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पीएम मोदी बोले- आप ही रिक्शा चलाती हैं या पुरुष; जवाब मिला-यहां ऐसी 51 महिलाएं और हैं

जहां कभी माओवादियों की सीटी बजती थी, वहां आज ये महिलाएं अपनी सवारी के लिए सीटी बजा रही हैं।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 08:18 AM IST
ई-रिक्शा चलाती सविता साहू। ई-रिक्शा चलाती सविता साहू।

नई दिल्ली/दंतेवाड़ा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियाे कार्यक्रम मन की बात के 40वें एपिसोड में धुर नक्सल क्षेत्र दंतेवाड़ा की आत्मनिर्भर आदिवासी महिलाओं की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि प्रशासन कि मजबूत इच्छाशक्ति ने यहां की महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए बड़ी पहल की है। नगर में आदिवासी महिलाओं को सड़क पर पायलेट के रूप में साफ देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, नगर के अंदरूनी इलाकों में जहां कभी माओवादियों की सीटी बजती थी, वहां आज ये महिलाएं अपनी सवारी के लिए सीटी बजा रही हैं। ई-रिक्शा से पर्यावरण की भी रक्षा हो रही है। पीएम ने कहा कि मैं दंतेवाड़ा की उन महिलाओं को बधाई देना चाहता हूं, जो ई-रिक्शा चलाकर स्वावलंबी बन रही हैं। महिलाओं के स्वावलंबी बनने का ये कदम देश के बदलते परिवेश की एक मिसाल है।


- ई-रिक्शा योजना को दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी सेवा के नाम से चलाया जाता है।

- इससे पहले अचार, पापड़, रेडी-टू-ईट फूड बनाने का प्रयोग किया गया था, जो सफल नहीं रहा।
- सबसे पहले 21 सितम्बर 2017 को दंतेवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने महिला समूहों को ई रिक्शा की चाबी दी थी।
- 4 महीने में 72 महिला समूहों को रिक्शे दिए गए हैं। 40 समूहों को हफ्तेभर के अंदर 40 और दिए जाएंगे।
- हर समूह को एक रिक्शा दिया गया है, एक समूह में 12 से 15 सदस्य हैं।
- दो सदस्य ई-रिक्शा चलाते हैं, एक ड्राइवर, एक हेल्पर होती है।
- हर सदस्य को मोबाइल भी दिए गए हैं। किसी तरह की जरूरत पड़ने पर वे मोबाइल में दिए एेप पर एक क्लिक करती हैं, जिससे उनकी लोकेशन की जानकारी मिल जाती है। इसका कंट्रोल रूम लाइवलीहुड कॉलेज में बनाया गया है।
- समूह की मदद एनआरएलएम (नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन) के जरिये की जाती है।


ऐसे हाेती है आमदनी

ये ई-रिक्शा अंदरूनी इलाकों में चल रहे हैं। इसका बड़ा फायदा ग्रामीणों को भी है। साप्ताहिक बाजार में इसकी बहुत डिमांड रहती है। ई-रिक्शा से हुई आमदनी को समूह में रखा जाता है। समूह की पूरी आमदनी को सदस्यों के बीच बांटा जाता है। एक सदस्य को औसतन 3-4 हजार की आय होती है। समूह में इसके अलावा गृह उद्योग, मुर्गे की कड़कनाथ प्रजाति का पालन भी किया जा रहा है।

पीएम को ई-रिक्शा के बारे में इन्होंने बताया

दंतेवाड़ा की सविता साहू और गीदम ब्लॉक की कुंती यादव। ये दो ई-रिक्शा चालक 11 अक्टूबर को दिल्ली में नानाजी देशमुख की जन्मशती पर आयोजित प्रदर्शनी में स्टॉल लगाने पहुंचीं। दोनों को पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वहां आ सकते हैं। दोनों की पीएम से मुलाकात भी हुई और इन्होंने पीएम को बताया ई-रिक्शा योजना के बारे में वो सब जिसका उल्लेख ‘मन की बात’ में पीएम ने किया। पीएम मोदी इनके स्टाॅल पर आए। खादी की क्रीम कलर की ड्रेस पहने उन्होंने नमस्कार किया। पढ़िए पीएम और दोनों महिला चालकों के बीच का संवाद...

मोदी: आप दोनों कहां से आई हैं?

सविता व कुंती : दंतेवाड़ा से, वहां हम ई-रिक्शा चलाती हैं।

मोदी : वाकई.. आप ही रिक्शा चलाती हैं या पुरुष चलाते हैं?

सविता व कुंती : हम दो नहीं हमारे यहां ऐसी 51 महिलाएं हैं जो ई-रिक्शा चलाती हैं।

मोदी : ये तो बहुत बड़ी बात है, आप लोगों का प्रयास बहुत ही खास है। अच्छा... ये बताइए आप लोगों को वहां कोई परेशानी तो नहीं होती? और हां... आप लोग को इसमें फायदा किस तरह होता है?
सविता व कुंती : हमारे समूह को 1.6 लाख का रिक्शा मात्र 32 हजार में मिला। इस योजना ने मेरा और मेरी जैसी अन्य महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया। आज मैं (सविता) अपनी 10 साल की बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हूं। ई-रिक्शा की चाबी मुझे डॉ. रमन सिंह ने दी थी।

मोदी : ये तो बहुत अच्छा है... आप लोग मेरी ओर से समूह की बाकी महिलाओं को भी बधाई देना।
(जैसा सविता साहू ने भास्कर को बताया।)