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छत्तीसढ़ : सुबह 6:30 बजे कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिरा, पूरी रात चर्चा हुई

कांग्रेस विधायकों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 17 घंटे की चर्चा के बाद सुबह 6:30 बजे गिर गया।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 23, 2017, 08:44 AM IST

  • छत्तीसढ़ : सुबह 6:30 बजे कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिरा, पूरी रात चर्चा हुई

    रायपुर.रमन सरकार के खिलाफ कांग्रेस विधायकों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 17 घंटे की चर्चा के बाद सुबह 6:30 बजे गिर गया। चूंकि शुक्रवार विधानसभा के शीत सत्र का आखिरी दिन था इस कारण अविश्वास प्रस्ताव पर तड़के 6 बजे तक चर्चा हुई। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने सरकार पर तीखे हमले किए। भूपेश ने सदन में सेक्स सीडी का मामला भी उठाया। पलटवार करते हुए भाजपा विधायकों ने कांग्रेस की राजनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए। नोंक-झोंक और विवादों के बाद वोटिंग हुई तो संख्या बल में सरकार ने बाजी मार ली।

    कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जनता के विश्वास की बदौलत ही हमारी सरकार है। सरकार के खिलाफ जो आरोप पत्र है वह झूठ का पुलिंदा है। कमजोर वर्ग के लिए काम करना, नि:शुल्क शिक्षा देना अगर अपराध है तो, हां मैं अपराधी हूं। गरीब-मजदूरों के लिए मैं काम करता रहूंगा। कांग्रेस को आरोप लगाने की आदत है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार दंभ से भर गई है, ये आचरण प्रदेश के लिए खतरा बनता जा रहा है। अपनी बात मनवाने के लिए ऐसी स्थिति बनाई जाती है कि उनसे पाक साफ कोई नहीं और हमसे बुरा कोई नहीं है।

    शुक्रवार को प्रश्नकाल के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस के धनेंद्र साहू ने चर्चा शुरू की। उसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक-एक कर बोलते गए। इस दौरान दोनों पक्षों के विधायक आपस में उलझते रहे। सरकार ने 168 बिंदुओं वाले विपक्ष के इस प्रस्ताव को अब तक का सबसे कमजोर प्रस्ताव बताया। कांग्रेस ने इसे अपनी राजनीतिक रणनीति बताया। सदन में भाजपा के 49, कांग्रेस के 39, निर्दलीय 1 और बसपा का 1 सदस्य है। एक सदस्य मनोनीत है। अविश्वास प्रस्ताव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस ने व्हिप जारी कर अपने-अपने विधायकों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी।


    कांग्रेस विधायकों ने लगाए आरोप


    धनेंद्र साहू:सरकार के सभी सदस्य भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जनता के पैसों को लूटा जा रहा है।
    सत्यनारायण शर्मा:गृहमंत्री को कानून-व्यवस्था से मतलब नहीं है, वे बाबाओं के चक्कर में पड़े हैं।
    अनिला भेड़िया: वेंडिंग मशीन खराब पड़ी हैं, बच्चियों को सेनेटरी नैपकिन नहीं मिल पा रहे।
    बृहस्पति सिंह:बीपीएल परिवार में नाम होने पर ही वृद्धावस्था पेंशन मिलेगी। यह ठीक नहीं है।
    कवासी लखमा:हम तेंदूपत्ता तोड़ते हैं तो त्योहार मनाते हैं। सरकार झूठा त्यौहार मना रही है।
    मोहन मरकाम: बस्तर में शिक्षा का विस्तार कांग्रेस की देन है। बस्तर के पहले आईएएस अफसर कांग्रेस की उपलब्धि।

    भाजपा विधायकों ने ऐसे किया पलटवार

    प्रेम प्रकाश पांडे:कॉलेज के दिनों में हम कई बार टाइटिल देखकर फिल्म देखने जाते थे, लेकिन फिल्म फ्लॉप निकलती थी। ऐसा ही कुछ ये अविश्वास प्रस्ताव भी है।
    राजेश मूणत:नेता प्रतिपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का यह कदम इसलिए उठाया ताकि कोई उन्हें 14 वां मंत्री न कह सके।
    बृजमोहन अग्रवाल:सिंहदेव को अंदरूनी राजनीति के कारण प्रस्ताव लाना पड़ा। उनके राष्ट्रीय नेताओं के पास यह शिकायत हुई थी कि उनको केवल सरगुजा से मतलब है। वे सरकारी हेलिकॉप्टर से उड़ान भरते हैं।
    केदार कश्यप: हमने विकास किया कांग्रेसियों ने अपना घर भरा। आदिवासी बच्चों को आगे बढ़ने के लिए हमने दिल्ली में यूथ हॉस्टल बनाया।
    शिवरतन: भ्रष्टाचार कांग्रेस की संस्कृति है। उन्होंने कुछ नेताओं के नाम का भी सदन में उल्लेख किया।
    संतोष बाफना:नगरनार स्टील प्लांट जल्द शुरू हो जाएगा।
    देवजी भाई पटेल: कांग्रेस में एक भी सदस्य ऐसा नहीं है जिसकी बदौलत ये सदस्यों का विश्वास जीत सके। 19 राज्यों से सफाया हो चुका आगे भी ऐसा ही होगा।

    इसलिए पास नहीं हुआ प्रस्ताव
    सदन में भाजपा के 49, कांग्रेस के 39 सदस्य हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय और एक बसपा का सदस्य है। एक सदस्य मनोनीत है। प्रस्ताव पास कराने के लिए कांग्रेस के पास बहुमत ही नहीं है।

    पहले भी 5 प्रस्ताव गिर चुके हैं, सबसे लंबी अवधि तक चर्चा का पिछला रिकार्ड नहीं टूटा
    17 साल के छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक निर्वाचित चार विधानसभा में सरकारों के खिलाफ 5 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं। सभी में सरकार की जीत हुई। इसी चौथी विधानसभा में सरकार के खिलाफ यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है। पहली विधानसभा में अजीत जोगी सरकार के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष नंदकुमार साय 30 सितंबर 2002 को पहला प्रस्ताव लाए थे। 12 घंटे 8 मिनट चली चर्चा के बाद 22 के मुकाबले 61 मतों से सरकार की जीत हुई थी। उसके बाद 29 जुलाई 2003 को दूसरा प्रस्ताव आया। 17 घंटे 8 मिनट चली चर्चा के बाद प्रस्ताव 23 के मुकाबले 54 मत से गिरा।

    द्वितीय विधानसभा में डॉ. रमन सिंह की पहली सरकार के खिलाफ तत्कालीन दिवंगत नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा ने 3 सितंबर 2007 को प्रस्ताव लाए। इसके खिलाफ 52 और पक्ष में 26 मत पड़े थे। 17 घंटे 56 मिनट चली चर्चा के बाद सरकार की जीत हुई।

    तीसरी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे रविंद्र चौबे ने रमन सरकार पर अविश्वास जताया। 16, 19 और 20 दिसंबर 2011 को 23 घंटे 25 मिनट चली चर्चा के बाद प्रस्ताव के पक्ष में 37 और विपक्ष में 48 मत पड़े थे।
    इस चौथी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने इसके पहले 24 जुलाई 2015 को पहला प्रस्ताव पेश किया था। 24 घंटे 25 मिनट के रिकॉर्ड समय तक चली चर्चा के बाद 37 के विरुद्ध 50 मतों से सरकार की जीत हुई थी। आज दूसरे प्रस्ताव पर करीब 15 घंटे की चर्चा के बाद सरकार फिर जीत गई।

    रात 3:30 बजे- सीडी टेम्पर करने वाले पकड़े नहीं जा रहे हैं, मैंने आपके बड़े नेता को एफआईआर कराने की सलाह दी थी
    जिस सीडी की बात की जा रही है, वो सोशल मीडिया में 1 माह से चल रही थी, तब तो किसी ने नहीं रोका। बारनवापारा में आपके बड़े नेता को मैंने फोन करके एफआईआर कराने की सलाह दी थी। तब सत्ता पक्ष ने जांच क्यों नहीं कराई? आका का पता नहीं, एफआईआर में नाम नहीं 11 घंटे में पकड़ लाए। इतनी तेज तो अमेरिकी एजेंसियां भी नहीं हैं। प्रकाश बजाज ने कोरे कागज पर साइन किया था। पुलिस इतनी तेज होती तो झीरम में हत्याकांड नहीं होता।


    सीडी टैंपर करने वाले को आज तक पुलिस खोज नहीं सकी। जिन्होंने गंदगी परोसी उनसे तो पूछताछ तक नहीं हुई। इसमें आप राजनीति देख रहे हैं, वर्ष 2013 की तरह फिर ब्रम्हास्त्र चलाया जा रहा है। सीबीआई सही दिशा में जांच करे, हम तो सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच की मांग कर रहे हैं। विनोद वर्मा को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि हमारी मदद कर रहे थे।

    ऐसा कोई विधायक नहीं जिसके खिलाफ केस नहीं। देवती कर्मा सोनकु को न्याय दिलाने कोर्ट में थी। देवती कर्मा किसी का अपहरण कर सकती है? फिर भी एफआईआर। कुरुदडीह जमीन मामले में मुझे परेशान करने के लिए सरकार ने मेरी मां और पत्नी तक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। अंतागढ़ में प्रजातंत्र का चीरहरण हुआ। सिर्फ इसलिए कि भूपेश बघेल को नीचा दिखाना है। खरीद-फरोख्त भी हुई। चुनाव बाद आलाकमान जिसे चाहेगा वह मुख्यमंत्री बनेगा, (मेज ठोकते हुए) लेकिन मेरी जिम्मेदारी बहुमत लाने की है और मैं लाकर रहूंगा।

    अजय चंद्राकर का जवाब- सामने वाले जानते हैं कि प्रदेश का विकास हो रहा है। लेकिन केवल दुर्गुण दिखाई देता है। ये सब मुख्यमंत्री बनने के कुत्सित दिवास्वप्न का हिस्सा है। अविश्वास प्रस्ताव इसीलिए लाया गया है।

    सुबह 5:05 बजे- चरित्र हत्या करने वालों को सजा मिले


    पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने बताया कि सनसनी फैलाने का काम विपक्ष न करे। चरित्र हत्या करना उचित नहीं। सीबीआई को जांच देने से दर्द क्यों हो रहा है। हाउस से इस्तीफा दे दूंगा, लेिकन चरित्र हत्या करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।

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Web Title: No Confidence Motion Against Chhattisgarh Government
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