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लैंड रेवेन्यू अमेंडमेंट पर नेशनल एसटी कमिशन का सरकार को नोटिस, पूछा जरूरत क्यों?

संशोधन के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने सभी 146 ब्लॉकों में शनिवार को प्रदर्शन करेगा।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 06:27 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रायपुर. भू-राजस्व संहिता संशोधन को लेकर भाजपा के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है। पार्टी के दिग्गज नेता और अजजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविचार नेताम ने सरकार से पूछा कि इस संशोधन की आखिर जरूरत क्यों पड़ी। इसे तत्काल स्थगित किया जाए। वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूछा है कि सरकार बताए कि कानून में इस संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी।

नेताम और साय ने भी खोला मोर्चा

आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आदिवासी नेता नंद कुमार साय ने भास्कर से कहा कि आदिवासियों की जमीन को लेकर कानून में किए गए इस संशोधन से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। दूसरी तरफ, संशोधन के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने सभी 146 ब्लॉकों में शनिवार को प्रदर्शन करेगा।

समाज ने संशोधन के अध्ययन के लिए सचिवों के साथ बैठक को 9 तक के लिए टाल दिया है। वहीं कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है। आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष शिशुपाल सोरी, विधायक मोहन मरकाम और संतराम नेताम ने भू-राजस्व संहिता में संशोधन संशोधन को आदिवासी हितों के खिलाफ बताया।

संविधान के खिलाफ है यह संशोधन : सोरी

शिशुपाल सोरी ने कहा कि भू-राजस्व संहिता की धारा- 165(6) आदिवासियों की जमीन के अंतरण को लेकर है। इसके तहत गैर आदिवासी को जमीन हस्तांतरित नहीं की जा सकती। सोरी ने कहा कि संशोधन विधेयक लाने के पहले राज्यपाल की ओर से कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया, जो संविधान के खिलाफ है। अधिसूचित इलाकों के कानून के संशोधन का वास्तविक अधिकार राज्यपाल के पास है, ऐसे में विधानसभा में संशोधन कैसे कर दिया गया। यह संशोधन संविधान के खिलाफ है। सोरी ने कहा कि जब तक संशोधन पर आदिवासी सलाहकार समिति में परामर्श नहीं हो जाता और जब तक इसके गुण-दोषों पर चर्चा नहीं हो जाती, तब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो सकता। संविधान में भी इसे प्रतिबंधित किया गया है।

विधायकों का आरोप, उद्योगपतियों के लिए हुआ संशोधन
कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि उद्योगपतियों को पिछले दरवाजे से लाभ पहुंचाने के लिए विधानसभा में इस बिल को लाया गया। हमने मांग की थी कि इस बिल को सलेक्ट कमेटी को भेजा जाए, लेकिन बहुमत के जरिए सरकार ने इस बिल को पारित कर दिया। आदिवासी क्षेत्रों की खनिज-संपदा को उद्योगपतियों को देने के लिए इसे लाया गया है। विधायक संतराम नेताम ने कहा कि इस संशोधन का हम आदिवासी क्षेत्रों में लगातार विरोध कर रहे हैं और जनजागरण अभियान चला रहे हैं। गौरतलब है कि कल सरकार के चार मंत्रियों ने भी भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक मामले में कांग्रेस पर आदिवासियों को भ्रमित करने का आरोप लगाया था।