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42 हजार दीपक जलाने में लगे 10 हजार लोग, गोल्डन बुक में वर्ल्ड रिकॉर्ड शामिल

सबसे अधिक 42 हजार दीपक रतनपुर मंदिर से एक ट्रक में भरकर पहुंचाए गए।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 08, 2018, 07:22 AM IST

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    रायपुर(छत्तीसगढ़). नवापारा राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूूर नदी के त्रिवेणी संगम पर आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला बुधवार को दीपों से जगमगा उठा। राजीव लोचन मंदिर, कुलेश्वर महादेव समेत विभिन्न देवस्थलों पर भी दीप प्रज्वलित किए गए। सचिव धर्मस्व और जल संसाधन सोनमणि वोरा के मुताबिक 3 लाख 30 हजार दीप जलाए गए। दीप जलाने में 10 हजार से ज्यादा पुजारी और स्वंयसेवकों ने मदद की। इसे गोल्डन बुक में वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया। इस मौके पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर विशोकानंद जी, धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, साध्वी प्रज्ञा भारती समेत अनेक संत और धर्म प्रमुख मौजूद थे।

    एक ट्रक दीपों के साथ वहां से टीम भी पहुंची

    - राजिम का त्रिवेणी तट बुधवार को भव्य आयोजन का साक्षी बना। कई दिन की तैयारियों का परिणाम शाम को दिखा जब पूरा का पूरा राजिम शहर दीप्तिमान आभा से दमक उठा। कुंभ कल्प परिसर में करीब 3 लाख दीप जलाए गए। आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरे प्रदेश के विभिन्न शक्तिपीठों और देवस्थलों ने सहयोग किया।

    - दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, जतमई घटारानी, डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर, रतनपुर के महामाया मंदिर, रायपुर के विभिन्न मंदिरों के अलावा अन्य जिलों से दीप जुटाए गए।

    - धर्मस्व सचिव सोनमणि वोरा ने बताया कि सबसे अधिक 42 हजार दीपक रतनपुर मंदिर से भेजे गए थे। एक ट्रक दीपों के साथ वहां से टीम भी पहुंची जिसने आयोजन में सहयोग दिया। वोरा ने बताया कि पूरे परिसर को 34 सेक्टरों में बांटा गया। इसमें 10 हजार से अधिक ने सहयोग दिया। इसी सामूहिक प्रयास से ये आयोजन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सका।

    शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने दी राजिम कुंभ को मान्यता

    शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने राजिम कुंभ कल्प में संत समागम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य मंच से कहा कि राजिम कुंभ में सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए काम हो रहे हैं। धर्म की हो रही हानि रोकने के लिये इससे पुनीत कार्य कोई दूसरा नही हो सकता। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम 4 पीठों के शंकराचार्यों को भगवान शंकराचार्य के स्वरूप की मान्यता सनातन धर्म मे मिली है। अगर मुझे इस रूप में समाज स्वीकार करता है तो इस नाते मैं भी इस आयोजन को कुंभ के रूप में प्रमाणित करता हूँ। साथ ही कहा कि देश के अन्य राज्यों की सरकारें भी ऐसा ही आयोजन करें ताकि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखा जा सके। आज संत समागम की खास बात यह भी रही कि आज कुंभ में पधारे संत महात्माओं के अभिनंदन,विश्व शांति और छत्तीसगढ़ की समृद्धि के लिए साढ़े तीन लाख 61 हज़ार दिये प्रज्वलित किये गए थे। यह विश्व कीर्तिमान था। शंकराचार्य जी के समक्ष गोल्डन बुक ऑफ रिकार्ड के एशिया हेड डॉ मनीष बिश्नोई से इसका प्रमाणपत्र मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह,धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और धर्मस्व, जल संसाधन सचिव सोनमणि वोरा ने ग्रहण किया।

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