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स्मार्ट कार्ड की राशि हड़पने के लिए जबरदस्ती आॅपरेशन, घूमते हैं निजी अस्पतालों के दलाल

अस्पताल के दलाल ने इन मरीजों को बताया कि उनका रायपुर में राजधानी सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल में निशुल्क इलाज किया जाएगा।

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 07:30 AM IST

कांकेर/पखांजूर. परलकोट इलाके के गांव पीवी-15 के ग्रामीणों की किडनी निकालने का हल्ला होने के बाद जांच करने स्वास्थ्य विभाग का अमला गांव पहुंचा। जांच में किडनी निकालने जैसी कोई बात तो सामने नहीं आई लेकिन स्मार्ट कार्ड से रकम निकालने ग्रामीणों को दलाल द्वारा रायपुर के सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल पहुंचाने और अस्पताल द्वारा पैसे के लिए जबरदस्ती आपरेशन करने व धमकाने का खुलासा हो गया।


पूरे मामले की विभाग जांच करने के साथ अस्पताल तथा उसके स्थानीय दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने तैयारी कर रहा है। मेडिकल विभाग की जांच के बाद पीड़ितों ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि महिला ने पेट में लगे टांके को देख किडनी निकालने का हंगामा खड़ा कर दिया था। 17 मार्च को रायपुर निवासी एसके मंडल ने एसेबेड़ा के एक व्यक्ति के साथ मिलकर बिना किसी अनुमति के पीवी-15 में मेडिकल कैंप लगाया था। इसमें स्मार्ट कार्डधारी दस मरीजों को इलाज के लिए चिह्नांकित किया गया। मंजू विश्वास, आलोमति विश्वास, रेणुका विश्वास, कमल मंडल, शांती रत्ना, नेपाल भक्त, कनक बढ़ई, सुभाष राय, पारूल साना तथा विपुल राय शामिल थी।

अस्पताल के दलाल ने इन मरीजों को बताया कि उनका रायपुर में राजधानी सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल में निशुल्क इलाज किया जाएगा। सभी को बहला फंसाकर रायपुर ले जाया गया। मंजू विश्वास को हाथ में फ्रेक्चर को देखते बोन ड्राफ्टिंग के लिए पेट में चीरा लगाया। इसके बाद उसका प्लास्टर कर दिया गया। 22 मार्च को सभी मरीजों को वापस गांव लाकर छोड़ दिया गया। इसके बाद जब मंजू विश्वास के पेट में दर्द होने लगा तो उसने अड़ोस पड़ोस में बात बताई। पेट में लगे दस टांको को देख उसे किसी ने कह दिया गया कि उसकी किडनी निकाल ली गई है। इसके बाद महिला ने इसे लेकर हल्ला मचाना शुरू कर दिया। अन्य मरीज भी यही समझने लगे और यह बात सोशल मीडिया में फैल गई।


अस्पताल की स्मार्ट कार्ड मान्यता रद्द करने अनुशंसा: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएल उयके ने बताया कि पीवी 15 के सभी मरीजों की जांच की गई। किसी की किडनी नहीं निकाली गई है। राजधानी अस्पताल ने पीवी 15 में बिना अनुमति शिविर लगाया तथा मरीजों को इलाज के लिए जिले से बाहर ले जाने की सूचना तक नहीं दी। महिलाओं का जबरदस्ती आपरेशन करते उनको डराया धमकाया गया। पुरे मामले की जांच कर प्रतिवेदन उच्चाधिकारियों को भेजा जा रहा है। अस्पताल का स्मार्ट कार्ड मान्यता रद्द करने अनुशंसा की जाएगी।

जिले में घूमते हैं निजी अस्पतालों के दलाल
इसके पूर्व धनेलीकन्हार व कन्हारपुरी इलाके के मोतियाबिंद से पीड़ित गरीबों को पकड़ जबरदस्ती इलाज के लिए रायपुर ले जाया गया था। इसमें से दो लोगों को दिखाई देना ही बंद हो गया था। जिला अस्पताल के आसपास भी कई बार निजी अस्पताल के दलाल घूमते देखे गए हैं जो मरीजों को जबरदस्ती अस्पताल ले जाते हैं।

इधर देवभोग में किडनी पीड़ितों ने किया प्रदर्शन

तीन ग्रामीणों के शिकायत के बाद, सीएम के 50 हजार रुपए देने के लिए बनी सुपेबेडा के किडनी पीड़ित परिवार के नाम की छटनी प्रशासन ने शुरू कर दी, लेकिन इस जांच पर अब कांग्रेस ने राजनीति शुरू कर दी है। घोषणा के अनुसार सभी प्रभावित परिवार को मुवावजा देने की मांग को लेकर प्रभावित परिवार के साथ कांग्रेसियों ने पहले तो हल्ला बोला, फिर एसडीएम कार्यालय का घेराव करने पहुंचे। दो दिन पहले कुछ ग्रामीणों नें सुपेबेडा में तैयार प्रभावितों के 104 लोगों की सूची में 75 फिसदी को फर्जी बताते हुए प्रशासन से जांच की मांग कर दी थी, इस शिकायत के बाद प्रशासन की संयुक्त टीम ने जांच भी शुरू कर दी है।


ग्रामीण त्रिलोचन समेत प्रभावित परिवार के लोगों ने इसे षणयंत्र करार देते हुए, बंद कमरे में जांच कर प्रभावितों के नाम की संख्या में कटौती करने का आरोप लगाया। मामले को कांग्रेस ने हाथों हाथ लेते हुए शनिवार को हल्ला बोला। युकां जिला उपाध्यक्ष संजय नेताम समेत ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आज 200 से भी ज्यादा संख्या में कांग्रेसी एकत्र हुए, समर्थन देने प्रभावित परिवार के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे।