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पंचर बनाने वाले की बेटी फौज में करेगी नौकरी, पहले एयर होस्टेस के लिए हुई थी सिलेक्ट

गांव से 17 युवा फौज में हैं लेकिन कोई भी बेटी फौज में नहीं जा पाई थी।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 26, 2018, 07:37 AM IST

पंचर बनाने वाले की बेटी फौज में करेगी नौकरी, पहले एयर होस्टेस के लिए हुई थी सिलेक्ट

बालोद(छत्तीसगढ़).बालोद से धमतरी मार्ग पर बसे गांव चिटौद से यूं तो 17 युवा फौज में हैं लेकिन कोई भी बेटी फौज में नहीं जा पाई थी। यह कसक और ख्वाब पूरा किया पंचर बनाने वाले हेमुराम सेन की बेटी बबली (बबिता) सेन ने। बबली बहुत ही गरीब परिवार से है। उनके पिता गांव में साइकिल स्टोर व पान ठेला चलाते हैं। उसी पर घर पलता है। लोग अपने बेटे बेटियों को बबली की मिसाल देने लगे हैं। अभी बबली पश्चिम बंगाल में सालुगाड़ा बैकुंठ में छह महीने की ट्रेनिंग में हैं। मई में अपने गांव लौटेंगी।

जब तक गरीबी दूर नहीं करूंगी, शादी नहीं करूंगी
बबली की मां दुजबाई सेन ने कहा बबली कहा करती थी कि मां मैं बड़ी होकर अपने पैर पर खड़ी होकर दिखाऊंगी। बेटी बोझ समझी जाती है, इस कहावत को गलत साबित करूंगी। तीनों बहन लक्ष्मी, यमुना, करुणा की शादी हो चुकी है। बबली के लिए भी अच्छा रिश्ता आता था। लेकिन वह इंकार कर देती थी। कहती थी जब तक मैं कुछ बन न जाऊं, परिवार की गरीबी दूर न कर दूं। तब तक शादी नहीं करूंगी। हमने भी उसके निश्चय पर भरोसा किया। आज बेटी गांव से पहली फौजी बनी, इससे बड़ा गौरव कुछ नहीं है।

पहले दिल्ली का नाम सुन कर डर लगता था, अब हौसला देख डर नहीं लगता
पिता हेमुराम सेन ने कहा दो बार बबली का चयन निजी एयर होस्टेज के लिए हुआ था। उसके पास दिल्ली से ट्रेनिंग के लिए कॉल लेटर भी आया। दिल्ली बड़ा शहर है, अकेली कैसे जाएगी। वहां कैसे रहेगी। इस डर में हमने बबली को वहां नहीं भेजा। इस बार बिलासपुर में आर्मी भर्ती में गई थी। पहली बार में ही उसका चयन हो गया। जिसके बाद हमारा भी हौसला बढ़ा। फिर उसे जहां चाहे, वहां जाने की इजाजत दी। जिस दिल्ली से डर लगता था, वही मेडिकल के काम से 15 दिन बेटी अकेली रहकर आई।

परिवार में बेटी नहीं, बेटा बनना चाहती थी बबली और आज वह बन गई
चिटौद प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ईश्वरी सिन्हा ने कहा हमेशा बबली बेटी बेटा में फर्क नहीं करने की बात करती थी। वह परिवार में बेटे की तरह रहना चाहती थी। आज फौजी बनकर वह सच में परिवार का बेटा बन गई है। फौज में सेवा दे रहे गांव के गौकरण निषाद, परमानंद, युगल किशोर, महेंद्र सिन्हा ने कहा बबली में आगे बढ़ने का जुनून है। इधर कुछ दिन पहले बबली छुट्‌टी में घर आई थी, प्राइमरी स्कूल में उसके सम्मान में कार्यक्रम रखा गया। इसी स्कूल में वह पढ़ी थी।

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Web Title: pnchr banane vaale ki beti fauj mein karegai Naokari, pehle eyr hostes ke liye huee thi silekt
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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