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छत्तीसगढ़ चैंबर इलेक्शन बूथ के भीतर चला प्रचार, फर्जी वोट का हुआ हल्ला

रायपुर के कारोबारी पीछे, बाहर से ज्यादातर व्यापारी पहुंचे वोट देने, रायपुर के कारोबारियों ने 4087 वोट डाले।

Danik Bhaskar

Dec 19, 2017, 06:31 AM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ चेंबर के चुनाव पहली बार पुलिस के कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच हुए, फिर भी तीनों पैनलों में रह-रहकर शाम तक विवाद चलता। इस बार रायपुर के कारोबारियों ने 4087 वोट डाले, जबकि बाहर से आए 4614 व्यापारियों ने मतदान किया। इस दौरान फर्जी वोटिंग का भी हल्ला मचा और बूथ के भीतर प्रचार करने को लेकर तनाव होता रहा। एक-एक व्यक्ति को 42 पदाधिकारियों को वोट देना था, इसलिए शाम तक वोटरों की लंबी लाइनें लगी रहीं। पुलिस ने बिना पहचान-पत्र के किसी को भीतर जाने नहीं दिया, यहां तक कि महापौर प्रमोद दुबे को भी रोक दिया।

- चेंबर चुनाव के लिए गुजराती स्कूल, देवेंद्रनगर में वोटिंग शुरू होने तक दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, बिलासपुर, तिल्दा और भाटापारा समेत आसपास के कारोबारी बड़ी संख्या में पहुंच गए थे। इस वजह से दोपहर 1 बजे तक करीब 2000 वोट पड़ गए थे। शाम 5 बजे तक 63 फीसदी मतदान हुआ।

- चेंबर के 13,730 वोटरों में से करीब 8701 ने वोट डाले। रायपुर जिले के 8 उपाध्यक्ष और 8 मंत्री के लिए 42 उम्मीदवार होने से वोटिंग में काफी वक्त लगा। इस वजह से देर शाम तक लंबी लाइनें लगी रहीं। शहर के ज्यादातर मतदाता शाम 4 बजे के बाद पहुंचे।

- जो मतदाता कैंपस के अंदर थे, उन्हें शाम 5 बजे के बाद भी वोट डालने का मौका दिया गया। पूरे समय पैनलों के समर्थक चुनाव चिन्ह लेकर नारेबाजी करते रहे। दो मुख्य द्वार होने से भी वोटरों को अंदर जाने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। हालांकि इस गहमागहमी की वजह से देवेंद्रनगर और पंडरी रोड में रह-रहकर जाम लगता रहा।

तीनों का जीत का दावा
- मतदान के बाद व्यापारी एकता पैनल से अध्यक्ष के उम्मीदवार जितेंद्र बरलोटा, विकास पैनल से यूएन अग्रवाल और प्रगति पैनल से अमर गिदवानी ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। बरलोटा ने कहा उन्हें हर वर्ग का समर्थन मिला है।

- कारोबारियों ने किसी भी वाद से ऊपर उठकर वोट किया है, इसलिए पैनल के सभी उम्मीदवार चुने जाएंगे। यूएन ने कहा कि बाहरी कारोबारी बड़ी संख्या में वोट देने पहुंचे, इसलिए इसलिए उनके पैनल की स्थिति मजबूत हुई है। प्रगति पैनल से गिदवानी ने कहा कि पहली बार चुनाव लड़ने के बावजूद उनके पैनल को भारी समर्थन मिला है।

बड़ी संख्या में महिला वोटर, खूब चली कास्ट पॉलिटिक्स

-सभी पैनलों ने वोटरों के खाने-पीने का इंतजाम किया था। आते ही उन्हें चाय, बिस्किट और चॉकलेट दी जाती रहीं।
-चेंबर चुनाव में पहली बार बड़ी संख्या में महिला मतदाता भी दिखीं। वे अपने परिजन के साथ वोट डालने आईं थीं।
-प्रचार में एक-दूसरे पर जमकर हमला बोलने वाले पंच समिति के सदस्य एक ही पंडाल में बैठकर बतियाते दिखे।
-चुनाव में हावी जातिवाद मतदान के दिन भी दिखा। अपने-अपने समाज के वोटरों को लेकर प्रत्याशी आगे बढ़ते रहे।
-चुनाव में जरा भी चूक न हो, इसलिए विधायक श्रीचंद सुंदरानी करीब चार घंटे तक मुख्य द्वार के बाहर ही खड़े रहे।
-चुनाव में राजिम विधायक संतोष उपाध्याय समेत भाजपा के दर्जनों छोटे-बड़े नेता भी वोट डालने के लिए पहुंचते रहे।
-एकता पैनल का जैकेट कई लोगों को फिट नहीं था। साइज को लेकर परेशानी हुई तो कई लोग इसे बदलते नजर आए।
-पैनलों के नाश्ते और खाने के पैकेटों की कई बार अदला-बदली हो गई। नाराज समर्थक होटल वालों पर बरसते रहे।

पुलिस जवानों ने रोककर मेयर से पूछा पहचान पत्र
- चेंबर चुनाव में शामिल होने के लिए महापौर प्रमोद दुबे भी पहुंचे, लेकिन उन्हें मेनगेट पर कुछ पुलिस वालों ने रोक दिया। उनसे चेंबर का आईडी कार्ड मांगा तो वे नाराज हो गए। इस बीच समर्थकों ने हंगामा भी किया, बाद में उन्हें अंदर जाने दिया गया। वहां पहुंचे सीनियर पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सिपाही उन्हें पहचान नहीं पाए थे, इसलिए पहचान-पत्र मांगा।

फर्जी वोट की शिकायत कई बूथ पर हंगामा
- चुनाव के दौरान फर्जी मतदान की भी शिकायतें मिलती रहीं। कई बूथों में वोटरों ने शिकायत कर हंगामा किया कि उनका वोट किसी और ने डाल दिया। चुनाव करा रहे कर्मचारियों ने ऐसे लोगों को दोबारा वोट की अनुमति नहीं दी। इससे विवाद और बढ़ गया। पैनलों के समर्थकों ने इसकी शिकायत मुख्य निर्वाचन अधिकारी शिवराज भंसाली से भी की। उम्मीदवार बार-बार आरोप लगाते रहे कि किसी एक पैनल के पक्ष में फर्जी वोट डाले जा रहे हैं। इस वजह से कुछ बूथों में कुछ देर तक मतदान भी रुका। चुनाव अफसरों ने उनके आरोप सिरे से खारिज कर दिए।

ड्रेस कोड में नजर आए
चेंबर चुनाव लड़ रहे पैनलों के उम्मीदवार और समर्थक ड्रेस कोड में नजर आए। एकता पैनल के उम्मीदवारों और प्रमुख लोगों ने ब्लू जैकेट (सदरी) पहन रखी थी तो विकास पैनल वाले ऑरेंज रंग के जैकेट में दिखे। प्रगति पैनल के लोग गले में पीले रंग का दुपट्टा लगाए हुए थे।

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