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13 बैंक लॉकरों से गए 1.5Cr के जेवर, चोरों से 35 KG सोना मिला पर लेने कोई नहीं पहुंचा

विधानसभा के पास स्टेट बैंक डाके में 10 लोगों ने लिखाई थी लॉकर से जेवर चोरी की कंप्लेंट।

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 08:12 AM IST
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रायपुर. विधानसभा के नजदीक स्टेट बैंक में 25 नवंबर की रात पड़े डाके में लोगों के 13 लॉकर काटकर आरोपी काफी जेवर भी ले गए थे। वारदात के बाद मौके पर पहुंचे लोगों ने पुलिस को जिस तरह अपने जेवरों का ब्योरा दिया था, उसके मुताबिक करीब डेढ़ करोड़ रुपए के जेवर इन लॉकरों में थे। लॉकरों के 10 मालिकों ने थाने में जेवर और कैश चोरी होने की कंप्लेंट भी की थी। रविवार को पुलिस ने दो चोरों को गिरफ्तार कर जेवर वगैरह को मिलाकर 35 तोला सोना आैर 17 लाख कैश बरामद किया है। चोरों ने जेवर जहां बेचे या छिपाए, वहां से और जेवर भी मिलने की संभावना है। लेकिन जिन्होंने भी लॉकर से जेवर चोरी होने की रिपोर्ट लिखाई थी, उनमें से अब तक एक भी जब्त हुए जेवरों की पहचान के लिए भी ताने नहीं पहुंचा है। पुलिस ने अपील की है कि लोग अपने जेवर के बिल या दूसरे सबूत लेकर पहुंचें, लेकिन दो दिन में किसी ने इस बारे में पूछताछ नहीं की है।


विधानसभा के पास स्टेट बैंक में जैसे ही तिजोरी के अलावा 13 लॉकर काटकर इनका माल भी चुराए जाने की बात फैली थी, ऐसे तमाम लोग सीधे पहुंचे थे, जिनके लॉकर मांढर की एसबीआई शाखा में थे। बैंक के सामने इकट्ठा हुए कई लोग यह कहकर रोने भी लगे थे कि उनकी जीवनभर की पूंजी लुट गई। पुलिस ने ऐसे सभी लोगों से शिकायत ली थी, जिन्होंने लाॅकर से माल चोरी होने की बात कही थी।

शिकायत में दो लोगों ने लॉकर से करीब 26 लाख का सोना चोरी होने का ब्योरा भी दिया था, लेकिन बाकी ने नहीं दिया। विधानसभा थाने के अनुसार चोरों से बरामद जेवर चार दिन से थाने में हैं, लेकिन एक भी शिकायतकर्ता यह जानने नहीं गया है कि थाने में रखे जेवरों में उनके भी हैं या नहीं।

चार दिन में कोई नहीं गया
वारदात के बाद जितने भी लोगों ने लॉकर से अपने जेवर चोरी होने की शिकायत दर्ज करवाई थी, पुलिस ने कहा था कि जेवर का बिल, रसीद अथवा जेवर उन्हीं का है, इसका प्रमाण लेकर थाने पहुंचे। उसके बाद ज्यादातर लोगों ने कहा था कि जेवर पुश्तैनी हैं। इसके बाद कोई नहीं पहुंचा। अब जबकि सामान बरामद हो गया है, कोई इनकी पहचान के लिए भी नहीं पहुंच रहा है।

माल पुश्तैनी हो तो सुपुर्दनामे की प्रक्रिया मुश्किल नहीं

लॉकर में जिन लोगों के जेवर थे लेकिन रसीद नहीं है और वे इन्हें पुश्तैनी बता रहे हैं, तो ऐसे लोगों के लिए अदालत से जेवर वापस लेना बहुत मुश्किल भी नहीं है। राजधानी के सीनियर क्रिमिनल लॉयर फैजल रिजवी का कहना है कि पुश्तैनी जेवर या संपत्ति को बहुत ही सामान्य प्रक्रिया के तहत कोर्ट से वापस ले सकते हैं। इसके लिए फरियादी को यही साक्ष्य लाने होंगे :-

- ऐसे साक्ष्य जो परिस्थिति के आधार पर मालिकाना हक सिद्ध करें।

- पुरानी तस्वीर, जिसमें फरियादी वही जेवर पहने हुए दिख रहा हो।

- कोर्ट में ऐसी पहचान बताए जैसे - जेवर की एक कड़ी गायब है...।

- जेवर रिपेयर करवाया गया हो तो उसकी रसीद भी चल सकती है।

- शपथ पत्र देकर कि जिस जेवर पर हक जता रहे हैं, उसी का है।

पुश्तैनी सामान के बिल नहीं
लोगों का कहना है कि उन्होंने जो जेवरात तिजोरी में रखे थे, वे पुश्तैनी थे यानी बुजुर्ग रिश्तेदारों से मिले हुए थे। इनकी रसीद उनके पास नहीं है। यही नहीं, पुश्तैनी सामान की रसीद लाना संभव भी नहीं है। इसीलिए कई लोग थाने जाकर अपने जेवरों पर दावा भी नहीं कर पा रहे हैं।

56 लॉकर में 11 थे खाली
पुलिस के मुताबिक बैंक में 56 लॉकर हैं। इनमें से 11 खाली थे। जबकि डकैती के दौरान डकैत 13 लॉकर ही तोड़ने में सफल हुए थे। इनमें से दो लोगों ने ही लॉकर में कुल 26 लाख रुपए के जेवर होने की जानकारी पुलिस को दी, बाकी ने नहीं दी। जिनके लॉकर काटकर चोरी हुई, उनमें विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव देवेन्द्र वर्मा, दलजीत सिंह, अभिषेक मिश्रा/नीतू, बैकुंठनाथ चतुर्वेदी, शारदानंद गुप्ता, सुधीर कुमार, अंजू/सुनील मिश्रा, गुरप्रीत कौर, शिवकुमार राय, अर्जुन बारीक, रवि नंदनी यादव, प्रियंका सुमन, अरुण कुमार तिवारी आैर प्रेमिन बाई हैं।

मोबाइल से पकड़े जाने का डर, इसलिए वॉकी-टॉकी लेकर

स्टेट बैंक में सेंध लगाने वाले चोरों को मोबाइल के लोकेशन से पकड़े जाने का अंदेशा था। बैंक में सेंध लगाना जिस दिन तय किया, उसके 24 घंटे पहले तीनों चोरों ने मोबाइल बंद कर दिया। सेंधमारी के दौरान चोर कार्डलेस और वॉकी टॉकी का उपयोग कर रहे थे। वॉकी टॉकी में सिग्नल देने का सिस्टम था। कार्डलेस काम नहीं करने पर चोरों ने वॉकी-टॉकी इसलिए रखा था, ताकि खतरा होने पर एक-दूसरे को सिग्नल से एलर्ट कर सकें।
पुलिस की पूछताछ में अनिल पवार और राजेश ने कई राज खोले। चोरों ने बताया कि उन्हें मालूम था कि पुलिस आजकर मोबाइल नंबरों के लोकेशन के आधार पर भी ट्रेस कर लेती है। इस वजह से वे जहां भी वारदात करने जाते थे, वहां 24 घंटे पहले अपना मोबाइल बंद कर लेते थे। रायपुर में वे पहले भी रेकी करने कई बार आ चुके थे। इस वजह से पुलिस को लोकेशन मिल गया। हालांकि चोरों ने पुलिस को चकमा देने की पूरी तैयारी थी। उनके पास कार्डलेस के साथ-साथ वॉकी टॉकी भी था। एक कार्डलेस और वॉकी टॉकी लेकर उनका साथी बाहर खड़ा था, जबकि दो भीतर बैंक का लॉकर और तिजोरी काट रहे थे। चोरों ने ही बताया कि अगर बाहर कोई आ जाता और निगरानी करने वाले के लिए फोन करना संभव नहीं होता तब वॉकी टॉकी से केवल सिग्नल देने पर वे समझ जाते कि बाहर खतरा है।

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