने अपने टीसीओसी का समय बदल दिया है। इस साल जनवरी में ही इसकी शुरुआत कर दी गई। टीसीओसी के पहले चरण में नक्सलियों ने पूरी प्लानिंग के साथ काम करते हुए वेस्ट बस्तर डिविजन में छोटी-छोटी वारदातों को अंजाम दिया। अभी नक्सलियों ने दंतेवाड़ा और बीजापुर को टारगेट में रखा है। यहां गाड़ियां जलाकर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया।

फोर्स से सीधी मुठभेड़ नहीं की नक्सलियों ने

नक्सलियों ने गाड़ियां जलाईं, कुछ लोगों पर हमले किए। एक साथ एक के बाद एक छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देने से ऐसा माहौल बना कि अचानक नक्सली हावी हो गए हैं। एक के बाद एक छोटी-छोटी घटनाओं ने नक्सलियों को बड़ा प्रचार दिया। इस पूरे मामले में खास बात यह है कि नक्सलियों ने कहीं भी फोर्स के साथ सीधी मुठभेड़ नहीं की। नक्सली ऐसा तब करते हैं जब वे कमजोर होते हैं या फिर उन्हें फोर्स का ध्यान भटकाना होता है। पुलिस के आला अफसर भी मान रहे हैं कि नक्सलियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और यह उनके कमजोर होने की निशानी है । हालांकि नक्सल मामलों के जानकार अफसरों से उलट राय रखते हैं और वे इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा मानते हैं।

सीएम ने ली जानकारी

नक्सलियों की इस साफ्ट टारगेट वाली रणनीति के सफल होने का अंदाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सीएम रमन सिंह ने विधानसभा सत्र के पहले दिन विधानसभा में ही पुलिस विभाग, इंटेलिजेंस और नक्सल ऑपरेशन संभाल रहे अफसरों से बस्तर के हालात पर चर्चा की और पूछा कि बस्तर में क्या चल रहा है। अफसरों ने सीएम को पूरी रणनीति से अवगत करवाया है।

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