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दो पीएम के कहने पर भी मैंने साइन नहीं किए, इसलिए रामलला तंबू में- शंकराचार्य निश्चलानंद

शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने अयोध्या राम मंदिर को लेकर कही ये बात।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 30, 2018, 06:43 AM IST

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    गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती। -फाइल

    कवर्धा(छत्तीसगढ़).गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने सोमवार को कवर्धा में कहा कि नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते अयोध्या में मंदिर व मस्जिद दोनों बनाने के लिए उनसे सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने का निवेदन किया था। उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा करने से मना कर दिया। इस वजह से रामलला आज तक तंबू में हैं। मेरे अलावा तो सभी वैष्णावाचार्य और शंकराचार्य हस्ताक्षर कर चुके थे। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संबंध में हमसे कोई संपर्क नहीं साधा है।’

    प्रधानमंत्री वाजपेयी ने शत्रुघ्न सिन्हा को मेरे पास दिल्ली भेजा था

    पुरी शंकराचार्य ने यहां आयोजित विचार गोष्ठी में कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने शत्रुघ्न सिन्हा को मेरे पास दिल्ली भेजा था। वे केवल एक वाक्य बोले, ‘वाजपेयीजी की भावना है- आप मस्जिद और मंदिर दोनों बनने की अनुमति दें।’ मैंने मना कर दिया, वाजपेयी ने मेरी बात का सम्मान किया और मंदिर-मस्जिद दोनों नहीं बनने दीं। अगर मैंने हस्ताक्षर कर दिए होते, तो मस्जिद भी पक्की होती, रामलला का मंदिर भी पक्का होता।+

    जर्सी गाय में गाय का लक्षण ही नहीं
    श्रीमद् भागवत कथा में धर्म सभा और विचारगोष्ठी को संबोधित करने मड़मड़ा पहुंचे पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती गोवंश की अहित चाहने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आजकल तो संतों और महात्माओं के यहां भी जर्सी गायें दिखती हैं, जिनमें गाय के लक्षण ही नहीं हैं।
    उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग सोचते हैं कि उनका काम ट्रैक्टर के आधार पर ही चल जाएगा तो वे भी गोवंश की हत्या में बराबर भागीदार है। शंकराचार्य ने कहा कि गोवंश बचेगा, तो देश बचेगा। गोवंश का इतना महत्व है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि में गाय का महत्व है। गाय की संपत्ति का अपहरण सर्वथा अनुचित है। यदि आप सोचते हैं कि ट्रैक्टर के आधार पर ही हमारा काम बन जाएगा, तो इसका अर्थ है कि गोवंश की हत्या में आपका अप्रकट हाथ हो ही गया। विचित्र बात यह है कि संत महात्मा के यहां भी प्राय: जर्सी गाय दिखाई पड़ती है। गोशाला में भी प्राय: जर्सी गाय दिखाई पड़ती है। इनमें गाय का लक्षण ही नहीं है।

    गांधी जी ने कहा था, स्वतंत्र भारत होगा, तो रामराज आएगा, लेकिन इसका विपरीत हुआ

    देश में रामराज्य के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि गांधी जी ने कहा था स्वतंत्र भारत होगा, तो रामराज्य आएगा। लेकिन ठीक इसके विपरीत राज्य आया। ऐसी स्थिति में राम राज्य को कौन ला सकता है। जो रामजी का भक्त हो, वेदशास्त्रों में आस्था अमिट हो और रामराज्य के स्वरूप को ठीक-ठीक समझने में समर्थ हो। धर्म सम्राट करपात्री जी ने बहुत सोच समझकर राम राज्य परिषद की स्थापना की। उसके पीछे कारण था कि भारत में राजतंत्र समाप्त हो चुका था। लोकतंत्र को क्रियान्वित करने का प्रकल्प चल रहा था। धर्म सम्राट ने रामराज्य परिषद की स्थापना की और स्वतंत्र भारत के प्रथम चुनाव में ही 3सांसद राम राज्य परिषद के हुए। सभा में अन्य बिंदुओं पर भी विचार रखे।

    गोपालन करने से होता है उत्कर्ष

    विदेश में भारत का जो देशी गोवंश है, वो इतना रिस्ट-पुष्ट और सुंदर ढंग से विकसित किया गया है, कि वे लोग गौरव का अनुभव करते हैं। सब प्रकार का उत्कर्ष गोवंश के पालन से होता है। चार-पांच महीने पहले डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी कानपुर में मिले थे। उन्होंने अनुभव सुनाया कि किसी गरीब व्यक्ति को उन्होंने कहा कि गरीबी दूर करना चाहते हो, तो गोवंश का पालन करो। उनकी बात पर विश्वास करके उस व्यक्ति ने गाय का पालन किया और वह धनी हो गया। गोवंश में लक्ष्मी का निवास है। अपने ऊपर कृपा करके गोवंश को जीवित रखने का प्रयास करें।

    कागज पर ही रामराज परिषद का नाम
    शंकराचार्य ने कहा कि प्रथम चुनाव में ही रामराज्य परिषद को सफलता मिली थी। लगभग 52 विधायक राजस्थान में थे और कोई षड्यंत्र किया गया कि जो मुख्यमंत्री होते, उन्हें मरवा दिया गया। अब कागज पर ही रामराज्य परिषद का नाम रह गया है। अभी शरद पूर्णिमा के अवसर पर रामराज्य परिषद की बैठक में ओडिशा के पुरी के मनोज रथ को संयोजक नियुक्त किया है। हम शंकराचार्य के पद पर हैं।

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    कवर्धा विचारगोष्ठी में मौजूद पुरी शंकराचार्य।
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Web Title: Shankaracharya Nishchalanand Statement About Ram Mandir
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