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895 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर को 160 टन स्टील से दे रहे सहारा, मंदिर का भार एक हजार टन

जगमोहन मंडप में लगे चारों पिलर्स से जोड़ते हुए डेढ़-दो फीट का स्टेनलेस स्टील का बेस तैयार किया गया है।

संदीप राजवाड़े/सुधीर सागर | Last Modified - Jan 28, 2018, 06:44 AM IST

रायपुर.895 साल पुराने पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पहली बार बड़ा बदलाव किया जा रहा है। मंदिर के गर्भगृह से लगे जगमोहन मंदिर का काम फरवरी तक पूरा हो जाएगा। फिर इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपने सर्वे के बाद पाया था कि जगमोहन मंदिर के अंदर पिलर्स के ऊपर टिका पत्थर का एक टुकड़ा गिर गया है, इसे लेकर चेतावनी दी गई कि अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो मंदिर गिर सकता है। इसे हाई रिस्क माना गया। अब करीब 160 टन स्टील से बने बेस से मंदिर को अंदर से सहारा दिया जा रहा है। इससे मंदिर का भार सैकड़ों साल पुराने पिलर्स से हटकर स्टील पर आ जाएगा। दरअसल एएसआई ने 27 जनवरी 2017 से जगमोहन मंडप का काम शुरू किया। फरवरी 2018 तक काम पूरा होना है। इसके बाद एएसआई के मंदिर प्रशासन को हैंडओवर करते ही इसे खोला जाएगा।

मंदिर का भार एक हजार टन से ज्यादा है

मंदिर का काम देख रहे एएसआई के सीनियर कंजर्वेटिव ऑफिसर जेसी दाश ने बताया कि जगन्नाथ प्रभु के गर्भगृह और जगमोहन मंडप जुड़े हुए हैं। इसके बाद नाट्य मंडप और भोग मंडप है। गर्भगृह के सामने ही जगमोहन हॉल है, जिसमें मरम्मत और सुधार का काम किया जा रहा है। मंदिर के भार और कहीं-कहीं से पानी के रिसाव के कारण पिलर्स और उसके बेस में दरार आ गई। साथ ही जगह-जगह से पत्थर के टुकड़े गिर गए। इसे सुधारने के लिए बेस तो नहीं हटा सकते, क्योंकि मंदिर का भार एक हजार टन से ज्यादा है। इसलिए जिन जगहों में दरार थी, वहां ट्रीटमेंट किया गया है। इसके साथ जहां पत्थर टूट गए हैं या क्रेक हो गए हैं, वहां उस साइज का ही दूसरा पत्थर बनाकर उसे फिट किया गया है।

30 फीट ऊंचे हॉल में करीब 15 फीट पिलर्स को स्टोन से ढंका जाएगा

- मंदिर के भार से पिलर्स में पड़ी दरारों को भरा गया है और इसकी मरम्मत की गई है। गर्भगृह के सामने जगमोहन मंडप में लगे चारों स्तंभ (पिलर्स) से जोड़ते हुए डेढ़-दो फीट का स्टेनलेस स्टील का बेस तैयार किया गया है।

इस तरह से स्टील के पिलर्स खड़े किए गए हैं कि पुराने पत्थरों के पिलर्स से अलग न दिखाई दें। स्टील और मंदिर के पुराने पत्थर के पिलर्स अलग-अलग न दिखाई दें, इसलिए नए पिलर्स को स्टोन से कवर किया जा रहा है।

- 30 फीट ऊंचे हॉल में करीब 15 फीट पिलर्स को स्टोन से ढंका जाएगा। हॉल में ऊपर किए गए स्टील के काम और बेस न दिखाई दे, इसलिए 15 फीट की ऊंचाई में लकड़ी की सीलिंग लगाई जा रही है।

- इस लकड़ी के फ्रेम में पद्मविभूषण शिल्पकार रघुनाथ महापात्रा के कारीगर ओडिशा की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी कलाकृति दर्शाएंगे। इस रेनोवेशन में करीब 6 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इससे पहले हुए बाहर के काम में 1.5 करोड़ रुपए लगे थे।

दो साल पहले सामने आई थी दरार
जगन्नाथ मंदिर पुरी के जनसंपर्क अधिकारी लक्ष्मीधर पूजा पंडा ने बताया कि जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवान के करीब 137 छोटे-बड़े मंडप हैं। इनमें से गर्भगृह के ऊपरी मंदिर के हिस्से का 1976 और 1996 तक काम किया गया है। उस दौरान मंदिर के अंदर कोई काम नहीं हुआ, बल्कि बाहर आई दरार और चक्र को लेकर ट्रीटमेंट किया गया। इसके बाद एएसआई के नियमित होने वाले सर्वे में दो साल पहले जगमोहन मंडप के अंदर लगे पिलर्स में आई दरार और उसके बेस का पत्थर टूट कर खिसकना पाया गया। इसके सुधार के लिए काम जनवरी 2016 में शुरू हुआ।

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Web Title: 895 saal purane jgannaath mandir ko 160 tn stil se de rahe shaaraa, mandir ka bhaar ek hazaar tn
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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