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5 नक्सली घर में घुसे, हाथ-पैर बांधे और घर के पास ही सरपंच को मौत के घाट उतारा

इस मौत के बाद इस पूरे इलाके में लाल आंतक एक बार फिर हावी है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 08, 2018, 08:27 AM IST

5 नक्सली घर में घुसे, हाथ-पैर बांधे और घर के पास ही सरपंच को मौत के घाट उतारा

जगदलपुर(छत्तीसगढ़).दरभा इलाके के सबसे संवेदनशील कोलेंग से लगे कातारास में गुरुवार की देर शाम छिंदगुर के सरपंच को मौत के घाट उतार दिया। सरपंच पंडरू की मौत के बाद इस पूरे इलाके में लाल आंतक एक बार फिर हावी है। सरपंच की मौत के काफी दिनों पहले से ही नक्सली इस इलाके में सक्रिय हो गए थे। यही कारण है कि कोलेंग में सीअारपीएफ का कैंप खुलने के बाद भी इससे मात्र 6 किमी की दूरी पर शाम 7 बजे नक्सली छिंदगुर पंचायत के कातारास इलाके में रहने वाले सरपंच पंडरू के घर पहुंचे और उसकी हत्या कर दी। पिछले कुछ समय से इलाके में फोर्स का दबाव काफी कम हो गया है।

पांच लोग सीधे घर में घुसे, हाथ-पैर बांधा और घर के पास ही मौत के घाट उतार डाला
- सरपंच पंडरू को मारने के लिए बड़ी संख्या में नक्सली गांव पहुंचे थे लेकिन उनके घर में सिर्फ पांच नक्सली घुसे। उसे पकड़कर हाथों को बांध दिया गया। इसके बाद उसे घर से दस मीटर दूर लेजाकर धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई।

- वारदात को अंजाम देने के बाद नक्सली चांदामेटा की ओर चले गए। नक्सलियों ने एक पर्चा भी फेंका है जिसमें उसे पुलिस का मुखबिर बताया गया है। पर्चा कांगेर घाटी एरिया कमेटी की ओर से जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि हत्याकांड को नक्सली लक्षमण, संजू और पांडू के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।

- एएसपी लखन पटले ने बताया कि घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में फोर्स को रवाना किया गया है। पंडरू के शव का पीएम करवाया जा रहा है। पुलिस ने साल भर से इस इलाके में कोई ऑपरेशन नहीं चलाया है। इलाके से लगा चांदामेटा इन दिनों नक्सलियों का गढ़ बना हुआ है, जो पहाड़ों पर बसा है। खबर है कि सरपंच की हत्या के बाद नक्सली यहीं छिपे हैं।

सरपंच सड़क, बिजली, शिक्षा के लिए कर रहा था प्रयास

- कुछ समय पहले ही छिंदगुर को कोलेंग से अलग पंचायत बनाया गया था और पंडरू यहा का पहला सरपंच था। धुर नक्सल प्रभावित इलाके में रहने के बाद भी पंडरू गांव में विकास के सपने देखता था और वह गांव में सड़क, बिजली और शिक्षा लाने के लिए संघर्षरत था।

- कई बार नक्सलियों ने उसे धमकी भी भिजवाई थी लेकिन वह हमेशा कहता था कि वह पुलिस के लिए काम नहीं करता है बल्कि गांव के विकास के लिए काम कर रहा है। वह गांव के युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित करता था। कई लोगों की पढ़ाई का खर्च भी उसने स्वयं ही उठाया हुआ था।

फोर्स मुगालते में थी कि सिर्फ 7 नक्सली बचे हैं

इससे पहले इलाके के किसी भी गांव में नक्सलियों के आमद की सूचना मिलते ही पुलिस दो घंटे के अंदर उस इलाके में पहुंच जाती थी। इससे नक्सलियों में डर बना हुआ था कि कहीं न कहीं फोर्स उन्हें ट्रेस कर रही है लेकिन हाल के दिनों में सूचना होने पर भी पुलिस कोई बड़ा काम नहीं कर रही थी और विभाग के आला अफसर ये कहते हुए इनकी मौजूदगी को नजरअंदाज कर रहे थे कि इनकी संख्या सिर्फ 7 के करीब ही है इसलिए कुछ नहीं कर पाएंगे। अफसर भी इस गफलत में भी थे कि कोलेंग में कैंप खुलने के बाद अब नक्सली इस ओर नहीं आएंगे। इसी का फायदा नक्सलियों ने उठाया।

ये भी है कारण :चांदामेटा के लोग फोर्स के खिलाफ, जरूरत के लिए जाते हैं ओडिशा

इधर सरपंच पंडरू की मौत के साथ ही एक और बड़ी खबर बाहर निकलकर आई हैं। नक्सलियों की सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाला चांदामेटा अब भी नक्सलियों के लिए सुरक्षित गढ़ बना हुआ है। यहां के लोग पूरी तरह से फोर्स के खिलाफ हो गए हैं।
खुफिया सूत्रों की मानें तो इलाके में अभी गिनती के लोग बचे हैं लेकिन जितने भी लोग हैं, वे फोर्स के खिलाफ हैं। हालात ऐसे हैं कि इस इलाके के लोग दैनिक जरूरत का सामान लेने के लिए भी बाहर नहीं आ रहे हैं। ज्यादा जरूरी होने पर सीमावर्ती राज्य ओडिशा से सामान खरीदकर ला रहे हैं। यहां के लोग पहले चांदामेटा से छिंदगुर करीब 3 किमी और यहां से 6 किमी दूर कोलेंग जाते थे। कोलेंग से दरभा या जगदलपुर खरीददारी के लिए 30 किमी जाते थे। अब गांव वाले इधर नहीं आते बल्कि चांदामेटा के पहाड़ी रास्तों से होकर 15 किमी दूर ओडिशा के गांवों में जा रहे हैं।
चांदामेटा से पुलिस पिछले साल 35 लोगों को नक्सल मामलों में गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने सरेंडर भी किया था। कुछ की मौत मुठभेड़ में भी हुई है। वावजूद इसके गांव के लोग पुलिस के साथ नहीं जा रहे हैं।

24 दिसंबर को ही भास्कर ने किया था आगाह

पूर्व में फोर्स के दबाव का ही नतीजा था कि काेलेंग-छिंदगुर जैसे इलाके में नक्सलियों के साथ काम करने के लिए ग्रामीण तैयार नहीं हो रहे थे। यहां जनताना सरकार और जनमिलिशिया के लिए भी लोग नहीं मिल रहे थे। ऐसे में नक्सलियों ने दहशत फैलाने के लिए पुराने फार्मूले पर काम शुरु किया है। भास्कर ने 24 दिसंबर को ही खबर में आगाह किया था कि नक्सली दहशत फैलाने के लिए पुराने फार्मूले पर लौट आए हैं। इसके तहत वे आगजनी और हत्या जैसी वारदात को अंजाम देकर दहशत फैला रहे हैं।

पहाड़ों पर बसा है गांव यहीं छिपते हैं नक्सली
इलाके में लंबे समय तक काम करने वाले एक पुलिस अफसर ने बताया कि चांदामेटा पहाड़ों के बीच बसा है। यहां एक घर से दूसरे घर जाने के लिए भी टेकरी पर चढ़ना होता है। जब फोर्स यहा कार्रवाई के लिए जाती है तो लोग या तो पहाड़ाें,जंगलों या गुफाओं में छिप जाते हैं। भौगोलिक संरचना ऐसी है कि यहां चार हजार जवान भी मिलकर ऑपरेशन नहीं चला सकते हैं। पंडरू की हत्या के बाद नक्सली इसी तरफ गए हैं।

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Web Title: 5 nksli ghr mein ghuse, haath-pair baandhe aur ghr ke pass hi srpnch ko maut ke ghaat utaaraa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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